आपके बच्चों को भी स्कूल या अपने कॉलेज से जुड़ी काफी ज्यादा टेंशन से प्रेशर से गुजरना पड़ता है । कई बार वह अपनी स्कूल और पर्सनल लाइफ को मैनेज करने में काफी असमर्थ हो जाते हैं। जिस कारण खुद को विवश समझ लेते हैं और अंदर से काफी टूट जाते हैं। ऐसा स्कूल और कॉलेज बंद होने के कारण अधिक होता है ।इसलिए आपको अपने बच्चे को अकेले में रोता हुआ देख कर गुस्सा या उन पर टूट कर नहीं पड़ना चाहिए। न ही उन्हें गलत समझना चाहिए। तो आज हम आपको कुछ ऐसे लक्षण बताने वाले हैं जो आपको अपने बच्चे में तब देखने को मिल सकते हैं। जब वह स्ट्रेस से गुजर रहा हो और आपको भी उन्हें इस स्थिति से बाहर निकलने में मदद करनी चाहिए।

पहले जानिए इसके प्रकार

स्ट्रेस (Stress) या तनाव मुख्य रूप से 3 प्रकार की होती है, जो इस प्रकार हैं-

एक्यूट स्ट्रेस– स्ट्रेस के सामान्य रूप या प्रकार को एक्यूट स्ट्रेस (Acute stress) कहा जाता है।

यह मुख्य रूप से किसी काम को करने से पहले होती है, जो किसी बच्चे को सकारात्मक या गंभीर रवैया अपनाने के लिए प्रेरित करती है।

एपिस्डिक एक्यूट स्ट्रेस– इसे एक्यूट स्ट्रेस (Stress) का अगला स्तर कहा जाता है। जब किसी बच्चे को एक्यूट स्ट्रेस बार-बार होता है तो उसे एपिस्डिक एक्यूट स्ट्रेस (episodic acute stress) कहा जाता है।

क्रोनिक स्ट्रेस– जब एक्यूट स्ट्रेस (Stress) दूर न हो और वह लंबे समय तक रहे तो उस स्थिति को मेडिकल भाषा में क्रोनिक स्ट्रेस (chronic stress) कहा जाता है।

यह स्थिति किसी भी शख्स के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है, क्योंकि यह उसे काफी गंभीर बीमारियों जैसे दिल का दौरा पड़ना, डिप्रेशन, कैंसर इत्यादि का शिकार बना सकता

भूख लगने में बदलाव आना: जब किसी का स्ट्रेस लेवल अधिक बढ़ जाता है तो भूख में सबसे पहले बदलाव देखने को मिलते हैं, हो सकता है आपके बच्चे को इमोशनल ईटिंग करने की आदत हो और वह बहुत अधिक खाना खा रहे हों और खास कर जंक फूड या ओवर ईटिंग ही वह करते है। ऐसा भी हो सकता है कि आपका बच्चा बिल्कुल कुछ भी न खा रहा हो तो ऐसा संकेत देख कर उनके हालात के बारे में बात करें और उन्हें समझाए ।

स्कूल न जाने के बहाने बनाना: आपका बच्चा आम तौर पर आपको बोल सकता है कि आज स्कूल में अधिक काम नहीं है और आज की छुट्टी है ताकि वह स्कूल जाने से बच सके। ऐसा वह स्ट्रेस होने के कारण कर सकता है क्योंकि हो सकता है स्कूल में ही उन्हें कोई परेशान कर रहा हो और इस स्थिति से उन्हें बचाने के लिए स्कूल टीचर का नंबर रखें और अगर वह कभी छुट्टी आदि का बहाना बनाते हैं तो उन्हें तुरंत फोन करें और अपने बच्चे की स्थिति के बारे में बताएं।

बच्चों में गुस्सा :बहुत ज्यादा गुस्सा आना बच्चों में तनाव का लक्षण हो सकता है. यह लक्षण काफी डराने वाला है. क्योंकि इससे बच्चे के स्वभाव में अनचाहे परिवर्तन हो सकते हैं. यह गुस्सा आगे चलकर उसके व्यक्तित्व में शामिल हो सकता है और दूसरे लोगों व खुद उसके लिए दिक्कत भरा हो सकता है.

बच्चों में मूड स्विंग्स:तनाव के कारण मूड स्विंग्स होने लगते हैं. मूड स्विंग्स के कारण बच्चे का स्वभाव अचानक बदलने लगता है. कभी वह खुशनुमा नजर आता है, तो कभी वह गुमसुम व उदास नजर आने लगता है. वहीं, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लग सकता है.

सिर दर्द: अगर आपका बच्चा अधिक स्ट्रेस ले रहा है तो आम तौर पर उसे सिर दर्द जैसे लक्षण जरूर देखने को मिलेंगे क्योंकि स्ट्रेस और डिप्रेशन से दिमाग पर अधिक प्रेशर पड़ता है। अपने बच्चे की दिन की गतिविधियों पर नजर रखें ताकि आप यह बात नोटिस कर सकें कि उन्हें किसी अन्य खेल कूद जैसी गतिविधि के कारण सिर दर्द हो रहा है या फिर उनके सिर दर्द का कारण स्ट्रेस है।

बेबी टॉक करना: बच्चे कभी खुद से यह नहीं बताएंगे कि वह स्ट्रेस महसूस कर रहे हैं इसकी बजाए वह अधिक गुस्सा और अधिक चिल्लाना जैसे लक्षण दिखा सकते हैं। इससे आपको उनकी हालत समझ लेनी चाहिए और उनके साथ बच्चों की तरह बात करनी चाहिए ताकि वह आपके सामने अपनी बात रखने में। काफी सुरक्षित महसूस कर सकें और किसी तरह का डर महसूस न कर सकें।

नींद आने में दिक्कत होना :अगर आपके बच्चे का हाल ही में नींद आने का पैटर्न बहुत अधिक बदल गया है तो यह भी स्ट्रेस का ही एक संकेत हो सकता है। आप नोटिस कर सकते हैं कि आपका बच्चा बहुत अधिक सो रहा है या वह पहले के मुकाबले देर से सो रहा है या बिल्कुल ही नहीं सो रहा है। अगर वह स्कूल में सो रहे हैं तो आपको तुरंत कोई न कोई एक्शन लेना चाहिए ताकि आपका बच्चा इस स्थिति से निकल सके।

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में झुंझलाहट तनाव का एक बड़ा संकेत है। इस दौरान कई बच्चों में भावों की कमी और स्वभाव में बदलाव भी देखा जा रहा है। तनाव और घबराहट के कारण हार्मोन और रसायनों में परिवर्तन हो सकता है, जिसका असर शारीरिक तौर पर भी दिखाई देता है। बच्चों के साथ समय बिताएं। उनका भरोसा हासिल करें कि थोड़ी सावधानियों की बदौलत, वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। उनका एक अच्छा सा रूटीन बनाकर उन्हें व्यस्त रखें।

अगर आपका बच्चा स्ट्रेस से परेशान है तो उसकी मदद करने के लिए आपको सबसे पहले अपना घर एक सुरक्षित स्थान बनाना चाहिए और उसे उसकी किसी गलती के लिए जज नहीं करना चाहिए ताकि वह आपको सारी बात बता सके और आप उन्हें खुश करने के लिए कुछ कर सकें।

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