‘मॉम, यहां सबकुछ अच्छा है लेकिन सिर्फ खाने की परेशानी है। सब लोग वेजिटेरियन हैं और मैं नॉन वेजिटेरियन। मुझे नॉन वेज खाने से मना नहीं किया जाता है। लेकिन फिर भी अच्छा नहीं लगता कि अकेले-अकेले खा लूं। ऐसे ही चलते-चलते अब दो महीने हो गए हैं नॉनवेज खाए हुए।’ 6 महीने पहले शादी करने वाली मेघना ससुराल में बहुत खुश हैं लेकिन सिर्फ एक परेशानी है कि खाना मन का नहीं मिल पा रहा है। खाना मन का ना मिलने की वजह ईटिंग हेबिट में अंतर है। नया परिवार अच्छा है लेकिन खाने की आदतें तो हर परिवार की अलग-अलग होती ही हैं। फिर इनमें घुल मिल जाने कि अपेक्षा अक्सर ही नई नवेली दुल्हन से की जाती है। लड़कियां ये कोशिश भी करती हैं लेकिन कभी तो मन फिर से अपने अंदाज में खाने को करता ही है न। अब ऐसी स्थिति में कैसे एडजस्ट करना है कि फूड हेबिट भी बनी रहें और ससुराल में किसी को कोई दिक्कत भी ना हो। इसके लिए कुछ ट्रिक्स और टिप्स आजमाने होंगे, जिनके बाद खाने के तरीके में अंतर होने का भी जिंदगी पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा-

उनको नहीं है दिक्कत

अगर आप क्या खाती हैं और क्या नहीं, इस बात से आपके ससुराल में किसी को कोई दिक्कत नहीं है तो इस बात का शुक्र मनाइए क्योंकि खासतौर पर भारत में लड़कियों से सिर्फ एडजस्ट करने की ही अपेक्षा की जाती है। ऐसे में अगर कोई परिवार उसे अपने मन की करने को कह रहा है तो जरूर उसने समय के साथ खुद को बदला है। ऐसे परिवार को आपके जैसे खानपान को न पसंद करने के लिए बुरा कहना बिलकुल गलत होगा। ऐसे परिवार की खुशी का ख्याल रखिए निश्चित ही वो भी आपकी खुशी को खोने नहीं देंगे। बल्कि एक समय के बाद वो आपकी आदतों को भी देखेंगे। 

जितना लेनाउतना देना

याद रखिए आप जितना देंगी, उतना ही मिलेगा। आप एडजस्ट करने की जितनी कोशिश करेंगी ससुराल वाले भी आपकी उतनी ही मदद करेंगे। इसलिए ‘मैं तो अपने मन का ही खाऊंगी’ वाला एटीट्यूड आपको छोड़ना होगा। यकीन मानिए जब परिवार वाले आपको खुद से पहले उनके बारे में सोचता देखेंगे तो वो जरूर आपके बारे में सोचने की कोशिश तो करेंगे ही। वो ध्यान देंगे कि कैसे आप अपनी आदतें छोड़ कर उनकी आदतों को अपनाने की कोशिश कर रही हैं। ठीक ऐसा सुधा के साथ भी हुआ था। उन्हें जंक फूड खाने का शौक था। लेकिन ससुराल में बाहर का खाना आना ही मना था। ऐसे में शादी के बाद जब ससुराल में सबको पता चला कि वो जंक फूड की शौकीन है तो सबने उन्हें हर शनिवार कुछ भी मन का मंगवा लेने को कहा। अब सुधा को लगता है कि छह महीने सिर्फ परिवार की ईटिंग हैबिट अपना लेने का फायदा उन्हें मिला है। क्योंकि पहले की तरह तकरीबन रोज जंक फूड नहीं खाती हैं इसलिए सेहत भी ठीक रहती है। 

 

बात कहें दिल की– 

देखिए, दिल की बात कह देने का हमेशा फायदा ही होता है। अगर आप बिलकुल सही हैं तो मानिए कि फायदा होना तय है। अपने खाने की आदतों को लेकर पहले अपने पति से बात करें। उन्हें बताएं कि आप बिलकुल अलग तरह से अब खाती पीती थीं। ऐसे में आपके हिसाब से खुद को बदलने की बहुत कोशिश के बाद कभी तो पहले की तरह खानपान का मन करता ही है। इसलिए कभी-कभी आप खुद की पसंद का खाना ही चाहती हैं। ये काम इतना कठिन नहीं है। जैसे हो सकता है कि हफ्ते में एक बार आपके मन का खाना बन जाए। इस तरह से पूरे परिवार को भी खाने में कुछ नया खाने को मिल जाएगा। 

बराबरी की बात

अपने पार्टनर से आप बराबरी के मुद्दे पर भी बात कर सकती हैं। क्यों न ऐसा सिस्टम मेनटेन किया जाए कि किसी एक के मन की बात ही न हो। बल्कि खाना ऐसे बने कि दोनों के मन की बात पूरी हो सके। इसके लिए आप दोनों को सहमत होना पड़ेगा। कोशिश ये करें कि कुछ ऐसा बने, जो दोनों के हिसाब से सही हो। लेकिन ऐसा रोज नहीं हो सकता है। इसलिए शादी से पहले ही आप दोनों की इच्छाओं पर बराबरी की बात कर लें। जैसे अगर आप उनकी ईटिंग हैबिट को अहमियत दे रही हैं तो उनको भी ऐसा ही करना होगा। एक दिन आपके मन का होगा तो एक दिन उनके मन का। इसमें कोई बहस या किसी को कोई दिक्कत बिलकुल नहीं होनी चाहिए। ये बात अगर पहले से तय होगी तो निश्चित ही सबके लिए अच्छा होगा। फिर ना आपको ज्यादा एडजस्ट करना होगा और ना ही उनको। 

अच्छी आदतों को अपना लें

ये जरूरी नहीं कि आपकी ईटिंग हैबिट अच्छी ही हों। उनमें कुछ खामियां भी हो सकती हैं। जैसे बाहर का खाना अगर आपको पसंद है तो ये बहुत अच्छी बात तो है नहीं। ठीक ऐसा ही आपके पति के साथ भी हो सकता है। जरूरी नहीं कि उनकी आदतें अच्छी ही हों। इसलिए आप दोनों इस बात पर भी सहमत हो सकते हैं कि ज्यादातर वो खाना बने, जो हेल्थी हो। ना कि किसी एक की पसंद का। इस तरह से कम से कम खाने पर झगड़े होने की संभावना मानिए कम ही हो जाएगी। इसके लिए अपने पार्टनर को प्रोत्साहित करने का एक तरीका ये है कि आप दोनों साथ बाजार से खाने का सामान लेने जाएं। इस तरह से आप किसी एक खाने की चीज को खरीदते समय ही एक दूसरे की बात से सहमत हो जाएंगे। 

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