जितना पर्यटन है उससे भी कहीं ज़्यादा जैव विविधता
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में कुछ ऐसी जगहें हैं जहां शांति है, सकून है, जहां जाकर ऐसा लगता है कि यही वह जगहें हैं जहां पर मैं वर्षों से आना चाहता था।
Uttarakhand Tourism: पहाड़ी राज्य उत्तराखंड को पूरी दुनिया में अपने नदी, पहाड़ और झरनों के लिए जाना जाता है। इस जगह पर जितना पर्यटन है उससे भी कहीं ज़्यादा जैव विविधता जिसकी वजह से यह देश की सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वाली जगहों में आता है। इस जगह पर घूमने टहलने और छुट्टियाँ बिताने वाली जगहों की कोई कमी नहीं है लेकिन कुछ ऐसी जगहें हैं जहां शांति और सुकून है। आपको कुछ ऐसी ही बेहद महत्वपूर्ण जगहों के बारे में बता रहे हैं।
1- मायावती आश्रम चम्पावत

चम्पावत जिले में स्थित मायावती को अद्वैत आश्रम की वजह से जाना जाता है पर इस जगह का जो शांत और सकून भरा वातावरण है उससे अलहदा कुछ भी नहीं। यह जगह आध्यात्मिक रुचि रखने वाले देश और विदेश दोनों ही तरह के सैलानियों को आकर्षित करती है। स्वामी विवेकानंद ने यहाँ अपना आख़िरी प्रवचन दिया था। मायावती में एक पुस्तकालय और एक छोटा सा संग्रहालय भी है। जिसे देखकर मन को बहुत सकून मिलता है और हम अपना वक़्त बिताना पसंद करते हैं। इस जगह पर रहते हुए माउंट एबॉट और लोहाघाट घूमना बिल्कुल भी नहीं भूले। यह जगह बिल्कुल मायावती के पास स्थित है और कई कारणों से चर्चित है। यह इतनी ख़ूबसूरत है कि आप बार-बार जाना चाहेंगे।
बजट: दो से तीन दिन की ट्रिप का बजट 5 हज़ार रुपए।
कैसे पहुंचे: दिल्ली से चम्पावत के लिए बस के द्वारा, फिर छोटी गाड़ी से मायावती आश्रम
2- अनासक्ति आश्रम, कौसानी

कौसानी में प्रकृति के विलय और हरियाली का अनूठा संगम है। खूबसूरत हिमालय का आनंद लेने और सूर्यास्त और सूर्योदय देखने के लिए कौसानी एक आदर्श स्थान है। इस जगह से नंदा देवी की चोटियाँ, त्रिशूल पर्वत और अन्य पर्वत चोटियाँ दिखाई देती हैं। इस जगह को यहाँ के चाय के पुराने बगानो की वजह से जाना जाता है। यह वही जगह है जहां पर महात्मा गांधी जी ने कुछ वक़्त बिताया था और इसे इंडिया का स्विट्ज़रलैण्ड कहा था। कौसानी में प्रसिद्ध लेखक सुमित्र नंदन पंत का घर भी है जिसे अब एक सरकारी संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया है, इस जगह पर उनसे और उनके जीवन से जुड़ी चीज़ों को सनगढ़िट किया गया है। इसी जगह पर अनासक्ति आश्रम और प्राचीन बैजनाथ मंदिर भी स्थित है जिसकी यात्रा करना न भूलें।
बजट: दो से तीन दिन की ट्रिप का बजट 5 हज़ार रुपए।
कैसे पहुंचे: दिल्ली से बस के द्वारा कठगोदाम, फिर वहाँ से कौसानी।
3- चौकोरी गांव, पिथौरागढ़

