Overview: जानिए क्यों भारतीय महिलाएं नहीं करतीं खुद पर खर्च
भारतीय महिलाएं खुद पर खर्च करने से क्यों कतराती हैं
Indian Woman Guilt Trap: क्या कभी नोटिस किया है कि हम इंडियन वुमेन बिना सोचे सब पर खर्च कर देते हैं। घर से लेकर बच्चों, पैरेंट्स या फिर त्योहारों पर खर्च करने में हम जरा भी नहीं हिचकती। लेकिन जैसे ही बात खुद की आती है तो हम कहीं ना कहीं रुक जाती हैं। मन में यही विचार होता है कि बेवजह इतने पैसे क्यों खर्च करना या फिर इसकी क्या जरूरत है। अगर हम गलती से अपनी पसंद के जूते या क्रीम खरीद भी लें तो बाद में अपराध बोध होता है कि इन पैसों से कुछ और किया जा सकता है। दरअसल, यहां मुद्दा पैसे का नहीं है, बल्कि मानसिकता का है। हमें बचपन से सिखाया गया है कि अच्छी लड़की या अच्छी औरत वही होती है जो एडजस्ट करे, बलिदान करे, और अपनी जरूरतों को आखिरी में रखे।
ऐसे में हम सेल्फ-केयर को लग्जरी समझने लगते हैं जबकी असल में ये बुनियादी जरूरत है। एक महिला सबका ख्याल रखते-रखते खुद को इग्नोर करने लग जाती है और फिर फ्रस्ट्रेशन और बर्नआउट नॉर्मल लग जाता है। तो चलिए आज हम जानेंगे कि भारतीय महिलाएं खुद पर खर्च करने से क्यों डरती हैं, और इस माइंडसेट को बदलने के लिए क्या किया जा सकता है-
क्यों कई भारतीय महिलाओं को खुद पर खर्च करने में डरती हैं?

सबसे पहले हम उन वजहों की बात करेंगे, जिसके चलते एक भारतीय महिला खुद पर पैसे खर्च करने में हिचकती है-
सबसे पहले तो लड़कियों को बचपन से ही सिखाया जाता है कि उन्हें परिवार व दूसरों का ख्याल पहले रखना है और बाद में खुद का। जिसकी वजह से उन्हें समय के साथ बेसिक सेल्फ-केयर भी स्वार्थ जैसा लगता है।
अमूमन महिलाओं के मन में पैसे से जुड़ा अपराध बोध होता है। कई महिलाओं को खुद पर खर्च करते हुए लगता है कि इस पैसे से घर का कुछ आ जाता या फिर इसके बिना भी मेरा काम चल जाएगा। ऐसे में उन्हें खुद पर खर्च करना गैर-ज़रूरी लगता है, भले ही वह अफोर्डेबल हो।
महिलाओं की आर्थिक निर्भरता भी उन्हें खुद पर खर्च करने से रोकती हैं। इसके अलावा, उनकी कंडीशनिंग भी काफी मायने रखती है। यहां तक कि काम करने वाली महिलाएं भी अक्सर यह सुनकर बड़ी होती हैं कि ज्यादा खर्च मत करो या फिर भविष्य के लिए बचाकर रखो। इसलिए उनके लिए पैसा बचाने की चीज बन जाता है।
महिलाओं को अक्सर जजमेंट का डर भी रहता है। उनके मन में यह विचार रहता है कि लोग क्या कहेंगे या फिर इसकी क्या जरूरत थी। यह डर धीरे-धीरे महिलाओं को खुद को चुनने से रोक देता है।
इस सोच को धीरे-धीरे कैसे बदलें

अमूमन महिलाएं खुद पर खर्च करने में अपराधबोध महसूस करती हैं, लेकिन इस सोच को धीरे-धीरे बदला जा सकता है-
यह समझें कि खुद पर खर्च करना बर्बादी नहीं है। अच्छे कपड़े, स्किनकेयर, थेरेपी, किताबें, फिटनेस आदि पर खर्च करना इनवेस्टमेंट हैं, लग्जरी नहीं।
हमेशा छोटी शुरुआत करें। आपको बड़ी शॉपिंग करने की जरूरत नहीं है। अकेले एक कॉफी, एक अच्छी कुर्ती या एक स्किनकेयर प्रोडक्ट जो आपको पसंद हो, खरीदें। खुद से कहें कि मैं इसकी हकदार हूं।
खुद के लिए एक मी बजट तय करें। हर महीने सिर्फ अपने लिए ₹500-₹1000 का बजट रखें। इसके लिए आपको किसी तरह की सफाई देने की जरूरत नहीं है और इसके लिए मन में किसी तरह का अपराधबोध ना रखें।
खुद से बात करने का तरीका बदलें। यह कहने की जगह कि ‘पैसे बर्बाद हो रहे हैं‘ यह कहें ‘मैं अपनी देखभाल कर रही हूं‘। शब्द हमारी सोच से ज्यादा मायने रखते हैं।
