Sharing Lesson: ‘सिंगल चाइल्ड‘ के इस दौर में बच्चे अक्सर अपनी चीजें दूसरों के साथ शेयर करने से चिड़चिड़ा जाते हैं। कई बार दो बच्चे होने पर भी यह परेशानी होती है। जैसे वे अपने खिलौने, कॉपी, किताबें आदि किसी के भी साथ शेयर नहीं करना चाहते। कई बार ऐसा भी होता है कि माता—पिता अगर किसी दूसरे बच्चे को प्यार करें तो ये भी उनके बच्चे को बुरा लगता है। आप चाहे इसे बचपना समझें, लेकिन असलियत में यह गंभीर स्थिति है, जो बच्चे के संपूर्ण विकास पर गहरा नकारात्मक असर डाल सकती है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि आप अपने बच्चों को ‘शेयरिंग’ की आदत डालें। ये आदत उन्हें न सिर्फ सामाजिक तौर पर अच्छा इंसान बनाएगी, बल्कि इससे उन्हें कई व्यक्तिगत और मानसिक लाभ भी होंगे। हालांकि शेयरिंग की आदत बच्चों में खुद ब खुद नहीं आती। आपको इसके संस्कार उन्हें बचपन से ही देने होंगे। शेयरिंग की सीख देना बच्चों को जीवन कौशल सिखाने जैसा है। यह कौशल जीवन के हर पड़ाव पर उनके काम आएगा।
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बच्चों को सिखाएं मजेदार है शेयरिंग
बच्चे कच्ची मिट्टी के जैसे होते हैं, आप उन्हें जिस रूप में ढालेंगे, वे वैसे भी हो जाएंगे। ऐसे में बच्चों को शेयरिंग की आदत बचपन से डालें। इसे सिखाने के लिए आप उनके पीछे न पड़ें। बल्कि उन्हें व्यवहारिक तौर पर ये बताएं कि किसी के साथ अपनी चीजें बांटना बहुत ही मजेदार है। यानी उन्हें खेल-खेल में शेयरिंग की सीख दें। उनमें शेयरिंग को लेकर सकारात्मक दृष्टि विकसित करें। उन्हें टीम में खेलना और एक दूसरे का साथ देना सिखाएं। घर के कामों में बच्चों की मदद लेना शुरू करें। मदद करने पर उनकी तारीफ करें। इससे वे शेयरिंग और केयरिंग दोनों सीखेंगे।
स्पष्ट रूप से शेयरिंग के बारे में बताएं
बच्चों को शेयरिंग सिखाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि माता-पिता खुद शेयरिंग करें। बच्चों को शेयरिंग के महत्व को समझाना चाहिए। उन्हें बताएं कि शेयरिंग करना क्यों अच्छा है। उन्हें शेयरिंग के लिए प्रोत्साहित करें। जब वे शेयरिंग करते हैं, तो उनकी तारीफ करें। बच्चों को शेयरिंग के लिए अवसर प्रदान करें। उन्हें दूसरों के साथ खेलने व काम करने के लिए टास्क दें और उसे पूरा करने के लिए प्रेरित करें। जैसे बच्चे को बताएं कि आप अपने भाई-बहन या दोस्तों के साथ मिलकर खेलेंगे तो आपको ज्यादा मजा आएगा। या फिर उन्हें टाइम टास्क दें और सिखाएं कि आप दूसरों के साथ मिलकर इसे समय पर पूरा करें, नहीं तो आप हार भी सकते हैं।
बच्चों के लिए बनें रोल मॉडल
हर बच्चे के लिए उसके माता-पिता रॉल मॉडल होते हैं। आप जैसा व्यवहार दूसरों के साथ करेंगे, बच्चे भी वहीं सीखेंगे। आप जैसे संस्कार उन्हें देंगे, वो वैसा ही व्यवहार अपनाएं। इसलिए आप उनके सामने उदारता और सहयोग का मॉडल बनें। जैसे खाने की चीजें सबके साथ शेयर करें, टीवी में सबकी पसंद के शो लगाएं, घर के कामों में पार्टनर की मदद करें, सामाजिक कार्यों में सहयोग करें, अपने फ्रेंड सर्कल की मदद के लिए हमेशा तैयार रहें। जब बच्चा बचपन से सहयोग और प्यार का यह माहौल देखेगा, तो वो भी उन्हें ही अपनाएगा।
शेयरिंग करने पर करें तारीफ
अपनी तारीफ सुनना आखिर किसे पसंद नहीं होता, बच्चों के लिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में जब आपका बच्चा दूसरों के साथ कुछ शेयर करे तो आप उसकी तारीफ करें। जैसे, जब वो अपने दोस्तों के साथ खिलौने शेयर करे तो आप उसकी तारीफ करें कि आप तो बहुत अच्छे बच्चे हो, सबके साथ चीजें शेयर करते हो। ऐसे में बच्चा शेयरिंग का महत्व समझेगा। साथ ही आगे भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित होगा।
बच्चों की जरूरत से ज्यादा मदद न करें
पेरेंट्स यही चाहते हैं कि उनके बच्चे को कोई भी परेशानी न हो। इसी चक्कर में वे हर काम में बच्चों का साथ देने लगते हैं। ऐसे में बच्चे को किसी दूसरे की आवश्यकता ही नहीं पड़ती और वह दूसरों का सहयोग लेना या देना सीख ही नहीं पाता। इसलिए यह जरूरी है कि पेरेंट्स एक सीमा तक ही बच्चों की मदद करें। बाकी काम उन्हें दूसरों के सहयोग से खुद करने दें। इससे वे ‘साथ’ का महत्व समझेंगे और खुद शेयरिंग करना सीखेंगे। आगे चलकर यही कौशल उनके पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों लाइफ में काम आएगा।
एक्सपर्ट के अनुसार
सबसे जरूरी तो यह है कि हम बच्चों के साथ कुछ समय बिताए, उनके साथ बात करें। अपनी भावनाओं को ,संस्कारों को कहानियों के माध्यम से शेयर करें। इससे बच्चे में प्रेम और समझ का जन्म होगा। उसने शेयर करना कब सीख लिया है यह आपको पता ही नहीं चलेगा। एकाधिकार की भावना से अहंकार का जन्म होता है, और शेयरिंग करने से प्रेम का।
