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Sharing is Caring
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Sharing is Caring : हमलोगों ने बड़े होने के दौरान एक चीज जरूर सीखी थी शेयर करना। सीखने से ज्यादा हमलोगों ने हर स्थिति में एक पंचलाइन जरूर सुनी- शेयरिंग इस केयरिंग। मतलब बांटना ही सही मायने में ध्यान रखना है।
लेकिन कोरोना काल में, खासकर लॉकडाउन के दौरान शेयरिंग की इस आदत को भुला दिया गया। बच्चों को भी अपने आप में सीमित रहने के लिए बोल दिया गया। घर के बुजुर्ग घर पर परिवार के होते हुए भी अकेले हो गए। हालांकि, यह सब स्थिति की डिमांड थी। लेकिन क्या इंसान बिना शेयरिंग के जिंदा रह सकेगा???
बिल्कुल भी नहीं।
पूरी प्रकृति और पूरा जीवन शेयरिंग के आधार पर ही आगे बढ़ता है। तभी तो कोरोना में जब कुछ लोग घर में बैठे थे तो वहीं कुछ लोग दूसरों की मदद करने के लिए रास्ते पर प्रवासी मजदूरों को खाना बांट रहे थे। सरकार पैसे बांट रही थी। डॉक्टर और नर्स बिना अपनी (जिन्होंने सही मायने में मदद की) जान की परवाह किए बिना, दूसरों की जान बचाने की कवायद कर रहे थे। तो यह है शेयरिंग की ताकत जो पूरी इंसान प्रजाति और पृथ्वी को ताकतवर बनाती है। इसी ताकत का अहसास हमें अपने बच्चों को कराना है और उन्हें इस बात का अहसास कराना है कि शेयरिंग ही हमेशा सबसे बड़ी कृतज्ञता और आभार है जो आपको संपूर्ण इंसान बनाने में मदद करती है।

Sharing is Caring : शेयरिंग की आदत

शेयरिंग कोई मैथ्स को फॉर्मूला नहीं है जिसे एक हफ्ते तक रट लिया जाए तो आप याद मैथ्स के सवाल हल करने लगेंगे। शेयरिंग एक आदत है जो आपके बच्चे के विकास के साथ विकसित होती है। इसलिए बच्चों को बचपन से ही उनके बड़े होने के दौरान शेयरिंग की आदत डलवाएं। इसे बच्चा धीरे-धीरे ही सीख सकता है क्योंकि अपनी चीज किसी और के साथ बांटना बहुत ही मुश्किल होता है। खासकर बच्चों के लिए। इसे बेस्ट सोशल स्किल कहा जाता है जो आपके बच्चों को दूसरों के साथ एडजस्ट होने में मदद करता है।
शेयरिंग की इस आदत को मां-बाप अपने बच्चों को छोटे-छोटे कामों के दौरान सिखा सकते हैं। जैसे खेलने के दौरान दूसरों को अपने खिलौने देना। बर्थडे के दिन गरीब बच्चों को खाना खिलाना।
आज हम इसी शेयरिंग की आदत के बारे में बात करेंगे जो बच्चों को मां-बाप छोटी उम्र से ही सिखा सकते हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है कि शेयरिंग सीखने की भी एक उम्र होती है?

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Sharing tips

शेयरिंग की एक उम्र भी होती है

वैज्ञानिक मानते हैं कि शेयरिंग की आदत बच्चों को दो साल की उम्र के बाद से सिखानी चाहिए। शोध के अनुसार पाया गया है कि दो साल की उम्र के बाद वाले बच्चे ही किसी के साथ अपनी चीजों को बांटने के लिए तैयार होते हैं। चार-पांच साल की उम्र में शेयरिंग की यह आदत पूरी तरह से विकसित हो जाती है। इस शोध के अनुसार दो साल की उम्र के बाद जब बच्चे किसी और के साथ खेलते हैं तो एक-दो बार खुद अपनी मर्जी से अपनी चीजें दूसरों को दे देते हैं। लेकिन तीन साल की उम्र तक आते-आते बच्चे दूसरों के साथ चीजें शेयर करना सीख जाते हैं। वैसे भी दो साल के छोटे बच्चे के लिए कोई भी चीज देना मुश्किल होता है। इसलिए इतने छोटे बच्चे को फोर्स ना करें और उसे धीरे-धीरे खेल-खेल में खिलौने दूसरों के साथ शेयर करने के लिए कहें। वहीं चार साल की उम्र वाले बच्चे दूसरों के साथ खासकर अपने दोस्तों के साथ आसानी से अपने खिलौने शेयर करने लगते हैं।

क्यों जरूरी है शेयरिंग की आदत बच्चों को सीखाना ?

