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नवरात्र के पहले दिन घर-घर में घटस्थापना करके जौ या जवारे बोए जाते हैं। मिट्टी के बर्तन में इन्हें बोया जाता है। माना जाता है कि ये जवारे जातक के जीवन और घर परिवार में सुख समृद्धि लेकर आते हैं।
Shardiya Navratri Rituals: साल के सबसे बड़े त्योहारों की श्रृंखला की शुरुआत होती है शारदीय नवरात्र से। सनातन धर्म में शारदीय नवरात्र को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। मां दुर्गा की पूजा अर्चना के ये विशेष नौ दिन बेहद खास होते हैं। इसमें मां के नौ रूपों की उपासना की जाती है। नवरात्र के पहले दिन घर-घर में घटस्थापना करके जौ या जवारे बोए जाते हैं। मिट्टी के बर्तन में इन्हें बोया जाता है। माना जाता है कि ये जवारे जातक के जीवन और घर परिवार में सुख समृद्धि लेकर आते हैं। हालांकि जौ या जवारे बोए जाने के पीछे कई अन्य कारण भी हैं, जिन्हें जानना माता के हर भक्त के लिए जरूरी है। आइए जानते हैं कैसे शुरुआत हुई नवरात्र पर जौ बोने की।
इसलिए है जौ महत्वपूर्ण

नवरात्र के प्रथम दिन मिट्टी के कलश में साफ मिट्टी भरकर जौ या जवारे बोए जाते हैं। फिर इसका पूरा विधि विधान से पूजन किया जाता है। नवरात्र के अंतिम दिन उगे हुए जवारों की पूजा की जाती है। कन्या पूजन के समय कन्याओं को भी ये जवारे दिए जाते हैं। इन्हें पूजा में भी रखा जाता है। इसके बाद उन्हें विसर्जित कर दिया जाता है। मान्यता के अनुसार जवारे में मां अन्नपूर्णा का वास होता है। देवी अन्नपूर्णा सुख, समृद्धि और अन्न की देवी हैं। माना जाता है कि जिन घरों में नवरात्र के समय जवारे अच्छे खिलते हैं, उन घरों में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है।
आखिर जवारे या जौ ही क्यों
जवारे या जौ को बो कर कलश स्थापना करने का एक अन्य महत्वपूर्ण कारण भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि की उत्पत्ति के समय सबसे पहली फसल जौ ही थी, जो धरती पर उगी थी। ऐसे में इसे पूर्ण फसल माना जाता है। इतना ही नहीं शास्त्रों में अन्न को ब्रह्म माना गया है। इसलिए नवरात्र के नौ दिनों में जौ का भी पूजन किया जाता है।
भविष्य की संभावनाओं का संकेत
माना जाता है कि नवरात्र में जौ पूजन के कई अन्य मायने भी हैं। इससे भविष्य की कई संभावनाओं का अंदाजा लगाया जाता है। जौ के उगने पर आने वाले समय की वर्षा, फसल और खुशहाली का अनुमान लगाया जाता है। जौ जितने लंबे और घने होंगे, आपके घर में उतनी ही सुख, समृद्धि और शांति होगी। नवरात्र के दूसरे या तीसरे दिन जवारे अंकुरित होना भी शुभ संकेत माना जाता है।
बहुत महत्वपूर्ण है जौ का रंग
इतना ही नहीं जौ का रंग भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। हरे जौ के बीच में सफेद जौ का जोड़ा भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के रूप माने जाते हैं। ऐसे सफेद जौ को बेहद शुभ संकेत माना जाता है। इन्हें हमेशा विधि विधान के साथ पूजा घर में रखा जाता है। वहीं अगर जौ का नीचे का हिस्सा पीला और ऊपर का हिस्सा हरा है तो यह मिश्रित फलदायी माने जाते हैं। यदि जौ ऊपर से लेकर नीचे तक हरे हैं तो इसका अर्थ है कि आने वाले दिन खुशहाली लेकर आएंगे और मां दुर्गा की आप पर कृपा रहेगी।
