Overview:
अब लंदन की अंडरग्राउंड मेट्रो में यात्रियों को कॉल करने, म्यूजिक सुनने, वीडियो देखने और गेम खेलने के लिए हेडफोन लगाना होगा। ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन की ओर से शुरू किए गए इस अभियान के तरह यात्रियों से हेडफोन इस्तेमाल करने की अपील की जा रही है।
Sodcasting Meaning: लंदन में इन दिनों सॉडकास्टिंग को लेकर एक बड़ी मुहिम चलाई जा रही है। इसके तहत अब लंदन की अंडरग्राउंड मेट्रो में यात्रियों को कॉल करने, म्यूजिक सुनने, वीडियो देखने और गेम खेलने के लिए हेडफोन लगाना होगा। ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन की ओर से शुरू किए गए इस अभियान के तरह यात्रियों से हेडफोन इस्तेमाल करने की अपील की जा रही है। ऐसा नहीं करने वालों पर एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर क्या है ‘सॉडकास्टिंग’।
आज की बड़ी समस्या है सॉडकास्टिंग

आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोग सार्वजनिक स्थानों पर जैसे गार्डन, बस, ट्रेन, मॉल आदि में मोबाइल पर स्पीकर पर तेज आवाज में वीडियो देखते हैं, म्यूजिक सुनते हैं या बातें करते हैं। वे अपने मोबाइल में इस कदर खोए रहते हैं कि उन्हें इस बात का एहसास ही नहीं होता कि उनके इस व्यवहार से दूसरों को परेशानी हो रही है। इसी को कहा जाता है सॉडकास्टिंग। इस सॉडकास्टिंग के शिकार सिर्फ आज के युवा ही नहीं हैं। आपने बुजुर्गों में खासतौर पर यह आदत देखी होगी। चाहे वे किसी समारोह में हों या परिवार के साथ वे तेज आवाज में मोबाइल पर वीडियो देखते मिल ही जाते हैं। ऐसा लोग भले ही अपनी सुविधा के लिए करें, लेकिन असल में इसके कई नुकसान हैं।
आखिर कहां से आया यह शब्द
2000 के दशक में सॉडकास्टिंग शब्द का उपयोग ब्रिटेन में प्रचलन में आया। उस समय स्मार्टफोन्स का दौर शुरू हो चुका था और लोग तेज आवाज में मोबाइल स्पीकर पर गाने बजाते थे। इस व्यवहार को न सिर्फ दूसरों को परेशान करने वाला माना गया। बल्कि इसे असभ्यता की श्रेणी में रखा गया।
लोग होते हैं परेशान
लंदन में हाल ही में हुए एक सर्वे में सामने आया कि मेट्रो ट्रेन में सफर करने वाले 70 प्रतिशत यात्री सॉडकास्टिंग से परेशान थे। उन्होंने मांग की कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में लोगों को मोबाइल के साथ हेडफोन यूज करने चाहिए। पांच में से हर दो यात्रियों ने कहा कि उन्हें अक्सर सफर के दौरान सॉडकास्टिंग का सामना करना पड़ता है। 54 प्रतिशत लोगों ने कहा कि यह अनुभव असहज और परेशान करने वाला होता है। सॉडकास्टिंग से परेशान होने वालों में पुरुषों का आंकड़ा जहां 46 प्रतिशत था। वहीं 63 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं।
सॉडकास्टिंग के हैं कई नुकसान
सॉडकास्टिंग को लोग भले ही अपनी सुविधा मानें। लेकिन असल में इसके ढेर सारे नुकसान भी हैं। यह आपकी सामाजिक असंवेदनशीलता दिखता है। एक्सपर्ट कहते हैं यह व्यक्ति की जरूरत और दूसरों की भावनाओं के बीच एक असंतुलन का उदाहरण है। इससे यह पता चलता है कि आप दूसरों के प्रति कम सहानुभूति रखते हैं। इससे सामाजिक तनाव बढ़ता है।
ऐसे दूर हों सॉडकास्टिंग से
सॉडकास्टिंग से बचने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर हमेशा इयरफोन और हेडफोन का उपयोग जरूर करें। इससे आपका मन भी लग जाएगा और दूसरे परेशान भी नहीं होंगे। सार्वजनिक स्थानों पर सॉडकास्टिंग से बचें। ऐसा करने से आप आसपास के माहौल और वातावरण का आनंद ले सकते हैं। इससे मोबाइल एडिक्शन में भी कमी आएगी। यदि घर के बुजुर्ग सॉडकास्टिंग कर रहे हैं तो उन्हें इसके बारे में बताएं। उनके साथ भरपूर समय बिताएं, ढेर सारी बातें करें, जिससे वे मोबाइल से दूरी बना सकें।
