कुछ लोगों को मैच्योर और प्यारी ननदें मिलती हैं लेकिन कई लोगों की शिकायत रहती है कि उनकी ननद उनकी और उनके पार्टनर की लाइफ में बहुत ज्यादा बीच- बचाव करती है। अगर आपकी जिंदगी में भी ऐसी ही ननद है तो आपको उनसे डील करने के तरीकों पर अमल लाने की जरूरत है। 

फिल्टर और प्राइवेसी

आप की ननद बहुत प्यारी हैं और आपका बहुत ध्यान भी रखती हैं लेकिन आपको यह याद रखने की जरूरत है कि जो भी बात आपके और आपके पार्टनर के बीच होती है, उस हर बात तो शेयर करना जरूरी नहीं है। आपको खुद यह तय करने की जरूरत है कि आपको क्या शेयर करना है और क्या नहीं। आप अपनी हर समस्या को लेकर अपनी ननद के पास नहीं जा सकती और ना ही उनसे डिस्कस कर सकती हैं। आपके इस तरह के व्यवहार से ही आप की ननद को आप दोनों के बीच में पड़ने की आदत बनती है। 

भाई बहन का प्यार

हर रिश्ते का अपना अलग जुड़ाव होता है और अपनी अलग सीमा होती है। फिर वह मां और बेटे के बीच में हो, बेटे और पिता के बीच में हो या मां और बेटी का या फिर भाई और बहन का! भाई और बहन एक- दूसरे को तब से जानते हैं जब आप उनकी जिंदगी में नहीं थी। आपके लिए जरूरी है कि आप इस बॉन्ड को समझें और उसका सम्मान करें। अगर आपकी ननद किसी खास तरीके से व्यवहार कर रही हैं, तो आपके लिए जरूरी है कि आप उस समस्या की जड़ तक पहुंचे और उसके बाद ही उसके बारे में सोचें। 

पार्टनर की जरूरत

कई बार ऐसा होता है कि आपकी और आपकी ननद के बीच बातचीत इतनी बढ़ जाती है कि आप उस स्थिति को संभाल नहीं पाती हैं। ऐसे में आपको समझ में नहीं आता कि आप किस की मदद लें। इस समय मदद लेने के लिए आपके पार्टनर से बढ़िया कोई और व्यक्ति नहीं हो सकता। चूंकि वे दोनों एक-दूसरे को बचपन से जानते हैं तो आप की ननद को शांत करने और उन्हें समझाने में आपके पार्टनर की बड़ी भूमिका हो सकती है। 

बातचीत से बढ़िया और कुछ नहीं

किसी भी बात के बारे में सोच- सोच कर परेशान होने और अपनी थ्योरी बनाने से बेहतर है कि उसके बारे में बात करें। अगर आप की ननद कभी भी अपनी सीमा पार करती है तो जरूरी है कि आप उनको सीधे तौर पर समझा दें कि उनकी कौन सी बात आपको परेशान कर रही है। कई बार ऐसा होता है कि सामने वाला व्यक्ति एक्शन को समझ ही नहीं पाता है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि आप अपनी बात पर अड़े रहें और उनसे बात करें। इसका मतलब यह भी नहीं है कि आपको कड़ाई से बात करने की जरूरत है, बस आपको अपनी बात सीधे तौर पर उनके सामने रख देनी है। 

आपके रिश्ते की सीमा आपके साथ

जो ससुराल वाले टॉक्सिक होते हैं, वे अपनी सीमा अमूमन भूल जाते हैं। अगर आप समय रहते इस चीज को हैंडल नहीं करते हैं तो यह बढ़ता ही जाएगा। आंख मूंद लेने और चुपचाप सुनने से कोई हल नहीं निकलता है।  अपनी सीमा आपको खुद तय करनी है और अपनी ननद को यह बताना है कि वह जो भी बोल रही है या कर रही हैं आप को वह पसंद नहीं है। आपको भले ही शांत रहना है लेकिन यह भी सुनिश्चित करना है कि आपकी आवाज सामने वाले तक सही तरीके से पहुंच जाएं।  

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