अगर अभिभावक बच्चों पर पढ़ाई के लिए ज्यादा जोर डालते हैं तो अक्सर बच्चों का मन स्कूल और पढ़ाई से हट जाता है। बच्चे स्कूल जाने से भी कतराते हैं। उन्हें स्कूल में फुल टाइम पढ़ाई करना और टीचर द्वारा दिए गए डेली होम वर्क को पूरा करना भी सजा जैसा लगता है। लेकिन अभिभावक यदि चाहें तो बच्चों की पढ़ाई में नीरसता को सरसता में बदल सकते हैं और स्कूल से मिला होम वर्क पूरा करने व टेस्ट की तैयारी करने के लिए शारीरिक व दिमागी रूप से उन्हें तैयार कर सकते हैं। इस तरह वे अपने बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बना सकते हैं। इसके लिए बच्चों के अभिभावकों को इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होगा।

– बच्चे को बचपन से अच्छी आदतें व शिष्टाचार सिखाएं और उनकी दिनचर्या सही तरीके से बनाएं ताकि बच्चा अपना काम खुद ही उचित समय पर करना सीखे। इससे बच्चा समय की कद्र करना सीख जाएगा। एक बात ध्यान में रखें कि बच्चे की पहली टीचर उसकी मां ही होती है। मां ही बच्चे के जीवन की मार्गदर्शिका कहलाती है।

-परिवार द्वारा दिए गए अच्छे संस्कारों की परछाई जीवन के हर कदम पर बच्चों के साथ रहती है और उसके भविष्य को रोशन करती है।

– अपने परिवार के माहौल को तनावमुक्त व शांतिपूर्ण रखें एवं खुद भी टेंशन फ्री रहें। इससे बच्चों के दिमाग पर अच्छा असर पड़ेगा।

-पति-पत्नी व्यक्तिगत नोक-झोंक, आपसी लड़ाई व मारपीट बच्चों के सामने कदापि ना करें, क्योंकि मां-बाप के आपसी रिश्तों के रूप का बुरा असर बच्चों के दिमाग पर और उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है।

– यदि आप किसी खास परेशानी एवं तकलीफ में भी हों तो भी बच्चों के सामने सामान्य तरीके से पेश आएं।

– बच्चों को कभी भी अकेलापन महसूस न होने दें। उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं।

-यदि बच्चा होमवर्क या पढ़ाई करने से पहले अपनी जिद पूरी करवाना चाहता हो तो अवश्य ही उसकी बात को पूरी करने की कोशिश करें।

– यदि बच्चा घर में पढ़ाई ना करना चाह रहा हो, तो उसे डांटें-फटकारें या मारें नहीं बल्कि उसे प्यार से समझा-बुझाकर पढऩे के लिए राजी करें।

-बच्चे को पढ़ाई करवाने से पहले पौष्टिक चीजें बनाकर खिलाएं।

-अभिभावकों को चाहिए कि जब बच्चा होम वर्क करने लगे तो वे भी अपना कुछ टाइम बच्चों के साथ बिताएं।

-यदि बच्चे की पढ़ाई की वजह से हमें अपने घूमने-फिरने, मूवी देखने या शॉपिंग जैसे प्रोग्राम को छोडऩा पड़े तो कर लेना चाहिए।

-जब बच्चा स्कूल की पढ़ाई या होमवर्क पूरा करने में आपकी कोई मदद मांग रहा हो तो उसकी मदद जरूर करें।

-अपने बच्चों के सामने हमेशा किसी दूसरे बच्चे की तारीफ करना छोड़ दें, नहीं तो बच्चे में हीन भावना जन्म लेगी।

-यदि बच्चा अपनी क्लास में पढ़ाई में या टेस्ट में सबसे आगे रहता है तो उसकी प्रशंसा जरूर करें। ऐसा करने से बच्चे के मन में पढ़ाई के प्रति उत्साह जागेगा और बच्चा पढ़ाई में ज्यादा दिलचस्पी लेने लगेगा।

-यदि बच्चा पढ़ाई में कमजोर हो या पढ़ाई से रिलेटेड कोई समस्या हो तो स्कूल में पैरेन्ट्स मीटिंग में जाकर बच्चे की टीचर से उसकी पढ़ाई के विषय में विचार-विमर्श अवश्य करें।

-यदि बच्चा बुरी आदतों का शिकार हो रहा हो तो उसे नजरअंदाज न करें। उसे प्यार से समझाबुझा कर सही रास्ते पर लाएं व बुरी आदतों से उसे
छुटकारा दिलाएं।

-यदि आपके बच्चे की याददाश्त कमजोर हो तो दूध में ब्रेन स्मार्ट पाउडर मिलाकर नियमित रूप से बच्चे को पिलाना शुरू करें ताकि बच्चे का दिमाग तंदुरुस्त हो जाए और वह सारी चीजें याद रख सके और क्लास में हमेशा टॉप करें।

यदि इस तरह हम अभिभावक आज बच्चों के अच्छे सहायक बनेंगे तभी तो हमारे बच्चे कल हमारे बुढ़ापे में हमारे सहायक बनेंगे।