Overview: कैशबैक की चमक में छिपा खर्च बढ़ने का सच
जानिए कैशबैक ट्रैप क्या है, यह कैसे काम करता है और इससे बचकर अपने बजट को समझदारी से कैसे मैनेज करें।
CashBack Trap: कैशबैक का नाम सुनते ही हम सभी के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान छा जाती है। आज के समय में जब हम डिजिटल शॉपिंग से लेकर पेमेंट करने लगे हैं तो ऐसे में कैशबैक सुनकर लगता है कि जैसे खर्च किया गया पैसा वापस आ गया हो। लेकिन क्या आपने कभी नोटिस किया है कि आप ₹100 का कैशबैक पाने के चक्कर में आप अनजाने में ₹1000 का अतिरिक्त सामान खरीद लेती हैं? ऐसा हम सभी के साथ कभी ना कभी हुआ है।
खासतौर से महिलाएं, जिनके कंधों पर घर का बजट संभालने की जिम्मेदारी होती है, वे अक्सर थोड़ा पैसा बचाने के लिए अक्सर कैशबैक ट्रैप में फंस जाती हैं। वहीं, दूसरी ओर मार्केटिंग कंपनियां भी मनोवैज्ञानिक तरीके से महिलाओं को निशाना बनाती हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि यह कैशबैक ट्रैप क्या होता है और आप इस जाल से किस तरह बच सकती हैं-
कैशबैक ट्रैप होता क्या है?

कैशबैक ट्रैप का मतलब होता है कि ऑफर या कैशबैक के चक्कर में ऐसी चीज खरीदना, जिसकी हमें जरूरत नहीं होती है। इस ट्रैप के चक्कर में फंसकर हम उस सामान को भी खरीद लेते हैं, जो पहले से घर में है या फिर “ऑफर खत्म हो जाएगा” यह सोचकर गैर-जरूरी चीजों को भी ऑर्डर कर देते हैं। जब हम कुछ पैसे वापस पाना चाहते हैं, तो हम उन चीजों पर भी पैसा खर्च कर देते हैं, जिनका हमारे लिए कोई काम नहीं है और फिर महीने के आखिरी तक सारा बजट बिगड़ जाता है।
महिलाएं कैशबैक ट्रैप में क्यों फंस जाती हैं?
अमूमन यह देखने में आता है कि ज्यादातर महिलाएं कैशबैक ट्रैप के जाल में फंस जाती हैं और इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं। मसलन-
महिलाएं सेविंग को लेकर ज्यादा कॉन्शियस होती हैं और उन्हें लगता है कि कैशबैक मतलब पैसे बच रहे हैं, जबकि असल में खर्च बढ़ रहा होता है।
महिलाओं के कंधों पर घर संभालने की जिम्मेदारी होती है। इसलिए, कैशबैक की मदद से वे बजट को मैनेज करने की कोशिश करती हैं। ग्रोसरी, बच्चों की चीजें, किचन आइटम में ऑफर देखकर स्टॉक करने की आदत बन जाती है।
कई बार महिलाएं थकान, स्ट्रेस या मूड ठीक करने के लिए ऑनलाइन शॉपिंग करना चाहती हैं और कैशबैक उनकी इस इच्छा को और भी प्रबल बनाता है।
कैशबैक ट्रैप से बचने के लिए क्या करें

कैशबैक ट्रैप अक्सर अपने जाल में फंसा लेता है, लेकिन अगर आप थोड़ी स्मार्टनेस दिखाती हैं तो ऐसे में इस ट्रैप से खुद को सुरक्षित रख सकती हैं। मसलन-
जब भी आपको कैशबैक दिखे तो ऐसे में बिना सोचे-समझे खर्च करने से पहलेे एक बार खुद से सवाल करें कि मैं असल में कितने पैसे खर्च कर रही हूं। इससे आपको एक रियलिटी चेक मिलेगा। मसलन, अगर ₹200 के कैशबैक के लिए आप ₹2000 खर्च कर रही हैं जिसकी आपको जरूरत नहीं थी, तो यह बचत नहीं, नुकसान है।
इंस्टेंट शॉपिंग की आदत बदलें। किसी भी सेल या कैशबैक ऑफर वाले सामान को कार्ट में डालने के बाद कम से कम एक दिन रुकें। अगर अगले दिन भी आपको जरूरी लगता है, तभी आप पेमेंट करें। इस नियम को अपनाने से आप देखेंगे कि बहुत सारी चीजें आपको अगले दिन तक जरूरी ही नहीं लगेंगी।
अपने पैसों को ट्रैक करने के लिए आप बजटिंग ऐप्स या डायरी का उपयोग करें। आप हर चीज के लिए एक बजट तय करें। एक बार बजट खत्म होने के बाद, चाहे कितना भी बड़ा कैशबैक क्यों न मिले, खरीदारी न करें। इससे आप बेवजह के ट्रैप में फंसने से बच जाएंगी।
शॉपिंग ऐप्स के नोटिफिकेशन आपको सामान खरीदने पर मजबूर करते हैं और फिर आप बिना सोचे-समझे उन्हें खरीद लेते हैं। इसलिए, इस तरह के ऐप्स के नोटिफिकेशन बंद कर दें। इससे जब आपको जरूरत होगी, तब आप खुद ऐप पर जाकर सामान खरीद लेंगी।
