आरोप है कि मोदी राज में अल्पसंख्यक  सुरक्षित नहीं हैं?

यह सरासर भ्रामक प्रचार है। असल में यह समुदाय आजादी के बाद से ही अलग-थलग महसूस कर रहा है जिसकी वजह कांग्रेस सरकारों की नीतियां हैं। मुस्लिम अलग-थलग इसलिए भी हैं क्योंकि वे आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए हैं।

अमेरिका की एक रिपोर्ट में कहा गया कि साल 2014 के आम चुनावों के बाद से भारत में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ा है?

विदेश में बैठे लोग वास्तविकता से काफी दूर होते हैं। कहीं और बैठकर रिपोर्ट तैयार की जाती है। वह यह नहीं समझते कि भारतीय समाज का तानाबाना कितना संवेदनशील है। गांवों में हिंदू और मुस्लिम सदियों से एकसाथ रहते आए हैं और रह रहे हैं। जो लोग देश में मतभेद पैदा करना चाहते हैं, उनमें समझ नहीं है।

देश में हाल ही में गोमांस को लेकर काफी बवाल हुआ। आप क्या सोचती हैं?

जिंदगी में मेरा एक सिद्धांत है कि किसी की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहिए। आपने अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं के बारे में बात की। क्या हमें बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं के बारे में नहीं सोचना चाहिए। ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जिनकी गाय के लिए खास भावनाएं हैं।

बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओंका भी सम्मान होना चाहिए। खाने में क्या है? कुछ भी खा सकते हैं। अगर कुछ खाने से आपको रोका जाता है तो आपको आहत क्यों महसूस करना चाहिए? दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूर्व सरकार ने हमेशा अल्पसंख्यकों की भावनाओं की बात की। हमें सभी की भावनाओं की बात करनी चाहिए।

मुस्लिम समाज का एक तबका आरक्षण की मांग करता है। आपकी क्या राय है?

मुल्क में सबसे पिछड़े तबके एससी-एसटी को सबल बनाने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई और आरक्षण भी एक हद तक ही हो सकता है। मेरा जोर अल्पसंख्यकों में प्रतिभा के दम पर रोजगार हासिल करने की ताकत पैदा करने पर है। इसलिए मैं इस वर्ग की शिक्षा, रोजगार और माली हालत सुधारने पर ध्यान दे रही हूं। मैं आरक्षण या किसी अन्य पचड़े में नहीं पडऩा चाहती। इससे
मंत्रालय लक्ष्य से भटक जाएगा।

 

पिछले एक साल में घर वापसी जैसे अभियान चले। मुसलमानों से वोट का अधिकार छीनने की बात हुई। चर्च पर हमले हुए। क्या इससे अल्पसंख्यक असुरक्षित नहीं महसूस कर रहे?

पहले और अब में अंतर है। पहले बयानबाजी नहीं, सीधे सांप्रदायिक दंगे होते थे। ऐसे बयानों से अल्पसंख्यक डरता है, पहले तो दंगों में मर जाता था। मैं आपसे पूछना चाहती हूं कि मीडिया ऐसे बयानों को तूल क्यों देता है जबकि पीएम कई बार कह चुके हैं कि उनकी सरकार संविधान के मुताबिक चलेगी।

आपने जब से अल्पसंख्यक मंत्रालय का कार्यभार संभाला है, क्या विशेष किया है?

हमने जनता से 6 वादे किए थे और मुझे खुशी है कि अपने कार्यकाल में उन सभी वादों को पूरा किया, कई योजनाओं पर काम किया सबकी बेहतरी और सबके विकास के लिए। नौकरियों और शिक्षा में मुस्लिमों को आरक्षण देने से समस्या हल नहीं हो सकती। जब तक कौशल विकास व प्रशिक्षण पर जोर नहीं दिया जाएगा, अल्पसंख्यक आत्मनिर्भर नहीं हो पाएंगे।

 

 पिछली यूपीए सरकार की तुलना में ऐसी कौन सी योजनाएं हैं जो अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए ज्यादा प्रभावी हैं?

पहले की योजनाओं में थोड़ा बदलाव किया गया है। जैसे- छात्रों की छात्रवृत्ति नकद हस्तांतरण  योजना के तहत सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जा रही है। एनडीए सरकार का स्किल डेवलपमेंट पर विशेष जोर है। लिहाजा, विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली संस्थाओं से करार किया है ताकि रोजगार हेतु युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए। इसके अलावा उस्ताद योजना के तहत पुश्तैनी हुनर को संरक्षित कर आगे बढ़ाया जा रहा है। 

 

मानस अच्छी योजना है, लेकिन फिलहाल हर जगह नहीं। क्यों?

हम और हमारी सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की अंत्योदय नीति को मानते हैं। जब तक हर आदमी का, हर तबके का भला नहीं होगा, देश का समग्र विकास नहीं होगा। प्रधानमंत्री मोदी जी ने इसी मंत्र को अंगीकार किया है। यूपीए सरकार ने कोई ठोस काम नहीं किया। ‘मानस अच्छी और बड़ी योजना है, जिसे हम बड़े शहरों से लेकर गांवों तक जाएंगे। जब घर में खाना बनता है, तो भी समय लगता है। आटा गूंथना, रोटी बेलना, सेंकना पड़ता है, तब जाकर रोटी पकती है। हम और हमारी सरकार ने बेहतर शुरुआत की है। आने वाले वक्त में सकारात्मक परिणाम लोगों के सामने होंगे।

अल्पसंख्यक छात्रों के स्कॉलरशिप पर केंद्र-राज्य में तनातनी रहती है। इससे
मुक्ति के लिए क्या कर रही हैं?

स्कॉलरशिप में 25 फीसदी पैसा राज्यों को भी देना होता था, इसलिए वे रुचि नहीं लेते थे। अब नकद हस्तांतरण योजना के तहत बैंक खाते में स्कॉलरशिप देने से छात्रों को जल्दी पैसा मिल जाता है। इसके कारण धांधली की गुंजाइश न के बराबर रह गई है। 

मदरसों को हाईटेक बनाने के बारे में सुना गया था, क्या चल रहा है?

प्रधानमंत्री चाहते हैं कि मुस्लिम बच्चों के एक हाथ में कुरान हो तो दूसरे में कंप्यूटर। इसके लिए हम नई मंजिल योजना ला रहे हैं। इसमें मदरसों के बच्चों को इस काबिल बनाया जाएगा कि वे आत्मनिर्भर बन सकें।