समाज में एडजस्ट करने के लिए यह एक जरूरी सोशल स्किल मानी जाती है। तो ये रहे शेयरिंग इस केयरिंग के फायदे जो आपके बच्चे को इमोशनली काफी स्ट्रॉन्ग बनाने में मदद करेंगे-
-लोगों से घुलते-मिलते हैं।
-अच्छे दोस्त बनते हैं।
-टीमवर्क सीखता है।
-घर के बड़ों की इज्जत करना सीखते हैं और उनका मान करते हैं।
-शेयरिंग से विश्वास करना सीखते हैं।
-सहयोग करने की आदत आती है।

इन 8 तरीकों से बच्चों को सीखाएं आदत

आप जितनी छोटी उम्र से बच्चों को शेयरिंग के मंत्र समझाना शुरू करेंगी उतना अच्छा होगा। इन तरीकों से उसके दो साल की उम्र होते ही उसे सीखाना शुरू कर दें-

1) खाने की थाली से करें शुरुआत

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Eat all together

शेयरिंग की आदत खाने की थाली से करें। सब साथ में खाएं और उनके खाने में उनकी फेवरेट चीज थोड़ी ज्यादा रख दें। फिर खाने के दौरान उनकी फेवरेट चीज उन्हें आपके साथ या दादा-दादी के साथ बांटने के लिए कहें। अगर वह मना करे तो उसे समझाएं कि वह यह चीज अपने दादा-दादी के साथ बांटेगा तो उसे यह चीज और मिलेगी या कल भी मिलेगी। इससे उसे अपनी फेवरेट चीज शेयर करने की प्रेरणा मिलेगी और वह यह भी सीखेगी की आप चीजें जितनी ज्यादा बांटोगे उतनी ही उसके पास वापस भी आएगी। इससे उसे दो खुशी मिलेगी। पहली खुशी बांटने के दौरान और दूसरी खुशी पाने वाले का प्यार पाकर मिलेगी।

2) तारीफ करें

बच्चे की हर शेयरिंग के दौरान तारीफ करने की आदत डालें। क्योंकि इस दुनिया में बच्चों को अगर किसी से सबसे अधिक प्यार और तारीफ की चाह होती है तो वह है उनके माता-पिता से। इसलिए हर बार उसकी तारीफ करें। इससे बच्चा अच्छे काम करने के लिए प्रेरित होगा। वह समझेगा कि वह अच्छा काम कर रहा है और बदले में आप उसे और अधिक प्यार कर रही हैं।

3) शेयरिंग की कहानी सुनाएं

बच्चों को मॉरल वाली कहानियां सुनाएं जैसे कि आपको आपके दादा-दादी ने बचपन में शिक्षाप्रद कहानियां सुनाई थी। इसके लिए कई सारी मार्केट में किताबें भी मिलती हैं। उन किताब को बच्चों को पढ़कर सुनाइए। कहानियां सुनकर भी बच्चे प्रेरित होते हैं।

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Tell moral stories to children

4) गेमिंग खेलें

कैंडी क्रश और फौजी खेलने के बजाए कुछ अच्छे गेम बच्चों को खिलाएं। जिसमें वह दूसरों की जान बचाते हैं, दूसरों के साथ अपनी चीजें शेयर करते हैं और हीरो बनते हैं। यह सारे खेल बच्चों को समाज में योगदान करने के तरीके और उनके लाभ पर सोचने के लिए प्रेरित करेंगे और उन्हें अच्छा इंसान बनने में मदद करेंगे। या फिर एक बॉल खरीद के दूसरों के साथ मिलकर खेलने की सलाह हें। यह नहीं कि आउट हो गए तो बॉल लेकर घर आ गए (ऐसा हम में से कई लोगों ने बचपन में खूब किया है)। बच्चों को बॉल के साथ मिल बांटकर खेलना सीखाएं।