अपनी दिन-प्रतिदिन की व्यस्त जिन्दगी से दूर घूमने जाने के लिए यदि किसी ऐसी जगह की तलाश हो जो शांत और खूबसूरत हो, जहां से हिमालय की बहुत सारी ऊंची चोटियां दिखाई देती हो तो चौकोरी हिल स्टेशन आपके लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ जिले में स्थित चौकोरी उन गिनी चुनी जगहों में आती है जिसे अपने सुखद वातावरण, शांति और प्राकृतिक सुन्दरता के लिए जाना जाता है। इस जगह पर जाने में थोड़ा वक़्त ज़रूर लगेगा लेकिन जो शांति और सकून मिलेगा वह मन को भाव विभोर कर देगा। इस जगह पर आपको पर्यटन के साथ साथ जैव विविधता देखने को मिलेगी। यहाँ के ऊँचे ऊँचे पहाड़ आपका मन मोह लेंगे।
बजट: दो से तीन दिन की ट्रिप का बजट 5-7 हज़ार रुपए।
कैसे पहुंचे: पिथौरागढ़ के लिए बस लें, यह राज्य के कई बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। फिर वहाँ से चौकोरी पहुंचे।
4- लंढौर हिल स्टेशन

मसूरी के महज़ छह किमी की दूरी पर स्थित लंढौर को लोग माउंटेन पैराडाइज कहते हैं। यदि आप जगहों को देखने और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों में दिलचस्पी रखते हैं तो सच मानिये यह जगह आपके लिए ही है। इस जगह की हवा में जो बात है वह कहीं और नहीं मिलती। इस जगह पर आकर आप अपने परिवार के साथ या फिर एकांत का समय व्यतीत कर सकते हैं। यह जगह इतनी शांत और सुरम्य है कि लम्बे वक़्त तक आपका ठहरने का मन करेगा। बाद घूमने की करें तो इस जगह पर आपको कई सारे पर्यटन स्थल और चर्च भी मिलेंगे। इस जगह पर पहुँचकर थोड़ा थोड़ा ब्रिटिश टच देखने को मिलेगा क्योंकि यह जगह कभी उनके लिए आरोग्य सेंटर की तरह थी। लोग इस जगह पर अपनी बीमारियों के निदान के लिए आया करते थे। इस जगह पर कई ऐसी दुकानें हैं जो बेहद ही प्रसिद्ध हैं। पैन केक हो, आमलेट अथवा जिंजर लेमन टी मुझे इस जगह से ज्यादा अच्छी कहीं और नहीं मिली।
बजट: दो से तीन दिन की ट्रिप का बजट 10-12 हज़ार रुपए।
कैसे पहुंचे: मसूरी फिर लंढौर, यह राज्य के कई बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
5- नीम करोली आश्रम, काकरीघाटी

काकरीघाट अपने नीम करोली बाबा आश्रम के लिए प्रसिद्ध है जोकि कोसी नदी के तट पर स्थित है। इस जगह की देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के भक्तों के बीच काफ़ी मान्यता है। इस जगह पर ऐपल और फ़ेसबुक के फ़ाउंडर तक यात्रा कर चुके हैं। स्वामी विवेकानंद भी इस जगह पर कभी ध्यान के लिए आए थे। हिमालय की तलहटी में बसा यह आश्रम अपने शांत और एकांत विश्राम के लिए जाना जाता है। इस जगह पर हनुमान की पूजा की जाती है।देश-विदेश से सैलानी आकर इस जगह पर अपना समय व्यतीत करना पसंद करते हैं। रानीखेत की ओर जाते समय रुकने के लिए यह एक अच्छी जगह है। आपके पास वक़्त हो तो आप इस जगह पर रहते हुए भवाली और रानीखेत भी घूमने का प्लान बना सकते हैं।
बजट: दो से तीन दिन की ट्रिप का बजट 5 हज़ार रुपए।
कैसे पहुंचे: कठगोदाम फिर वहाँ से काकरीघाट, यह राज्य के कई बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
यात्रा की तैयारी कैसे करें?
यह सभी जगहें अच्छी मगर थोड़ी सी दूरदराज़ और कम एक्सप्लोर हैं इसलिए आपको जितना नयापन और शांति का अनुभव करायेंगी उतना ही सुविधाओं का अभाव भी देखने को मिल सकता है। इन जगहों पर जाने के लिए पहले से आवगमन के साधनों, ठहरने की जगहों और अपनी निजी ज़रूरतों का इंतज़ाम पहले से सुनिशित कर लें। इन जगहों पर ऐसी सुविधाएँ नहीं मिलेंगी जैसी बड़े बड़े पर्यटन स्थलों पर आपको देखने को मिलती हैं।
