क्या वाकई तलाक एक खुशी का मौका है
Divorce Importance

Importance of Divorce: तलाक पर अक्सर कई तरह की बहस हम सुनते रहते हैं लेकिन धीरे-धीरे लोगों का नजरिया बदल रहा है और अब तो तलाक लेने पर फोटो शूट करवाने जैसी घटना हमारे आसपास होने लगी है। यदि इस तरह की घटनाएं भविष्य में और होने लगीं को निश्चित तौर पर इससे तलाक लेने जा रहे वे जोड़े प्रभावित होंगे जिनके रिश्ते में अभी भी थोड़ी गुंजाइश बची है।

पति-पत्नी के संबंधों को लेकर दुनियाभर में कई तरह की धारणायें प्रचलित हैं, अमूमन कहा भी जाता है कि जोड़ियां स्वर्ग से बनकर आती हैं। ये भी कहा जाता है शादी का लड्डू जो खाए वो पछताए, जो ना खाए वो भी पछताए, इन सारी बातों का एक ही आधार समझ आता है कि प्राय: पति और पत्नी का रिश्ता कई सारी जटिलताओं और चुनौतियों के बाद भी लंबे समय तक बना रहता है। वे दोनों मिलकर एक परिवार का निर्माण करते हैं जो किसी राज्य और देश की संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाता है, साथ ही साथ वे वहां की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को भी मजबूती प्रदान करते हैं।
यदि बाकी रिश्तों की बात की जाए तो उनमें ऐसी स्थिरता कम ही देखने को मिलती है इसलिए जब भी कोई शादी टूटती है तो उसकी कसक सालों तक बनी रहती है। रिश्ता टूटने से आप भावनात्मक स्तर पर कमजोर महसूस करते हैं। स्त्रियां तो आर्थिक स्तर पर भी कमजोर हो जाती हैं। यहां तक कि देश का सर्वोच्च न्यायालय भी यही मानता है कि तलाक जैसी घटनाओं से समाज में अकेलापन और अवसाद बढ़ने लगता है, साथ ही इससे उस देश की संस्कृति और परंपरा भी प्रभावित होती है। 
जिस तेजी के साथ लंबी शादी होने के बावजूद तलाक हो रहे हैं, उस स्थिति में इस बात पर विचार करने की आवश्यकता है कि शादी के क्या-क्या फायदे हो सकते हैं और तलाक किन परिस्थितियों में जरूरी हो जाता है। सबसे अहम बात कि क्या हमें शादी की तरह, तलाक को भी सेलिब्रेट करने की जरूरत है! आइए समझते हैं-

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विवाह अपने आप में एक उपलब्धि है, यह आप पर आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारी तो डालता है लेकिन कहीं न कहीं आपका बौद्धिक विकास भी करता है। विवाह के बाद आप केवल अपने बारे में नहीं सोचते बल्कि अपने साथी के विषय में भी विचार करते हैं। विवाह के बाद आप में सहनशीलता, स्वीकार्यता और समर्पण की भावना जागृत होने लगती है लेकिन जब यही संबंध आपके विकास में रुकावट पैदा करता है या इसके जरिये आप किसी भी प्रकार की प्रताड़ना झेलते हैं तो इस स्थिति में केवल तलाक ही एक विकल्प रह जाता है! खासतौर पर यह घरेलू हिंसा के मामलों में अनिवार्य हो जाता है। तलाक के बाद उन महिलाओं को एक तरह से नया जीवन मिल जाता है जो सालों से ससुराल पक्ष और पति का अत्याचार झेल रही होती हैं। इस पर सर्वोच्च न्यायालय मानता है कि यदि शादी टूट के कगार पर पहुंच चुकी हो और उसमें सुधार की गुंजाइश न हो यानी मामला इरिट्रीवबल ब्रेक डाउन ऑफ मैरिज का हो तो इस आधार पर तलाक हो सकता है।
अर्थशास्त्र और नीतिशास्त्र के लेखक कौटिल्य (चाणक्य) ने विवाह पर बहुत कुछ कहा और लिखा है, उन्होंने पति और पत्नी के अलगाव पर भी यह बात कही है कि यदि पति और पत्नी में किसी भी प्रकार का मतभेद है या पति-पत्नी में से किसी एक ने दूसरे के साथ छल किया है अथवा वे एक-दूसरे से घृणा करते हैं तो ऐसी स्थिति में उनके बीच संबंध विच्छेद को मान्यता दे देनी चाहिए। इस तर्क को हमारा संविधान भी मानता है कि एक खराब शादी को रखने से बेहतर है कि उसे तोड़ दिया जाए।

