fifty shades of grey novel in Hindi
fifty shades of grey novel in Hindi

fifty shades of grey novel in Hindi: क्रिस्टियन बालों में हाथ फिराते हुए अपनी स्टडी में यहां से वहां तक चक्कर काट रहा है। बालों में दोनों हाथ-यानी परेशानी ज्यादा है। ऐसा लगता है कि हमेशा बना रहने वाला नियंत्रण हाथों से फिसल सा गया है।

“मुझे तो समझ नहीं आता कि तुमने पहले क्यों नहीं बताया?” उसने मुझे घेरा।

“ये बात कभी उठी ही नहीं। मेरी आदत नहीं है कि हर किसी को अपने बारे में ऐसी बातें बताती फिरूं। मैं कहना चाहती हूं कि हम तो अभी एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते तक नहीं हैं।” मैं अपने हाथों को घूर रही हूं। मैं शर्मिंदगी क्यों महसूस कर रही हूं? उसे इतना गुस्सा क्यों आ रहा है? मैंने उसे ताका।

“वैसे! तुम मेरे बारे में बहुत कुछ जान गई हो। मैं जानता था कि तुम अनाड़ी हो पर ये नहीं पता था कि एक कुंआरी हो! “उसने ये शब्द ऐसेे हवा में उछाला मानो सचमुच कोई गंदा शब्द हो।

“….एना! मैंने तुम्हें अभी क्या-क्या दिखाया…।” वह कराहा।

“…भगवान मुझे माफ करे। क्या मेरे सिवा कभी किसी ने तुम्हें चूमा है?”

“बेशक, क्यों नहीं।” मैंने मोर्चा संभालने की पूरी कोशिश की। अच्छा…भले ही ऐसा सिर्फ दो बार हुआ है

“और किसी भले जवां मर्द का दिल तुम पर नहीं आया? मैं समझ नहीं पा रहा। तुम इक्कीस साल की हो और बाईस की होने वाली हो। तुम सुंदर भी हो।” उसने फिर से बालों में हाथ फेरे।

सुंदर! मैं खुशी से फूल उठी। क्रिस्टियन ग्रे को लगता है कि मैं सुंदर हूं। मैंने गुंथी अंगुलियों पर नजरें गड़ाते हुए अपनी मुस्कान दबाने की पूरी कोशिश की। शायद इसे दूर तक की गहरी समझ है! मेरे भीतर बैठी लड़की ने भी नींद से जाग कर हामी भरी। हुंह!! ये तब कहां थी, जब मुझे इसकी जरूरत थी?

“और तुम बिना किसी अनुभव के, मेरे साथ बैठकर तय कर रही हो कि मैं क्या करना चाहता हूं?” उसकी भौंहें सिकुड़ गईं।

“प्लीज, बताओ एना! तुम अब तक अपने-आप को सेक्स से परे कैसे रख सकी?”

मैंने कंधे झटके।

“सही कहूं तो कोई मिला ही नहीं.. “बस तुम ही दिखे एक जवां मर्द…और तुम कैसे राक्षस निकले।

“तुम मुझसे इतना नाराज क्यों हो?” मैं हौले से बोली।

“मैं तुमसे नहीं, अपने-आप से नाराज हूं। मैं दंग हूं… “उसने आह भरी। फिर उसने बड़े प्यार से पूछा- “तुम जाना चाहती हो?”

नहीं, जब तक तुम न चाहो।” मैं बुदबुदाई। अरे नहीं…मैं नहीं जाना चाहती।

“बेशक नहीं! “मुझे तुम्हारा यहां रहना अच्छा लगेगा। उसने अपनी घड़ी पर नजर मारी।” रात बहुत हो गई।”

फिर मेरी तरफ मुड़कर अपनी भारी आवाज में बोला- “तुम फिर से अपना होंठ काट रही हो।” सॉरी” “माफी क्यों मांग रही हो? मैं तो बस यही कहना चाह रहा था कि मैं इस होंठ को काटना चाहता हूं।”

मैंने आह भरी…वह ऐसी बातें करेगा और मुझ पर कोई असर नहीं होगा, ऐसा कैसे हो सकता है?

“आओ।” वह हौले से बोला

“क्या ?”

हम अभी इन हालात को सुलझाने जा रहे हैं।

“क्या मतलब? कैसे हालात?

