Overview: कौन सा मंत्र दिलाता है जन्म-मरण से मुक्ति?
शास्त्रों के अनुसार मृत्यु के समय ‘तारक मंत्र’ का स्मरण करने से प्राणी को मोक्ष प्राप्त होता है। राम नाम, ॐ नमः शिवाय और ॐ प्रमुख तारक मंत्र हैं। काशी में मृत्यु इसलिए मोक्षदायक मानी जाती है क्योंकि शिवजी स्वयं जीव के कान में तारक मंत्र का उच्चारण करते हैं।
Tarak Mantra: जीवन और मृत्यु, दोनों ही ईश्वर की बनाई सृष्टि का हिस्सा हैं। हर इंसान चाहता है कि मृत्यु के बाद उसे मोक्ष मिले और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त हो। लेकिन सवाल यह है कि क्या कोई ऐसा मंत्र है, जो मृत्यु के समय स्मरण करने से मोक्ष की प्राप्ति हो सके? वेद, पुराण और शास्त्र बताते हैं कि इसका उत्तर है- तारक मंत्र।
क्या है तारक मंत्र?
‘तारक’ शब्द का अर्थ है – उद्धार करने वाला। यानी ऐसा मंत्र जो जीवन के अंतिम क्षण में प्राणी को भवसागर से पार करा दे और उसे सीधा मुक्ति प्रदान करे।
शिवपुराण, रामचरितमानस और उपनिषदों में उल्लेख मिलता है कि यदि मृत्यु के समय जीव ‘तारक मंत्र’ का स्मरण कर ले, तो वह पुनर्जन्म से मुक्त होकर ब्रह्म में लीन हो जाता है।
काशी में मृत्यु क्यों मानी जाती है मोक्षदायक?
शास्त्रों के अनुसार काशी (वाराणसी) को मोक्षभूमि इसलिए कहा गया है क्योंकि यहां मृत्यु के समय स्वयं भगवान शिव जीव के कान में तारक मंत्र का उपदेश देते हैं। यही कारण है कि काशी में प्राण त्यागने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसका अर्थ केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि पुराणों में प्रमाणित है। काशीखंड और शिवपुराण में लिखा है कि मृत्यु के समय शिवजी जीव को राम नाम का उपदेश देते हैं। यही कारण है कि काशी में मरना सीधी मुक्ति का मार्ग है।
तारक मंत्र कौन-कौन से हैं?
शास्त्रों ने कई मंत्रों को तारक कहा है। इनमें प्रमुख हैं:
शास्त्रों में कई ऐसे मंत्र बताए गए हैं जिन्हें तारक मंत्र माना गया है। इनमें सबसे प्रमुख है राम नाम। रामचरितमानस और शिवपुराण में इसे सर्वोच्च तारक बताया गया है, जो मोक्ष प्रदान करता है।
इसके अलावा ॐ नमः शिवाय भी शैव परंपरा का महत्वपूर्ण तारक मंत्र है। शिवपुराण और यजुर्वेद के अनुसार मृत्यु के समय इसका जाप आत्मा के उद्धार में सहायक होता है।
ॐ (प्रणव मंत्र) को वेदांत परंपरा का प्रमुख तारक मंत्र माना गया है। माण्डूक्य उपनिषद और गीता में इसका उल्लेख है और इसे ब्रह्म में विलीन होने वाला मंत्र कहा गया है।
इसी तरह ॐ नमो नारायणाय वैष्णव परंपरा का तारक मंत्र है। नारायण उपनिषद के अनुसार इसका जाप करने से साधक को नारायण पद की प्राप्ति होती है।
तुलसीदासजी ने कहा है
“राम नाम सम हरि कथा न भवसागर कच्छु आउ।”
अर्थात राम नाम का स्मरण ही जन्म-मरण के चक्र को समाप्त कर देता है। शिवपुराण में स्वयं महादेव ने कहा है कि राम नाम ही तारक मंत्र है, जो मृत्यु के समय स्मरण करने वाले को भवसागर से पार करा देता है।
ॐ नमः शिवाय: पंचाक्षरी का दिव्य रहस्य
‘ॐ नमः शिवाय’ केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि शिव का साक्षात ब्रह्मस्वरूप है। मृत्यु के समय यदि इसका श्रवण, जप या स्मरण हो जाए तो मनुष्य के समस्त पाप क्षमा हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
ॐ : प्रणव मंत्र और मोक्ष का मार्ग
माण्डूक्य उपनिषद और गीता में कहा गया है:
“ॐ इत्येकाक्षरं ब्रह्म।”
यानि मृत्यु के समय जो प्राणी ‘ॐ’ का जप करता है, वह सीधा ब्रह्म में विलीन हो जाता है। यह मंत्र सभी वेदों का सार और मोक्ष की कुंजी है।
कैसे मिले तारक मंत्र का लाभ?
शास्त्रों में कुछ उपाय बताए गए हैं ताकि मृत्यु के समय स्वाभाविक रूप से तारक मंत्र का स्मरण हो:
नित्य जप करें, ताकि अंत में याद दिलाने की आवश्यकता न पड़े।
साधक को चाहिए कि वह किसी योग्य गुरु से दीक्षा प्राप्त करे और उनके निर्देशन में साधना का अभ्यास करे।
काशी या मोक्ष-स्थल पर वास करें, जहाँ शिवजी का आशीर्वाद सहज प्राप्त हो।
राम नाम का कीर्तन और साधना नियमित करें।
