Gentle Parenting
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Gentle Parenting: आज की मॉडर्न परवरिश में एक शब्द तेजी से उभरा है जेंटल पेरेंटिंग। ये सिर्फ एक परवरिश की शैली नहीं, बल्कि बच्चों को इंसान की तरह समझने का नजरिया है। इसमें ना डांट है, ना धमकी, बल्कि है तो सिर्फ सम्मान, संवाद और समझदारी। लेकिन आखिर इसमें ऐसा क्या खास है जो हमारे बुजुर्गों को खटक रहा है?

जेंटल पेरेंटिंग को अगर आम भाषा में समझना चाहे तो परवरिश की ऐसी शैली है जिसमें बच्चों के साथ सहानुभूति, सम्मान, समझदारी और धैर्य के साथ पालन पोषण किया जाता है। जेंटल पेरेंटिंग में बच्चों को डांटने की बजाय उनके भावों को समझने और उनसे संवाद करके समझाने पर ध्यान दिया जाता है। जेंटल पेरेंटिंग चार मुख्य बिंदुओं पर काम करता है।

Gentle Parenting
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सहानुभूति रखना: जेंटल पेरेंटिंग में हम बच्चों की भावनाओं पर काम करते हैं। उसे समझने की कोशिश करते हैं तथा उसे भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस करवाते हैं।

सम्मान देना: बच्चा छोटा है, इसलिए उसकी बातों को इग्नोर ना करें। उनकी बातो को सुने तथा वह किस भावना से अपनी बातों को रख रहा है उसे समझे और उसका सम्मान करें।

बच्चों को समझे: बच्चे के रोने, ज़िद करने के क्या कारण है, उसे समझे। उसे डांटने से उसके व्यवहार में परिवर्तन नहीं हो सकता, ये समझे। बल्कि उसके व्यवहार के पीछे के कारण पर काम करें।

सीमाएं और मार्गदर्शन: बच्चों को डांटकर या डरा कर अनुशासन नहीं सिखाया जा सकता। धैर्य के साथ प्यार से अनुशासन सिखाएं।

समय के साथ हर चीज को बदल लेना सभी के लिए उतना आसान नहीं, खासतौर पर जब, जब हम खुद उस दौर से गुजरे हों। हमारे बुजुर्गों के साथ भी यही है। ऐसा नहीं है कि वह बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहे, लेकिन पूरी तरह नहीं कर पा रहे हैं। आईए जानते हैं वह कौन से डर हैं जेंटल पेरेंटिंग को लेकर जो हमारे बुजुर्गों में है;

अनुशासन: हमारे बुजुर्गों को लगता है कि सख्ती की कमी से उन में अनुशासन की कमी है। बिना सख्ती के बच्चों को अनुशासन नहीं सिखाया जा सकता। शायद ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे बुजुर्गों की परवरिश इसी नियम के साथ हुआ है कि बिना सख्ती के बच्चे बिगड़ जाते हैं। उनके मन की सुनना या करना उन में अनुशासन की कमी को जन्म देता है।

जिम्मेदारी को ना समझ पाना: हमारे बुजुर्गों को लगता है, बच्चों की इस तरह परवरिश करना उन्हें वास्तविक दुनिया के काबिल नहीं बनता है। वह वास्तविक दुनिया में जाकर अपनी जिम्मेदारियां उठाने के काबिल नहीं बन पाते हैं।

ज्यादा आजादी से अनुशासनहीनता: बुजुर्गों को लगता है, अगर बच्चों को ज्यादा आजादी दी जाए या माता-पिता के प्रति उनके मन में डर ना हो तो वह अनुशासित नहीं रहते हैं। वह अपने माता-पिता की बातों को हल्के में लेते हैं।

आईए जानते हैं किस तरह आप बुजुर्गों को जेंटल पेरेंटिंग के बारे में समझ सकते हैं।

बुजुर्गों को समझाएं जेंटल पेरेंटिंग में अनुशासन सिखाया जाता है, बस अनुशासन सीखने के लिए सख्ती की बजाय समझ का उपयोग किया जाता है।

आप बुजुर्गों के अनुभवों को अनदेखा न करें। उसका सम्मान करें। लेकिन उन्हें समझाएं कि हम इस तरह भी बच्चों को समझाने की कोशिश कर सकते हैं। जेंटल पेरेंटिंग से आपके बच्चे में आए सकारात्मक बदलावों के बारे में उन्हें बताएं।

बुजुर्गों के साथ तालमेल बनाएं।आप अपने द्वारा उठाए गए कदम को समझाने के लिए तर्कों का सही उपयोग करें।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...