Couple Silent Treatment: किसी भी रिलेशनसिप को हेल्दी और हैप्पी बनाए रखने के लिए कम्यूनिकेशन बेहद जरूरी होता है। खासकर पार्टनर्स के बीच बातें और भावनाओं को एक-दूसरे से शेयर करना बहुत जरूरी होता है। हालांकि कई बार खामोशी रिश्ते को मजबूत बनाने में सहायक भूमिका निभाती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा चुप्पी आपके रिश्ते को कमजोर भी बना सकती है। कपल्स के बीच होने वाले झगड़े या गलतफहमियों की वजह से समस्याएं बढ़ने लगती हैं। जिसे सुलझाने के लिए कपल्स बहस करने की बजाये चुप रहना पसंद करते हैं। कई मुद्दों पर ये साइलेंट ट्रीटमेंट काम करता है लेकिन कई बार ये सामने वाले की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। आखिर साइलेंट ट्रीटमेंट की क्या वजह है और इससे कैसे निपटा जा सकता है चलिए जानते हैं इसके बारे में।
Also read: रिश्तेदारों के बीच दूरियां बढ़ाता है मोबाइल, ऐसे बनाएं रिश्ता खूबसूरत: Mobile Effect on Relationship
क्या है साइलेंट ट्रीटमेंट की वजह

बहस से बचना
आजकल युवाओं के पास किसी भी रिश्ते को निभाने का समय नहीं है। ऑफिस या घर की जिम्मेदारियों के चलते युवा अपने जीवन में किसी प्रकार का कलेश नहीं चाहते। यही वजह है कि युवा कपल लड़ाई या बहस को न बढ़ाते हुए साइलेंट ट्रीटमेंट का सहारा ले रहे हैं। ये पार्टनर से पूर्ण अलगाव की स्थिति है।
इशू न बनाना
अक्सर लड़ाई या झगड़ों के दौरान हम अपने पार्टनर को ऐसी बातें बोल जाते हैं जिससे लड़ाई का मुद्दा और अधिक गंभीर हो जाता है। समस्या का इशू न बनाते हुए चुप रहना भी कई बार समझदारी होती है। इसी के चलते कपल्स साइलेंट ट्रीटमेंट का सहारा ले लेते हैं।
स्पेस देना
रिश्ते को मजबूत बनाए रखने के लिए पार्टनर्स को एक-दूसरे को स्पेस देनी चाहिए। एक-दूसरे को स्पेस देने से कई बार बहस की संभावना खत्म हो जाती है लेकिन समय के साथ इशू को सुलझाया न जाए तो पार्टनर्स को भावनात्मक ठेस भी पहुंच सकती है।
साइलेंट ट्रीटमेंट से कैसे उभरें

पार्टनर को समझें
यदि लड़ाई या झगड़े के बाद पार्टनर शांत है तो अपना इशू साइड में रखकर उससे बात करें। पार्टनर ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है इसे जानने का प्रयास करें। समस्या को यदि बढ़ने से पहले सुलझा लिया जाए तो रिश्तों में मधुरता बनी रहती है।
Also read: शादी के बाद पहली फैमिली ट्रिप पर कभी ना करें ये 5 गलतियां: First Family Trip after Marriage
अपनी गलती मानें
कपल्स के बीच गलतफहमियां या बहस होना सामान्य बात है, लेकिन अपनी गलती को न मानते हुए पार्टनर को गलत ठहराना रिश्ते को कमजोर बना सकता है। यदि आपकी किसी बात से आपके पार्टनर का दिल दुखा है तो उससे दूरी न बनाते हुए अपनी गलती को अपनाएं। पार्टनर के साइलेंट ट्रीटमेंट को न बढ़ाते हुए माफी मांग लें।
फीलिंग करें शेयर
यदि आपकी अपने पार्टनर से लड़ाई हुई है तो साइलेंट ट्रीटमेंट न अपनाएं। इससे सामने वाला व्यक्ति हर्ट हो सकता है। किसी भी मुद्दे को खत्म करने के लिए अपनी फीलिंग्स को शेयर करें। फीलिंग शेयर करने से आप पार्टनर के सामने अपनी बात रख पाएंगे। साथ ही इससे रिश्ते में ट्रान्सपेरेंसी भी आती है।
रिश्ते को दें अहमियत
हर रिश्ता खास होता है। यदि आप छोटी-छोटी बातों का मुद्दा बनाएंगे तो यकीनन आपके रिश्ते में दरार आ सकती है। मनमुटाव या झगड़े के बाद पार्टनर से बात करें। अपने रिश्ते को अहमियत दें ताकि छोटी-छोटी बातों को समय रहते निपटाया जा सके। कपल्स के बीच चुप्पी रिश्ते को कमजोर बना सकती है।
