अंशु ने अपनी जान और चन्दानी की नौकरी खतरे में डालकर अंशु की इज्जत तो लुटने से बचा ली, लेकिन अपने दिल के चैन को लुटने से नहीं बचा पाया। अपराध की इस दुनिया से निकलने के लिए अंशु उसकी ज़िंदगी में एक वजह और उम्मीद की तरह दाखिल हुई थी। कितनी दूर रह पाएगी ये उजाले की सुबह उससे?
Tag: एक अपराधी की प्रेम कथा
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बोझिल पलकें, भाग-8
चन्दानी के बेटे रंधीर के लंदन से आने की खुशी में दी गई पार्टी में अजय और अंशु आमने-सामने तो थे, मगर उनकी अजनबियत अभी तक बरकरार थी। रंधीर के चरित्र के खोट चन्दानी के लाख छिपाने के बावजूद एक के बाद एक सामने आ रहे थे। अब जानिए इस उपन्यास के अगले भाग में कि क्या हुआ पार्टी में।