“एना! तुम्हारी उलझन और हालात। मैं आज तुम्हारे साथ रात बिताना चाहता हूं।”

ओह! पांवों तले से जमीन ही खिसक गई। मैं एक हालात हूं । मैंने अपनी सांस रोक रखी है।

“अगर तुम ऐसा करना चाहो तो! मेरी ओर से कोई जबरदस्ती नहीं है।

“मैंने सोचा कि तुम किसी से प्यार नहीं करते बस शरीर का रिश्ता रखते हो?” अचानक सूख आए हलक को गीला करने के लिए मैंने थूक निगला।

उसने मुझे दुष्टता से भरी मुस्कुराहट दी और उसी के कारण तो मैं आज यहां तक आ गई थी।

“मैं एक अपवाद ले सकता हूं या हो सकता है कि दोनों बातों को मिलाकर कुछ किया जाए। मैं सचमुच तुम्हें प्यार करना चाहता हूं। प्लीज! मेरे साथ बिस्तर में आओ। मैं चाहता हूं कि वह व्यवस्था काम करे पर तुम्हें पहले कुछ अंदाजा तो होना चाहिए कि किन हालातों का सामना करना होगा। हम बुनियादी बातों के साथ आज से ही तुम्हारा प्रशिक्षण शुरू कर सकते हैं। इसका मतलब ये नहीं कि मैं रोमानी तरीके से प्यार करने लगा हूं। बेशक आखिर में आ कर, ऐसा करना पड़ रहा है पर ये कुछ ऐसा है, जो मैं करना चाहता हूं। उम्मीद करता हूं कि तुम भी यही चाहती हो।” उसने गहराई से घूरा

ओह…मेरी चाह पूरी होने जा रही थी।

“पर मैंने तो तुम्हारे नियमों के हिसाब से सब कुछ नहीं किया है।” मेरी आवाज में भारीपन था।

“नियमों को भूल जाओ। आज रात के लिए उन सब बातों को भूल जाओ। मैं तुम्हें चाहता हूं। तुम जब से मेरे ऑफिस में आई हो, मैं उसी दिन से तुम पर फिदा हूं और जानता हूं कि तुम भी मुझे चाहती हो। अगर न चाहती तो यहां आराम से बैठकर अपनी सजा और सीमाओं के बारे में बात न कर रही होती। मेहरबानी करके, आज की रात मेरे साथ बिताओ।”

उसने मेरा हाथ थामा और अपनी बांहों में भर लिया। मैं उसके पूरे शरीर की छुअन को शिद्दत से महसूस कर सकती थी। उसने मेरी गर्दन के आसपास अंगुलियां फेरीं और बालों की पोनी को पकड़कर हल्का सा पीछे खींच लिया। मुझे मजबूरन उसकी ओर देखना पड़ा। वह मुझे घूर रहा था

“तुम एक बहादुर नवयुवती हो। मैं तुम पर फिदा हूं।” वह हौले से बोला उसके शब्दों ने जैसे मेरी रगों में आग भर दी। वह हौले से आगे झुका, मेरे होंठों को प्यार से चूमा और फिर मेरे निचले होंठ को चूसने लगा

“मैं इस होंठ को काटना चाहता हूं।” वह मेरे मुंह के पास आकर बुदबुदाया और होंठ को अपने दांत से काटा। मैं कराही और वह मुस्कुराने लगा

“प्लीज एना! मुझे इजाजत दो कि मैं तुम्हें प्यार कर सकूं।”

“हां! “मैं फुसफुसाई क्योंकि मैं इसीलिए यहां आई हूं। उसने मुझे छोड़ा तो उसके चेहरे पर विजयी मुस्कान थी। वह हाथ थाम कर अपने कमरे की तरफ ले चला।

उसका शयनकक्ष बड़ा था। छत जितनी उंची खिड़कियों से रोशनी अंदर आ रही थी। दीवारें सफेद और सामान हल्का नीला था। आधुनिक किस्म का बना पलंग आलीशान था। उसके ऊपर कोई चंदोवा नहीं था। दीवार पर सागर की बहुत सुंदर पेंटिंग टंगी थी।