यूं तो शादी के कई फायदे हैं लेकिन एक सबसे बड़ा फायदा दुनिया के प्रसिद दार्शनिक सुकरात बता गए हैं। घटना कुछ इस प्रकार है- सुकरात के कई शिष्य थे। उनमें से एक शिष्य इस पसोपेश में था कि उसे शादी करनी चाहिए या नहीं। उसने इस विषय पर सभी से पूछा और सभी ने उसे अलग-अलग दलीलें दीं लेकिन वो किसी की भी बात पर संतुष्ट नहीं हुआ और अंत में अपने गुरु सुकरात के पास जा पहुंचा। उसने सुकरात से पूछा, ‘गुरु जी क्या मुझे विवाह कर लेना चाहिए? हालांकि, कई समझदार और ज्ञानी लोगों ने मुझे विवाह न करने की सलाह दी है और कुछेक ने विवाह के बड़े फायदे बताएं हैं लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि आप इस पर सबसे स्पष्ट राय देंगे। चूंकि, आपका वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा नहीं और आपकी पत्नी बहुत झगड़ालू है इसलिए आप मुझे सही दिशा निर्देशन दे पाएंगे। इस बात पर सुकरात धीरे से मुस्कुराये और बोले, ‘मेरा ख्याल है कि तुम्हें विवाह कर लेना चाहिए। यह सुनते ही शिष्य बोला, ‘आपकी पत्नी इतनी दुष्ट और झगड़ालू है तब भी आप यह सलाह दे रहे हैं। इस पर सुकरात बोले, ‘यदि तुम्हें अच्छी पत्नी मिल गई तो तुम्हारा जीवन संवर जाएगा क्योंकि वह तुम्हारे जीवन में खुशियां लाएगी और उन खुशियों की बदौलत तुम सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचोगे। और यदि तुम्हे मेरी पत्नी जेंथिप की तरह दुष्ट स्त्री मिली तो तुम्हारा जीवन संघर्षों भरा हो जाएगा, जिससे तुम मेरी तरह दार्शनिक बन जाओगे। यानी कुल मिलाकर शादी किसी भी तरह से घाटे का सौदा नहीं है।
वहीं चाणक्य ने विवाह के संबंध में यह कहा है कि पति-पत्नी का रिश्ता एक रथ के दो पहियों की तरह होता है। परिवार के निर्माण में दोनों की ही अहम भूमिका होती है। सुखी वैवाहिक जीवन मनुष्य के लिए स्वर्ग समान माना जाता है। आचार्य चाणक्य के अनुसार जानिए वैवाहिक जीवन में सफलता पाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
शादी हमेशा से ही एक सामाजिक और राजनैतिक जरूरत रही है। दो लोगों के बीच शादी होने से दो परिवारों के बीच संबंध बनता है। इस प्रकार दोनों परिवार एक-दूसरे की हितैषी बनते हैं। आप एक-दूसरे के संबंधों से लाभ उठाते हैं, आप एक-दूसरे के लिए भावनात्मक संबल बनते हैं और जब लड़का-लड़की दोनों ही आर्थिक रूप से मजबूत हों तो वे मिलकर एक खुशहाल जीवन बिताते हैं, जिससे देश की आर्थिक स्थिति में इजाफा होता है।

Importance of Divorce
Supreme Court kee raay

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने तलाक लेने जा रहे शादीशुदा जोड़ों को मेडिटेशन की सलाह दी है। यह वक्तव्य कोर्ट ने एक ‘स्पेशल केस के दौरान दिया। सुप्रीम कोर्ट का यह भी मानना है कि तलाक के ज्यादातर मामले प्रेम विवाह के हैं। दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक तलाक मामले में ऐसा कुछ कहा जो सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन गया। सुप्रीम कोर्ट ने तलाक मांग रहे एक बेंगलुरु निवासी जोड़े को ऐसा न करने की सलाह दी है। जिसमें कहा गया है कि उन्हें अपनी शादी दूसरा मौका देना चाहिए। दोनों ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और दोनों के ऑफिस जाने का समय बिलकुल अलग है, ऐसे में दोनों को आपस में मिलने का समय ही नहीं मिलता है। जस्टिस के.एम. जोसेफ और बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने कहा, ‘शादी का समय कहां है। आप दोनों बेंगलुरु में तैनात सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। एक दिन में ड्यूटी पर जाता है और दूसरा रात में। आपको तलाक का कोई अफसोस नहीं है। लेकिन शादी के लिए पछता रहे हैं। आप शादी के रिश्ते को दूसरा मौका क्यों नहीं देते?

हाल ही में एक तमिल अभिनेत्री शालिनी ने अपने डिवोर्स का फोटोशूट करवाया। एक तस्वीर में अपनी शादी की तस्वीर को फाड़ती हुई दिखाई दे रही हैं तो अगली तस्वीर में उनके हाथ में डिवोर्स का बैनर है। वहीं एक तस्वीर में वह हाथ में शैम्पेन लेकर तलाक का सेलिब्रेशन मना रही हैं। अभिनेत्री की इस हरकत पर कई लोगों ने उन्हें ट्रोल किया लेकिन कई बार तलाक उन लोगों के सेलिब्रेशन हो जाता जो लंबे समय से खराब शादी को झेल रहे हैं। हालांकि, इस बात की अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है कि अभिनेत्री की अपने पति से किस बात को लेकर तलाक हुआ है लेकिन इतना स्पष्ट है कि वे अपने इस निर्णय से काफी खुश हैं।
यह सच है कि किसी भी रिश्ते का टूटना कभी भी बहुत अच्छा नहीं माना जाता है और इस तरह की घटनाओं से जिन लोगों के रिश्ते में सुधार की गुंजाइश बची होती है वे इससे काफी हताश हो जाते हैं। कुल मिलाकर यदि देश का सर्वोच्च न्यायालय भी जब तलाक और शादी पर इतनी बड़ी बात कहे तो इस पर हमें गंभीरता से सोचने की जरूरत है क्योंकि तलाक हमेशा फैशन या सेलिब्रेशन नहीं समझना चाहिए है। यह इन लोगों के लिए अनिवार्य हो जाता है जो एक खराब शादी को झेल रहे हैं।
यह सच है कि किसी भी रिश्ते का टूटना कभी भी बहुत अच्छा नहीं माना जाता है और इस तरह की घटनाओं से जिन लोगों के रिश्ते में सुधार की गुंजाइश बची होती है वे इससे काफी हताश हो जाते हैं।

वर्तमान में गृहलक्ष्मी पत्रिका में कार्यकारी संपादक (एग्जीक्यूटिव एडिटर) पत्रकारिता में 19 वर्ष का अनुभव, वर्तमान समय में गृहलक्ष्मी पत्रिका में कार्यकारी संपादक (एग्जीक्यूटिव एडिटर), राष्ट्रीय सहारा, देशबंधु, पाखी, शुक्रवार, बिंदिया,...