भारत सांस्कृतिक धरोहर के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इसी के दम पर आज यूनेस्को ने कलकत्ता की दुर्गापूजा को सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिया है। जी हां यूनेस्को ने भारतीय त्योहार दुर्गा पूजा को अपनी मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की फेहरिस्त का हिस्सा बना लिया है। जो केवल बंगाल की नहीं बल्कि समस्त भारत के लिए गौरव की बात है।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यूनेस्को के इस फैसले की खूब सराहना की और हर भारतीय के लिए गर्व और उल्लास का विषय बताया। यूनेस्को ने अपनी साइट पर Durga Puja का विवरण देते हुए लिखा है कि कोलकाता की दुर्गा पूजा धर्म और कला के प्रर्दशन की नज़र से सबसे बेहतरीन उदाहरणों में से एक है और प्रतिभाशाली कलाकारों व डिजाइनरों के लिए भी इसे एक बड़े मौके के रूप में देखा जाता है।
इसके अलावा यूनेस्को ने ये भी लिखा है कि दुर्गा पूजा के दौरान वर्ग, जाति और धर्म का विभाजन अपनेआप टूट जाता है। जो सबसे उपर माना जाता है। प्रत्येक वर्ष सितंबर और अक्टूबर महीने में Durga Puja पूजा का आयोजन होता है और नवरात्रों के दौरान दस दिनों तक मां आदिशक्ति की वंदना की जाती है। इस दौरान हर ओर भव्य पंडाल सजते हैं, जो उत्सव को हर्षोंउल्लास से भर देते हैं।
दरअसल, बंगाल सरकार ने यूनेस्को से Durga Puja को विरासत की सूची में शामिल करने का आवेदन किया था। इसके तहत अब यूनेस्को ने इस आवेदन को स्वीकार कर लिया है। जब कि इससे पहले साल 2017 में कुंभ मेले और फिर 2016 में योग को इस मान्यता से नवाज़ा गया था। इसके अलावा पंजाब के पारंपरिक पीतल और तांबे के शिल्प को भी 2014 में मान्यता मिल चुकी है। वहीं मणिपुर के संकीर्तन अनुष्ठान गायन को भी साल 2013 में ये मान्यता मिली थी।
