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नवरात्रि व्रत की महिमा – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: कौशल देश में सुशील नाम का एक निर्धन ब्राह्मण रहता था । प्रतिदिन मिलने वाली भिक्षा से वह अपने परिवार का भरण-पोषण करता था । उसके कई बच्चे थे । प्रात:काल वह भिक्षा लेने घर से निकलता और सायंकाल लौट आता था । देवताओं, पितृों और अतिथियों की पूजा करने के बाद […]

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रौच्य मनु – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: प्राचीन समय की बात है, प्रजापति बनने से पूर्व रुचि नामक युवक ने अपने लिए न तो किसी घर या महल की स्थापना की और न ही कभी किसी आश्रम की । वह मोह और अहंकार का त्याग कर सदा एक स्थान से दूसरे स्थान पर विचरता रहता था । वह दिन […]

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कपिल अवतार – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: प्रजापति कर्दम ब्रह्माजी के मानस पुत्र थे । ब्रह्माजी ने जब उन्हें प्रजा की उत्पत्ति करने का परामर्श दिया, तब भगवान् विष्णु को प्रसन्न करने के लिए वे सरस्वती नदी के तट पर कठोर तपस्या करने लगे । उनकी तपस्या दस हजार वर्षों तक चली । उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान् […]

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ग्राह और गजेन्द्र का उद्धार – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: प्राचीन समय की बात है क्षीरसागर में त्रिकूट नामक एक श्रेष्ठ पर्वत स्थित था । स्वर्ण, रजत और लौह से निर्मित उसके तीन शिखर थे । उसकी वैभवता और ऐश्वर्य को देखकर अनेक देवगण वहाँ निवास करते थे । त्रिकूट पर्वत की तलहटी में वरुण देव का ऋतुमान नामक एक सुंदर उद्यान […]

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नारायण नाम की महिमा – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: प्राचीन समय की बात है, कान्यकुब्ज नामक नगर (वर्तमान कन्नौज) में एक ब्राह्मण रहता था । उसका नाम अजामिल था । वह बाल ब्रह्मचारी विनयी जितेन्द्रिय सत्यनिष्ठ मंत्रवेत्ता और शुद्ध हृदय का स्वामी था । वह सदा पिता गुरुजन और वृद्धों की सेवा में तत्पर रहता था । एक बार पिता की […]

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नारद का मोह भंग – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha:एक बार की बात है, नारद मुनि ने हिमालय पर्वत की एक सुंदर गुफा में लम्बे समय तक तपस्या की । नारदजी के घोर तप से इन्द्र विचलित हो उठे । देवराज इन्द्र को यह भय सताने लगा कि तप सफल हो जाने पर नारद कहीं उनके सिंहासन की माँग न करने लगें […]

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राजा सुरथ – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: प्राचीन समय की बात है-जगदलपुर में सुरथ नाम के एक चन्द्रवंशी राजा राज्य करते थे । राजा सुरथ सत्यवादी, कर्मनिष्ठ, गुरु में श्रद्धा रखने वाले तथा सदाचारी व्यक्ति थे । एक बार पड़ोसी देश के राजा ने सुरथ के राज्य पर आक्रमण कर दिया । दोनों राज्यों की सेनाओं में अनेक दिनों […]

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दूरी—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Motivational Story: परेश पंडित जी से पूछे बिना कुछ नहीं करता था। बहुत दिन से पंडित जी की शरण में था। संतान सुख नहीं मिला। आखिरकार ईश्वर के दरबार में सुनवाई हो गई और बड़े मान -गुन का बेटा हुआ। वह बेटे का मुंह देखने को छटपटा रहा था। तभी पंडित जी आए और परेश […]

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वैवस्वत मनु – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: भगवान् सूर्य का विवाह विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से हुआ । विवाह के उपरांत संज्ञा ने रेवस्वत और यम (यमराज) नामक दो पुत्रों और यमुना (नदी) नामक एक पुत्री को जन्म दिया । संज्ञा बड़े कोमल स्वभाव की थी, जबकि सूर्यदेव प्रचंड तेजवान थे । संज्ञा सूर्यदेव के तेज को बड़े कष्ट […]

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भक्तराज ध्रुव – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: ब्रह्माजी के मानस पुत्र स्वयंभू मनु की पत्नी शतरूपा ने प्रियव्रत और उत्तानपाद नामक दो पुत्रों को जन्म दिया । वे दोनों ही पृथ्वी का पालन करने लगे । उनकी सुनीति और सुरुचि नामक दो पत्नियों थीं । उन्हें सुनीति से ध्रुव और सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र प्राप्त हुए । उत्तानपाद […]

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