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Violent Partner Signs: कोई भी रिश्ता बहुत सी परिस्थितियों से होकर निकलता है। उसमें सुख-दुख एक सिक्के के दो पहलू है जिसे समझना पड़ता है। वैसे भी रिश्तों की डोर बेहद नाजुक होती है अगर आपने उसे नहीं समझा तो एक समय ऐसा आता है जिसे आप सबसे ज्यादा प्यार करते हैं वही आपको गवारा नहीं होता है। लेकिन ऐसी समस्या पैदा ही क्यों होती है कि आपका रिश्ता ही हिंसक रूप लेले। आए दिन घटनाएं होती हैं, क्या हमारा मानसिक स्तर इतना डांवाडोल हो गया है कि हम स्वयं पर ही काबू नहीं कर पा रहे है? आईए जानिए रिश्ते क्यों हिंसक होते जा रहे हैं-

एक घटना जो रिश्तों में हुई हिंसा को दर्शा रही है

हाल ही में हुई एक घटना जिसका शोर हर तरफ खबरों में देखा जा रहा है। तब ही से लिव इन रिलेशनशिप या रिलेशनशिप का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। आखिर प्यार क्या है? क्या इसकी अंतिम मंजिल मौत है? हमारे जहन में एक ही सवाल उठता है क्या कोई रिश्ता इतना खूंखार भी हो सकता है। एक लड़की जो एक सोच के साथ अपना पार्टनर के साथ रह रही थी कि उसे प्यार, विश्वास और साथ मिलेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

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क्यों होते हैं पार्टनर हिंसक, जानें मनोवैज्ञानिक वजहें: Violent Partner Signs 4

रिश्ते क्यों आक्रामक होते जा रहे हैं?

ये रिश्ते क्यों इतने आक्रामक होते जा रहे हैं इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण हैं जिन्हें जानना हमारे लिए बहुत जरुरी है :

बढ़ावा न देकर नीचा दिखाना

जब आप आरंभ में किसी रिश्ते से जुड़ते हैं तब रिश्ते में जान होती है लेकिन कुछ समय बाद रिश्ता किसी बोझ की तरह लगने लगता है। पार्टनर आपस में एक दूसरे को सपोर्ट करना बंद कर देते है। पार्टनर जानबूझकर एकदूसरे को नीचा दिखाने लगते हैं। यहां तक कि आप कोई भी कार्य करते हैं तो वे आपकी किसी उपलब्धि से खुश नहीं होते है। ये मानसिक तनाव होता है जिसमें स्वयं कुछ नहीं कर पाने पर पार्टनर की उपलब्धि बर्दाश्त नहीं होती है। ये धीरे-धीरे कड़वाहट में बदलने लगती है। पार्टनर बात-बात पर एक दूसरे को नीचा दिखाते हैं।

जलन की भावना

कुछ पार्टनर ऐसे होते हैं जिन्हें आपकी उपलब्धि या आपकी पर्सनैलिटी को लेकर भी ईर्ष्या पैदा होने लगती है। दोनों में से एक पार्टनर की कहीं किसी जगह तारीफ हो जाए तो ये दूसरे को गंवारा नहीं होता है। वे खुश होने के बजाय उससे ईर्ष्या करने लगता है। वे कहीं साथ में जाना भी पसंद नहीं करते है। देखा जाए तो मनुष्य के मन में ऐसी भावना उत्पन्न होती है। लेकिन ये भावना जब ज्यादा स्तर पर पहुंच जाती है तो ये जानलेवा साबित होती है जिससे पार्टनर एक अंतिम चरण पर आकर हिंसक रूप धारण कर लेता है।

अधिकार की भावना

कुछ लोगों की प्रवृति होती है वे दूसरे पर पूरा अधिकार जमाना चाहते हैं। पार्टनर एक दूसरे को पूरी तरह कंट्रोल में रखना चाहते है। लेकिन अधिकार की भी एक सीमा होती है। पार्टनर चाहता है दोनों एक दूसरे से पूछे बिना कहीं नहीं जायें। यहां तक कि आपकी नविगेशन के जरिए पता लगाते रहते है कि आप कहां किस समय जा रहे हैं। किसी भी तरह की आजादी नहीं देना चाहते। यदि इन उम्मीदों पर खरा न उतरा जाए तो लड़ाई-झगड़े अधिक बढ़ने लगते हैं। जो अंत में आकर एक जुर्म का कारण बन जाती है।

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इमोशनली ब्लैकमेल

कई बार इमोशनल सपोर्ट के चक्कर में हम खुद को फंसा हुआ पाते हैं और चाहकर भी बाहर नहीं निकल पाते। इसी इमोशनली ब्लैकमेल के चक्कर में पार्टनर के बुरे बर्ताव को झेलते रहते हैं। जिसका नतीजा ये होता है कि जो आपके सामने है उसे भी हम समझ नहीं पाते या नजरअंदाज करते चले जाते हैं। इसलिए इमोशनली ब्लैकमेल भी एक समय बाद घातक साबित हो जाता है। इस बात को आपको शुरूआती चरण में पहचानना होगा ताकि आप अपने इमोशनल स्टेटस को बैलेंस कर पाएं।

असमंजस की स्थिति

महिलाओं में सबसे बड़ी दिक्कत होती है कि वे इतनी भावुक होती है कि उन्हें लगता है कि जो प्यार करता है अगर वो आपको प्रताड़ना भी कर देगा तो क्या हुआ। इस तरह व्यवहार को वो अपने जीवन का हिस्सा बनाकर जीती चली जाती हैं। अगर आदमी गुस्से में पीटता है तो बाद में पछतावा भी करता है, वह बुरा नहीं है। इसलिए कोशिश करती हैं कि रिश्ता बना रहे। लेकिन धीरे-धीेरे ये प्रताड़ना एक वारदात बन जाती है।

नजरिये में बदलाव होना

आजकल कोई भी अपने आप को किसी से कम नहीं समझता है। ऐसी स्थिति में हम स्वयं को साबित करने पर उतारू हो जाते हैं। बहस इस कदर बढ़ जाती है कि हम एक दूसरे को मानसिक चोट देना शुरू कर देते हैं। जबकि हमें सोचना चाहिए कि दोनों अलग-अलग परिवेश में पले-बढ़े हैं, परवरिश अलग है। दोनों की सोच में फर्क होना लाजमी है। लेकिन इसे समझने के बजाए बहस के लिए कमर कस लेते हैं जिससे रिश्ते में गांठ पड़ती जाती है। साथ ही मन ही मन एक दूसरे के प्रति नकारात्मक सोच को भर लेते हैं।

(साइकोलोजिस्ट डॉक्टर बिन्दु कपूर से बातचीत पर आधारित)

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