मैं पत्ते की तरह कांप रही हूं। आखिरकर आज मैं पहली बार किसी से शारीरिक संबंध बनाने जा रही हूं, वह भी किसी और के साथ नहीं, क्रिस्टियन ग्रे के साथ… मेरी सांसें उथली हो रही हैं और मैं उस पर से अपनी आंखें नहीं हटा सकती। उसने अपनी घड़ी उतारकर दराज पर रखी और जैकेट उतारकर एक कुर्सी पर टांग दी। वह सफेद लिनन की शर्ट और जींस में है। वह सचमुच जानलेवा तरीके से खूबसूरत है। उसके गहरे तांबई बाल उलझे हुए हैं, शर्ट पैंट से बाहर झूल रही है-उसकी भूरी आंखें निडरता के साथ चमक रही हैं। उसने अपने कन्वर्स जूते उतारे और एक-एक कर जुराबें भी उतार दीं। ओह क्रिस्टियन ग्रे के पांव..

वाउ… इसके नंगे पैरों में ऐसी क्या बात है? उसने मुझे मुड़कर ताका।

तुम कोई गोलियां तो नहीं लेतीं न?

क्या? छि!

“मुझे भी नहीं लगता।” उसने एक दराज खोला और उसमें से कंडोम का पैकेट निकाला। उसने मुझे गहराई से घूरा।

“तैयार हो।” वह हौले से बोला।

“क्या पर्दे खींच दूं?

“कोई फर्क नहीं पड़ता।” मैं हौले से बोली।

“मैंने तो सोचा था कि तुम किसी को अपने बिस्तर में सोने नहीं देते।”

“किसने कहा कि हम सोने जा रहे हैं?” वह बोला।

ओह! हद हो गई।

वह मेरी ओर चलता हुआ आया। उसकी सेक्सी, चमकीली और आत्मविश्वास से दमकती आंखें देखकर मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। पूरे शरीर में खून का दौरा तेज हो गया। मेरे पेट में; चाह, गर्म और उबलती चाह हिलोरें लेने लगी। वह मेरे सामने खड़ा है, सीधा मेरी आंखों में देख रहा है। ये कितना हॉट है….।

“क्या इस जैकेट को उतार दें?” उसने कहा और धीरे से मेरी जैकेट को कंधों से उतार दिया। उसने उसे कुर्सी पर रख दिया।

“क्या तुम्हें पता कि मैं तुम्हें कितना चाहता हूं, एना स्टील?” वह धीमे से बोला। मेरी सांस और भी भारी चलने लगी। मैं उससे नजरें नहीं हटा सकती। वह आगे आया और चिबुक से गले तक अंगुलियां फिराता चला गया।

“क्या तुम्हें पता भी है कि मैं तुम्हारे साथ क्या करने जा रहा हूं?” उसने मेरे चिबुक को थपथपाते हुए पूछा।

मेरे पेट की मांसपेशियों में अजीब-सी ऐंठन होने लगी। ये दर्द इतना तीखा और प्यारा है कि मैं अपनी आंखें मूंदना चाहती हूं पर उसकी नजरों के सम्मोहन में बंधकर ऐसा कुछ भी तो नहीं कर पा रही। उसने आगे झुककर मुझे चूमा। मेरे वस्त्र उतारते-उतारते वह पूरे बदन पर पंखों की छुअन जैसे चुंबनों की बरसात करता चला गया। फिर उसने मुझे सिर से पांव तक निहारा।

“तुम्हारी त्वचा कितनी कोमल और बेदाग है। मैं इसके एक-एक इंच को चूमना चाहता हूं।”

“ओह… “

इसने ऐसा क्यों कहा कि इसे प्यार करना ही नहीं आता? मैं तो इसके लिए कुछ भी कर सकती हूं। उसने मेरे बाल खोले और कंधों पर बिखेर दिए।” मुझे काले बालों वाली लड़कियां पसंद हैं।” उसने अपने दोनों हाथों से मेरा सिर थाम लिया और होठों पर गहरा चुंबन दिया। मैं अब अपने पूरे शरीर पर उसके शरीर का भार महसूस कर सकती थी।

मैं खुद समझ नहीं पा रही थी कि मेरे मन में ये भावनाएं कहां से आ रही थीं? क्या ये हारमोन थे जो पूरे शरीर में रेंग रहे थे? मैं उसे कितना चाहती हूं। मेरे हाथ उसके बाजुओं तक जा पहुंचे। उसका शरीर कितना गठा हुआ और मजबूत है…मैं अपने हाथ उसके चेहरे से ले जाते हुए बालों तक ले गई। वे कितने मुलायम हैं। मैंने उन्हें हौले से खींचा और वह कराहा। वह मुझे पलंग तक ले गया और घुटनों के बल बैठकर अपनी जीभ को मेरे अंगों पर फिराने लगा।

