सेक्स के लिहाज़ से मौजूदा समय मानव इतिहास का सबसे उन्मुक्त दौर कहा जा सकता है.बीते चार दर्शकों की तकनीक ने यौन सम्बन्धों को उन्मुक्तता दी है,चाहे वो गर्भनिरोधक गोलियाँ हों या फिर ग्रिंडरऔर टिंडर जैसे ऐप.ये सब मिलकर यौन संबंधों को नया आयाम देते हैं.इतना ही नहीं सामाजिक मान्यताओं के लिहाज़ से भी समलैंगिकता,तलाक़,शादी से पहले सेक्स संबंध, और एक साथ कई से यौन संबंध, जैसे चलन अब कहीं ज़्यादा स्वीकार किए जा रहे हैं.बावजूद इन सबके,शोध अध्ययन ये बताते हैं कि पिछले दशक की तुलना में लोग कम सेक्स कर रहे हैं.कारण कई हैं लेकिन सबसे अहम् कारण है 

तकनीक का इस्तेमाल-एक तो ऑनलाइन पोर्नोग्राफ़ी और दूसरा सोशल मीडिया.ऑनलाइन पोर्नोग्राफ़ी के बढ़ते चलन से कई लोगों में इंटर्नेट सेक्स एडिक्शन जेसी बीमारियां भी देखने को मिल रही हैं.शोधकर्ताओं के मुताबिक़ पोर्न देखने वाले लोगों की सेक्स सम्बंध बनाने के प्रति अरुचि हो जाती है.ये गिरावट सभी धर्म,सभी नस्ल,सभी क्षेत्र,शिक्षित और अशिक्षित सभी तरह के लोगों में देखने को मिलती है.एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार रोज़ाना पोर्न देखने वाले,वीभत्स तरीक़े से सेक्स करना पसंद करते हैं.

सोशल मीडिया-पोर्नोग्राफ़ी के अलावा सोशल मीडिया से जुड़े लोग,अपने बेडरूम में एक साथ वक़्त नहीं बिता पाते हैं.सेक्स से ज़्यादा लोग मोबाइल की स्क्रीन में दिलचस्पी लेने लगे हैं,लेकिन कुछ विशेषज्ञो के मुताबिक़,इंटर्नेट सेक्स एडिक्शन से लोगों की सेक्स के प्रति दिलचस्पी बढ़ी भी है

काम का दबाव-सिर्फ़ तकनीक से आम लोगों का सेक्सुअल जीवन प्रभावित होता हो ऐसा नहीं कहा जा सकता.इसके अलावा काम के दबाव का भी असर लोगों के बेडरूम पर पड़ता है.इसकी थकान और तनाव से भी लोगों का सेक्स जीवन प्रभावित हो रहा है.कपल्स एक दूसरे को समय नहीं दे पाते.चूँकि ये समस्या मल्टी डायमेंशनल है,लिहाज़ा इसके उपाय भी मल्टी डायमेंशनल ही हैं.

जॉब सैटिसफ़ैक्शन-ख़राब नौकरी की वजह से भी व्यक्ति तनाव ग्रस्त हो जाता है .आज का युवा और के चक्रव्यूहों में इस तरह फ़ँसा हुआ है की उसे ,उस से बाहर निकलने का कोई मार्ग ही नहीं दिखाई देता.महत्वकांक्षाएँ तनाव को जन्म देती हैं,जिससे होर्मोंन का स्तर गड़बड़ा जाता है. महिलाओं में मेनपॉज़ और पुरुषों में एंड्रोपौज जैसे परिवर्तन समय से पूर्व ही दिखाई देने लगते हैं.

असुरक्षा का बोध-आज की मौजूदा युवा पीढ़ी,अपना घर बनाने की मुश्किल ,जलवायु परिवर्तन और सम्प्रदायिकता के ख़तरों के बीच रह रही है,और इस सबका असर भी मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है,जिससे सेक्स लाइफ़ प्रभावित हो रही है.

पुरुषों में यौन रोग बढ़े हैं-देश की राजधानी में लगभग बीस प्रतिशत युवा,वयस्क और मध्यम आयु वर्ग के पुरुष यौनेच्छा की आवृत्ति या संतुष्टि न मिलने समेत यौन रोग संबंधी अपनी चिंताओं को लेकर डौक्टर से परामर्श करते हैं.सर्वेक्षण में पाया गया इसकी वजह अस्वस्थ भोजन,मोटापा,तनाव ,न्यूनतम व्यायाम,नींद संबंधी बीमारियों के कारण ,ख़राब जीवनशैली की आदतें हैं,जो न केवल मेटाबोलिक सबंधी बीमारियों में वृद्धि का कारण बनती हैं,बल्कि कम और दीर्घकालिक यौन रोगों की उच्च घटनाओं का कारण भी हैं.शराब और धूम्रपान जैसे गतिविधियों में आनंद लेना भी सैक़्स लाइफ़ को प्रभावित करता है

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