Summary: सावन में क्यों जाती हैं बेटियां मायके? जानिए धार्मिक और पारंपरिक महत्व
सावन के महीने में शादीशुदा बेटियों का मायके जाना एक शुभ और पारंपरिक परंपरा मानी जाती है। इससे न सिर्फ उन्हें मां-पिता का आशीर्वाद मिलता है बल्कि दांपत्य जीवन में भी सुख-समृद्धि आती है।
Sawan Tradition: हिन्दू धर्म में सावन के महीने का बहुत ही खास महत्व होता है। यह महीना भगवान शंकर को समर्पित होता है और इस पूरे महीने में उनकी पूजा विशेष रूप से की जाती है। साथ ही इस महीने में कुछ खास रीति-रिवाजों, परंपराओं और मान्यताओं का भी पालन किया जाता है, जिसमें शादीशुदा महिलाएं अपने हाथों में हरी-हरी चूड़ियाँ पहनती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और इस महीने में ही अपने मायके भी जाती हैं। खासकर शादी के बाद नवविवाहित लड़कियों का मायके जाना बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि सावन के महीने में बेटियां मायके क्यों जाती हैं और इस मान्यता के पीछे का क्या कारण है? नहीं, तो कोई बात नहीं, हम आपको इस मान्यता के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।
क्या है सावन के महीने में मायके जाने का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म से जुड़े सभी रीति-रिवाज, परंपराएं और मान्यताओं का पालन हमेशा से किया जाता रहा है। इसी में से एक है सावन के महीने में मायके जाने की परंपरा। दरअसल सावन के महीने में भगवान शंकर की पूजा की जाती है। इस महीने में नवविवाहित लड़कियों को मायके आने पर अपनी माता से आशीर्वाद प्राप्त होता है और सौभाग्य प्राप्त करने का भी अवसर मिलता है, जिससे उन्हें जीवन भर सुहागिन और धन्य रहने का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही वे अपनी माता के साथ शिव-पार्वती की पूजा कर पाती हैं।
सावन में मायके क्यों जाया जाता है

सावन के पवित्र महीने में मायके जाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। शादी के बाद पहले सावन पर नवविवाहित लड़कियों का मायके जाना काफी शुभ माना जाता है। दरअसल ऐसा माना जाता है कि बेटी से ही घर का भाग्य जुड़ा होता है और वे घर की लक्ष्मी होती हैं। ऐसे में जब वे शादी के बाद अपने ससुराल चली जाती हैं तो उनके ना रहने पर घर में उदासी छा जाती है और जब वे सावन के महीने में अपने मायके आती हैं, तो अपने साथ ढेरों खुशियाँ लेकर आती हैं। साथ ही उनका भाग्य घर को नियंत्रित करता है और इससे पारिवारिक जीवन में खुशियां बढ़ती हैं और घर में सुख-समृद्धि भी आती है।
मायके जाना है विशेष परंपरा

शादी के बाद सावन में बेटियों का मायके जाना एक विशेष परंपरा है। इस परंपरा का पालन सदियों से किया जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि इस परंपरा का पालन करने से मायके और ससुराल के बीच सामंजस्य अच्छा बना रहता है और मेल-मिलाप भी बढ़ता है। साथ ही शादी के बाद पहला सावन मायके में बिताने से दांपत्य जीवन सुखी होता है और पति-पत्नी के बीच का प्यार भी बढ़ता है।
सावन के महीने में बेटियों के मायके आने के पीछे एक वजह यह भी बताई जाती है कि शादी के बाद लड़कियां अपने ससुराल में अकेला महसूस करती हैं, उन्हें अपने घरवालों की बहुत याद आती है। ऐसे में मायके आकर वे मानसिक और शारीरिक रूप से खुद को बेहतर महसूस करा पाती हैं।