उसे अपने आगे इस तरह झुका देख मैं दंग रह गई। मेरे हाथ अब भी उसके बालों में थे और मैं अपनी सांसों पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी। उसने मुझे पलंग पर लिटा दिया और एक-एक मेरे जूते और जुराबें उतारने लगा। उसने मेरी एड़ी को उठाया और उस पर अपने अंगूठे का नाखून फिराने लगा। हल्का-सा दर्द तो हुआ पर वह एहसास भी कुछ कम हसीन नहीं था।

उसने मुझे देखा और बोला।

“एनेस्टेसिया स्टील तुम बहुत हसीन हो। मुझे बताओ कि तुम खुद को खुश करने के लिए क्या करती हो?”

मैं तो सुनकर ही चौंक गई।

“क्या “

“नहीं, मैं कुछ नहीं करती “

मैंने अपना सिर हिलाया।

उसने अविश्वास से अपना सिर हिलाया।

“ओह! तो देखते हैं कि इस बारे में हम क्या कर सकते हैं?”

उसने मुझे पलंग पर लिटाकर चुंबनों की बरसात कर दी। मैंने हिलने की कोशिश की तो वह बोला।

“हिलो मत! “

ओह! ऐसा कैसे हो सकता है? मैं स्थिर कैसे रह सकती हूं।

“लगता है बेबी! मुझे तुम्हें आराम से लेटना भी सिखाना होगा।”

मेरे पूरे शरीर पर लगातार चुंबन बरस रहे थे और फिर अचानक उसने मेरे वक्षस्थल को दोनों हाथों से थाम लिया। अब उसकी अंगुलियां उनसे खेल रही थीं और मैं एक अजीब से मीठे एहसास में खोई हुई थी। ओह! अब उसकी दूरी सही नहीं जा रही थी। वह चाहता था कि शरीर के भीतर छिपी इस गहरी और जलती चाह का पहला मजा मैं अकेले ही लूं।

मेरा पूरा शरीर इस खेल से कांप रहा था और वह रुकना नहीं चाहता था।

ओह! प्लीज…!

और पहली बार…मैंने शरीर के उस सुख को जाना। वह मुझे चूम रहा था और मेरा पूरा शरीर हजार-हजार टुकड़ों में कांप रहा था।

ओह! ये तो अद्भुत था। अब मैं जान गई कि ये सब क्या है, उसके चेहरे पर एक संतुष्टि भरी मुस्कान खेल गई। बेशक मेरे चेहरे पर भी उसे आभार के सिवा कुछ नहीं दिखा होगा

“तुम्हें बस थोड़ा-सा नियंत्रण रखना सीखना होगा। बेशक तुम्हें सिखाने में बहुत मजा आने वाला है।” उसने मुझे फिर से चूमा।

मैं चरम सुख की सीमाओं को छूकर लौटी हूं और उखड़ी सांसों पर काबू पाने की कोशिश में हूं और फिर एक बार दोबारा मेरा मन उसी एहसास को पाने के लिए ललक उठा। उसने एक पैकेट से कंडोम निकाला ताकि उसका प्रयोग किया जा सके। मैंने पहली बार शारीरिक संबंध बनाए और क्रिस्टियन के साथ ने सब कुछ इतना सहज कर दिया मानो यह सब पहली बार न होकर पहले भी कई बार हो चुका हो। मेरे मुंह से आह सी निकली।

ओह!

“कहीं मैंने तुम्हें चोट तो नहीं पहुंचाई?”

क्रिस्टियन ने मेरे साथ लेटते हुए पूछा।

“ये बात तुम पूछ रहे हो? मैंने व्यंग्यात्मक स्वर में कहा।”

“नहीं, सच बताओ। तुम ठीक हो न?”

