वह चांद जिसे अजय आसमान में देखकर ही सब्र किए बैठा था, अब वह अजय के आंगन में उतरना चाहता था। अजय के दरवाज़े पर नई खुशियां दस्तक दे रही थीं, पर अजय, क्या करेगी अब अजय?
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बोझिल पलकें, भाग-25
जिस पिता के जीवन को बचाने के लिए अजय ने अपनी जान तक की परवाह नहीं की, आज उसी मोड़ पर उसके सामने एक ऐसा रास्ता खुल रहा था, जहां से उसे अपने पिता की रिहाई और चन्दानी के अपराधों का भंडाफोड एक साथ नजर आ रहा था। क्या था वह रास्ता?
बोझिल पलकें, भाग-24
सच को सबूत की जरूरत नहीं होती और आज अंशु भी बिना कहे अजय की सारी सच्चाई के करीब पहुंच चुकी थी। ऐसे में अजय की खुद्दारी और सच्चाई ने उसे मजबूर कर दिया कि वह भी अपने प्यार के आगे कुछ भी न छिपाए। फिर क्या परिणाम रहा इस सच्चाई का?
बोझिल पलकें, भाग-23
जिस अंशु को अजय अपनी जिंदगी में उम्मीद की किरण मान बैठा था, वही अंशु आज अजय के अपराधी होने की सारी सच्चाई जानकर उससे मुंह फेरे बैठी थी। तो क्या अजय औऱ अंशु का प्यार पैदा होने से पहले ही दम तोड़ने वाला था?
बोझिल पलकें, भाग-21
जिस उम्मीद का दामन थामकर अजय अंशु के साथ अपनी जिंदगी की एक नई शुरुआत चाहता था, वह उम्मीद खत्म हो चुकी थी। अब अजय एक बार फिर अपराध की दुनिया के उसी अंधेरे में लौट चुका था और अगला गुनाह अंजाम देने जा रहा था, लेकिन क्या वह इस बार भी उतना ही सौभाग्यशाली था, जितना ही हमेशा हुआ करता था या फिर किस्मत उसे पूरी तरह से निराश कर देने पर उतारू थी?
बोझिल पलकें, भाग-16
अजय अंशु के साथ एक नई जिंदगी का सपना देख रहा था, लेकिन जिंदगी उसे कुछ और ही दिखाना चाह रही थी। चन्दानी के अपराध-समूह में शामिल होकर अजय एक ऐसी कीचड़ में धंस चुका था, जहां से जीते-जी निकलना नामुमकिन था। अब क्या होगा अजय की जिंदगी का, उसके सपनों का?
बोझिल पलकें, भाग-15
एक अपराधी की जिंदगी जीने को मजबूर अजय के लिए अंशु उम्मीद की वह किरण थी, जिसके भरोसे पर वह सोच रहा था कि एक दिन वह इस अपराध की अंधेरी दुनिया को छोड़कर उजालों में सांस लेगा। पर क्या ये इतना आसान था?
बोझिल पलकें, भाग-14
अजय की मदद से किसी तरह बची अंशु अपने घर पहुंचकर अपनी मां को सारी घटना बताती है। उधर अजय भी पुलिस से फारिग होकर अपने घर पहुंच तो जाता है, लेकिन उसका मन अब भी अंशु के पास ही रह गया है।
बोझिल पलकें, भाग-9
अंशु जितनी सुंदर थी, उतनी ही स्वाभिमानी और गरिमामयी भी। रंधीर के आने की खुशी में हुई पार्टी में भी अंशु ने अपने मान की रक्षा के लिए कुछ ऐसा किया कि रंधीर और चन्दानी तिलमिला कर रह गए अपमान की आग से। क्या हुआ था ऐसा, जानिए आगे की कहानी पढ़कर।
बोझिल पलकें, भाग-7
एक सफर में हमसफर रहे अजय और अंशु चंदानी के बेटे के आने की खुशी में दी गई पार्टी में अब आमने-सामने तो थे, लेकिन मौके का फायदा रंधीर उठा रहा था। हालांकि एक खलिश का एहसास तो अजय और अंशु दोनों को ही हो रहा था। क्या होगी अब इन दोनों की नियति, जानिए आगे।
