Salasar Balaji Temple, Rajasthan
Salasar Balaji Temple, Rajasthan

Overview:

हर कोई यही चाहता है कि उसका आने वाला साल बीते हुए साल से भी अच्छा और बेहतर हो। नए साल में उनके सभी सपने पूरे हों और जिंदगी में खुशहाली आए। यही कारण है कि नए साल की शुरुआत लोग भगवान के दर्शनों के साथ करते हैं।

Rajasthan Famous Mandir: नए साल को लेकर हर किसी की कई उम्मीदें, आशाएं और लक्ष्य होते हैं। हर कोई यही चाहता है कि उसका आने वाला साल बीते हुए साल से भी अच्छा और बेहतर हो। नए साल में उनके सभी सपने पूरे हों और जिंदगी में खुशहाली आए। यही कारण है कि नए साल की शुरुआत लोग भगवान के दर्शनों के साथ करते हैं। अगर आप भी साल 2025 की दमदार शुरुआत करना चाहते हैं तो राजस्थान के 5 चमत्कारी मंदिर अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें।

खाटू श्याम मंदिर

Rajasthan Famous Mandir-नए साल की अच्छी शुरुआत के लिए हर साल लाखों भक्त खाटू श्याम बाबा के दर्शनों के लिए जाते हैं।
Every year lakhs of devotees visit Khatu Shyam Baba for a good start to the new year.

नए साल की अच्छी शुरुआत के लिए हर साल लाखों भक्त खाटू श्याम बाबा के दर्शनों के लिए जाते हैं। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित इस दिव्य मंदिर में जो भी भक्त पूरी श्रद्धा से दर्शनों को जाते हैं, ​उनकी हर मनोकामना पूरी होती है। सर्दियों में मंदिर सुबह 5.30 बजे से दोपहर 1 बजे तक और फिर शाम 4 बजे से 9 बजे तक खुलता है। हालांकि नए साल पर भक्तों की ज्यादा संख्या को देखते हुए मंदिर 24 घंटे भी खुला रखा जाता है।

सालासर बालाजी मंदिर

खाटू श्याम मंदिर से करीब 106 किलोमीटर दूर स्थित है प्रसिद्ध सालासर धाम। यहां विराजे सालासर बालाजी के दर्शनों के लिए देशभर से भक्त आते हैं। माना जाता है कि यहां आए भक्तों को बालाजी कभी खाली हाथ नहीं लौटाते हैं। चूरू जिले में स्थित इस भव्य मंदिर में भक्त सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक दर्शन कर सकते हैं। इस मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही आपको इसकी दिव्यता का एहसास होने लगेगा।

जीण माता मंदिर

अरावली पर्वतमाला में स्थित जीण माता मंदिर अपने आप में अनोखा है। यह मंदिर सालासर धाम से करीब 73 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जीण माता के दर्शनों के लिए हर साल बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। बच्चों के मुंडन से लेकर सवामणि तक, यहां कई आयोजन होते हैं। इस प्राचीन मंदिर के खंभे और उन पर उकेरे गए मंत्र इसके वैभव की कहानी खुद कहते हैं।

शाकंभरी माता मंदिर

जीण माता मंदिर से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर खूबसूरत पहाड़ों के बीच विराजित हैं प्रकृति और जीवन की देवी शाकंभरी माता। चारों ओर हरे-भरे पहाड़ों से घिरा यह भव्य मंदिर सकराय धाम में स्थित है। इस प्राचीन मंदिर में माता के दर्शनों के साथ ही आप प्राचीन शिव मंदिरों के भी दर्शन कर सकते हैं। मान्यता है कि माता अपने भक्तों पर विशेष कृपा बनाकर रखती हैं। यही कारण है कि हर साल लाखों भक्त माता के दर्शनों के लिए आते हैं।

हर्षनाथ मंदिर

आस्था के साथ ही अगर आप प्रकृति और इतिहास को करीब से देखना चाहते हैं तो हर्षनाथ मंदिर के दर्शन आप जरूर करें। दसवीं शताब्दी में बनाया गया यह मंदिर सीकर से करीब 21 किलोमीटर दूर स्थित है। शाकंभरी माता मंदिर से इसकी दूरी करीब 53 किलोमीटर है। यह मंदिर भारतीय वास्तु और स्थापत्य कला का अनोखा उदाहरण है। यहां मिले 973 ई. के शिलालेख के अनुसार भगवान शिव के इस मंदिर का निर्माण चाहमान राजा विग्रहराज प्रथम ने करवाया था। ​राजा विग्रहराज एक शिव भक्त थे। यह मंदिर कई अन्य मंदिरों से घिरा है। हालांकि समय के साथ ये सभी खंडहर हो गए। 1718 में इन सभी खंडहरों का जीर्णोद्धार राव शिवसिंह की ओर से करवाया गया और एक नए मंदिर का निर्माण हुआ। इन मंदिरों की शिल्प और स्थापत्य कला देखते ही बनती है। यहां का हर एक खंभा, हर एक दीवार और उसपर की गई नक्काशी उस समय की स्थापत्य कला का वैभव बताती है।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...