मैं उसके पास ही पसर गई। पूरा शरीर निचुड़ गया था पर भीतर ही भीतर एक अजीब-सी संतुष्टि और सुख का एहसास भी तो हो रहा था। मुझे तो पता तक नहीं था कि मेरा अपना ही शरीर सुख का इतना बड़ा साधन हो सकता है।

“तुम अपना होंठ काट रही हो और तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया।” उसने त्योरी चढ़ाई। मैं उसे देखकर खीसें निपोरने लगी। वह बिखरे बालों, जलती हुई भूरी आंखों और गहरे-गंभीर भावों साथ और भी प्यारा लग रहा था।

“मैं तो ये सब फिर से करना चाहूंगी।” मैं हौले से बोली।

“क्या अभी? मिस स्टील?” वह झुका और कोमलता से मेरे मुंह के कोने को चूम लिया। मैंने बिना कुछ कहे सब कह दिया। वह मेरे शरीर पर हाथ फिराने लगा।”

ओह! तुम कितनी सुंदर हो।”

तुमने अभी तक ये शर्ट क्यों पहन रखी है?” मैंने कहा और उसने भी अपनी शर्ट उतार दी। …हम दोनों एक बार फिर जुनून की उन गलियों से होकर गुज़रे और मंजिलों तक जा पहुंचे। इस दौरान वह बार-बार मुझसे एक ही बात पूछता रहा।

“एनेस्टेसिया, तुम क्या चाहती हो?”

मैं बार-बार एक ही जवाब देती रही।

“मैं तुम्हें चाहती हूं, क्रिस्टियन! मैं तुम्हें चाहती हूं।”

“तुम कितनी प्यारी हो। मैं तुम्हें चाहता हूं।” क्रिस्टियन के एक-एक शब्द में जैसे रस घुला था। मैं उसके नाम के उच्चारण के साथ ही शरीर सुख के उस छोर तक जा पहुंची, जो आज तक मुझसे भी अनजान था। क्रिस्टियन ने फिर से वही प्रक्रिया आरंभ कर दी तो मैंने उससे विनती की कि मेरा शरीर अब साथ नहीं दे रहा था। मैं बुरी तरह से थकान से बेहाल थी पर वह बोला

“बेबी! अभी नहीं! मैं चाहता हूं कि कल जब भी तुम हिलो तो तुम्हें याद आए कि कल रात तुम कहां थीं।”

ये तो हद थी। किसी तरह कराहों और आहों के बीच वह सफर पूरा हुआ और इसके बाद क्रिस्टियन करवट लेकर सो गया और मुझे भी थकान से भरी नींद के आगोश में समाने में मुश्किल से कुछ ही पल लगे होंगे। अपने जीवन के पहले शारीरिक संबंध बनाने के बाद संतुष्टि और सुख से भरपूर नींद!!!!

जब मैं उठी तो वहां अभी अंधेरा था, पता नहीं मैं वहां कितनी देर से सोई हुई थी। मैंने कंबल के अंदर शरीर फैलाया तो शरीर की जकड़न ने बहुत कुछ याद दिला दिया। क्रिस्टियन आसपास नहीं था। मैं उठी और अपने सामने फैले विशाल शहर की इमारतों को देखा। बड़ी इमारतों में कहीं-कहीं बत्तियां जल रही थीं और पूर्व दिशा सुबह होने के संदेशे दे रही थी। मैंने संगीत सुना, कोई पियानो बजा रहा था। मुझे लगा कि धुन जानी-पहचानी है पर पक्का नहीं कह सकती थी।

मैंने अपने आसपास कंबल लपेटा और दबे पांव बड़े कमरे में \आई। क्रिस्टियन पियानो पर है और बजाई जा रही धुन में पूरी तरह से खोया हुआ है। उसके चेहरे के भाव उदास हैं। वह बहुत अच्छा पियानो बजाता है। मैं वहीं दीवार के पास टेक लगाकर खड़ी रही और उस उदास कर देने वाली धुन का आनंद लेती रही। ये तो बड़ा ही धुरंधर संगीतज्ञ निकला। उसने शरीर के ऊपरी हिस्से पर कुछ नहीं पहना हुआ और उसका शरीर पियानो के पीछे पड़े लैंप की रोशनी में नहाया हुआ है। बाकी सारा कमरा अंधेरे में खोया है। मानो वह अपने ही रोशनी के दायरे में सिमटा है, जहां उसे कोई छू भी नहीं सकता…अकेला…अपने ही बुलबुले में कैद!!