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Play games

5)पुरानी चीजें गरीबों को दान दें

घर की पुरानी चीजों की चैरिटी कर या बच्चों के पुराने कपड़े गरीबों में उनके हाथों से ही दान करवा कर शेयरिंग का मजबूत पाठ सिखा सकती हैं। इसके लिए घर के आसपास अगर कोई गरीब बच्चे नहीं हैं तो उन्हें पास के किसी अनाथालय या गरीब बच्चों की बस्ती में ले जाएं और उन्हें गरीब बच्चों को पुरानी चीजें देने के लिए कहें। इस दौरान उनकी फोटो क्लिक करें। इससे उसे हीरो जैसा अहसास होगा साथ ही वह गरीब बच्चों को खुश देख कर भी खुश होगा।

6) ना डालें प्रेशर और ना डराएं

अगर बच्चा किसी के साथ अपनी चीजें बांटने के लिए तैयार नहीं है तो उन्हें ना डांटें और ना ही उन पर ऐसा करने का प्रेशर ही बनाएं। इससे बच्चा जिद पर अड़ जाएगा और शायद वह फिर कभी कोई चीज दूसरों के साथ शेयर ना करें। इसलिए सबसे पहले ऐसा ना करने की वजह जानें। और फिर उसे समझाएं कि वह जितनी चीजें शेयर करेंगा उतनी ही ज्यादा चीजें उसके पास लौटकर किसी और तरीके से वापस आएगी। साथ ही उसे बांटने से सच्ची खुशी मिलेगी।
एक बात हमेशा याद रखें- आप बच्चे को डरा-धमकाकर या मारकर कोई चीज नहीं सिखा सकते हैं। इसलिए उसे समझाएं।

7) घर में बनाएं शेयरिंग का माहौल

घर में शेयरिंग का माहौल बनाएं। आप से भी कोई कुछ मांगने आए तो उसे खाली हाथ ना लौटाएं। क्योंकि बच्चे आपको देखकर और आसपास के माहौल को देखकर ही ज्यादा सीखते हैं। बगल वाली आंटी चीनी मांगने आती है तो उसके हाथों से ही आंटी को चीनी देने के लिए कहें। कोई गरीब दरवाजे पर कुछ मांगने आता है तो उसे ही चावल दान करने के लिए कहें। अगर आपके सास-ससुर आपसे कुछ चीजें मांगते हैं तो उन्हें हंसते हुए दें। दरअसल कई घरों में बुजुर्गों को लेकर मां-बाप का रवैया सही नहीं होता है। अगर आप बुरा बर्ताव अपने बुजुर्गों के साथ करेंगे तो बच्चा भी आपसे यही सीखेगा। इसलिए घर के बुजुर्गों के साथ व्यवहार करने के दौरान विशेष ख्याल रखें। इन छोटी-छोटी आदतों से आपका बच्चा बड़ी-बड़ी बातें सीखेगा।

8) चीजों को दोहराएं

अगर बच्चा कोई चीज समझने में समर्थ नहीं है तो उन्हें बार-बार समझाएं। जैसे शेयरिंग गेम बार-बार खेलें और उनके फायदे बार-बार उनके सामने दोहराएं। अगर बच्चा इसे नहीं भी समझेगा तो भी यह बात उसके दिमाग में फिट हो जाएगी की शेयरिंग एक अच्छी आदत है और उसे इसे हमेशा करना चाहिए।

अपनी चीजों को दूसरों के साथ बांटना बहुत ही मुश्किल काम होता है लेकिन उससे भी ज्यादा यह खुशी देने वाला काम भी है। यह आपके बच्चे को समाज के साथ एडजस्ट होने में मदद करेगा और ऑफिस में एक टीम में काम करने में मदद करेगा। तो आज से ही अपने बच्चे को शेयरिंग की छोटी-छोटी बातें सीखाना शुरू करें।

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