मैं चुपचाप उसकी ओर बढ़ी। मैं सम्मोहित भाव से पियानो पर नाचती उसकी लंबी अंगुलियां देख सकती हूं और फिर अचानक याद आया कि इन्हीं अंगुलियों ने उसी कुशलता से मेरे शरीर को भी छेड़ कर नए सुर निकाले थे। उसने अचानक नजरें ऊंची कीं तो उसके चेहरे के भाव समझ नहीं आए।

“सॉरी! मैं हौले से बोली-मैं तुम्हें खलल नहीं देना चाहती थी।”

उसके चेहरे की त्योरी चढ़ गई।

“अरे! ये तो मुझे तुमसे कहना चाहिए।” वह हौले से बोला और पियानो बजाना बंद कर, अपने हाथ टांगों पर रख लिए। अब मैंने देखा कि उसने पी जे पैंट पहन रखी है। उसने बालों में हाथ फिराया और उठ खड़ा हुआ। वह पियानो की ओर से घूमकर मेरी ओर बढ़ा तो मेरा हलक सूख गया। उसके कंधे चौड़े व नितंब संकरे हैं और जब चलता है तो पेट की मांसपेशियां लहराई हुई लगती हैं। वह सचमुच बड़ा ही दिलकश है।

“तुम्हें तो बिस्तर में होना चाहिए।” उसने फटकारा

“ये सुंदर धुन थी। बाक की है?”

“नहीं, मूल रूप से अलासेंद्रो मार्सेलो की है।”

“ये बहुत प्यारी पर उदास है।”

उसके होंठों पर आधी मुस्कान खेल गई।

“बिस्तर! “उसने हुक्म दिया।” वरना सुबह तुम्हें थकान महसूस होगी।”

“मैं उठी तो तुम पास नहीं थे।”

“मुझे नींद नहीं आ रही थी और वैसे भी मुझे किसी के साथ सोने की आदत नहीं है।” वह हौले से बोला

मैं उसके मूड का अंदाजा नहीं लगा सकती। वह थोड़ा सा मायूस दिखा पर अंधेरे में कुछ कहना भी मुश्किल था। शायद यह उसकी धुन का असर था। उसने मेरी कमर में बाजू डाली और कमरे की ओर चल दिया।

“तुम कब से पियानो बजाते आ रहे हो? बहुत अच्छा बजाते हो।”

“जब मैं छह साल का था।”

ओह! क्रिस्टियन और छह साल का बच्चा!…मेरी आंखों के सामने एक सुंदर, तांबई बालों वाले प्यारे से बच्चे की छवि आ गई, जो पियानो की उदास धुनें पसंद करता हो।

“तुम कैसा महसूस कर रही हो?” हम कमरे में आ गए तो उसने पूछा

फिर उसने साइडलाइट जला दी।

“मैं ठीक हूं।”

हम दोनों ही बिस्तर पर एक साथ झुके। चादर पर खून के हल्के धब्बे थे-मेरे खोए हुए कौमार्य का सूचक। मैंने शर्मिंदा होकर अपने कंबल को और भी कस कर लपेट लिया।

वैसे इसे देखकर मिसेज जोंस भी सोच में पड़ जाएंगीं। उसने मेरी चिबुक थामी और सिर पीछे की ओर कर दिया, फिर मुझे ताकने लगा। मेरा चेहरा देखते हुए उसकी आंखें बहुत ही गहरी दिखीं। मुझे एहसास हुआ कि मैंने पहले कभी उसकी नंगी छाती नहीं देखी थी। मेरी अंगुलियां उसकी छाती के बालों से खेलने के लिए सहज भाव से आगे आईं तो वह एकदम पीछे हट गया।

“बिस्तर में जाओ।” उसने तीखे शब्दों में कहा

मैं बिस्तर पर लेट गई और वहां दिख रहे खून के धब्बों को अनदेखा करने का फैसला लिया। वह मेरी पीठ के पीछे लेटा और वहीं से मुझे बांहों के घेरे में ले लिया। अब मेरा चेहरा उससे परे था। उसने मेरे बालों को चूमा और गहरी सांस ली।

“सो जाओ! स्वीट एनेस्टेसिया! “वह बुदबुदाया। मैंने आंखें तो बंद कर लीं पर मन अजीब सा हो आया था, पता नहीं उसकी धुन का असर था या उसके अजीब से दिखते बर्ताव का। क्रिस्टियन ग्रे की जिंदगी का कोई अंधेरा पक्ष भी था।