दौड़ते-भागते रीता घर पहुंची। पहले तो ऑफिस में लेट, फिर चार्टर्ड बस छूट जाने का गम। घर पहुंच कर काम निपटाने का खौफ । पति महाशय पहले से पहुंचे हुए थे। देखते ही बोले, इतना लेट, चलो जल्दी से चाय दो। टीवी के सामने पैर फैलाए बैठे अखबार पढ़ रहे थे। चाय देखते ही बोले, क्या खाली चाय पियूं, खाने में तो अभी देर होगी। गुस्सा तो इतना आया कि बस, लेकिन तभी लगा कि शांति में ही भलाई है। 

1-समझाएं की कोशिश करें-
सबसे पहले तो यह जरूरी है कि आप प्यार से उन्हें समझाएं। याद रखें कि हमारे पुरुष प्रधान समाज में ऐसे पति कम नहीं जो देर से घर पहुंचते है और खाना खाकर सीधे बेड पर सोने चले जाते हैं। समझदार पत्नियां अच्छी तरह जानती हैं कि उन्हे घरेलू कार्यों में पति की मदद कैसे लेनी है।बजाय यह आदेश देने के कि बिस्तर लगा दो, प्यार से निवेदन करे कि प्लीज, थोड़ी सी मदद कर दें बिस्तर ठीक कर दें, जिससे बच्चें सो सके। देखिए वह इंकार नहीं करेंगे। घर का कुछ सामान मंगाना हो तो पूछिए कि क्या कार में पेट्रोल है? नहीं तो आप अभी डलवा लें, वरना सुबह ऑफिस के लिए लेट हो जाएंगे।

2-आलोचना से बचें-
यदि वह घर के किसी भी काम में आपका सहयोग कर रहे हैं तो उन्हें सही तरीका बता कर लज्जित न करें, न ही आलोचना करें। चाय बना कर लाने पर तारीफ करें, भले ही झूठी हो। यह न बताएं कि चाय उबल कर नीचे जमीन पर गिर गई या पत्ती कचरे के डिब्बे में नहीं डाली। यदि खामियां निकालेंगी तो आगे से इस सहयोग से भी वंचित रहना होगा।

3-विकल्प दें-
ऐसा नहीं कि जो काम आपने उन्हें करने को कह दिया, वह वही करें। यदि उन्हें चाय बनानी नहीं आती तो कोई दूसरा काम उनसे करा सकती हैं। उन्हें बच्चों की यूनीफॉर्म प्रेस करने या बच्चे के होमवर्क की जिम्मेदारी सौंपे। अधिकतर पुरुषों को बिजली की मरम्मत या घर की देखभाल जैसे काम भी करा सकती हैं। पहले पंद्रह दिन बाहर के कामों की जिम्मेदारी आप निभाएं। बाद के पंद्रह दिन की जिम्मेदारी पति को दें। बाहर के काम पुरुषों को पसंद होते हैं। जिस काम को करने में उनकी रुचि बिलकुल, नहीं उसे कराने से बचें।

4-मिलकर काम करें-
मिल-जुल कर काम करने से न केवल काम आसान होता है बल्कि प्यार भी बढ़ता है। दोनों को एक-दूसरे के करीब रहने का मौका मिलता है। साथ-साथ खरीदारी करने जाएं। आप बरतन साफ करें तो उन्हें पोंछ, लगाने को कहें। आप खाना बना रही हैं तो उनसे टेबल लगाने को कहें। जल्दी ही यह दिनचर्या आप दोनों को अच्छी लगने लगेगी और काम करना व घर चलाना आसान हो जाएगा।

5-असहयोग करें-
कोई भी समझदारी काम नहीं आ रही तो चिंता मत करिए। सीधा सा उपाय है वही करिए जो आपके पति कर रहे हैं। देर से घर जाइए। उनकी तरह व्यवहार करिए। घर जाकर बहुत काम होने की परेशानी बताएं और एक कप चाय की गुजारिश करिए। निश्चित ही देर से आने पर आप अगले दिन की कोई तैयारी नहीं कर पाएंगी। इस बदइंतजामी का असर अगले दिन की झल्लाहट पर नजर आएगा। हां सुबह आराम से उठना न भूलें। मुश्किल जरूर है, लेकिन जैसे स्वास्थ्य लाभ के लिए कड़वी गोली खानी पड़ती है वैसे ही जीवन को सुखमय बनाने के लिए ये उपाय हैं। उनके गुस्सा होने पर धैर्य बनाए रखिए। रोज बाहर से खाना ऑर्डर करना आसान नहीं है। कहीं न कहीं, देर-सबेर आपकी बात समझने के सिवाय उनके पास कोई चारा नहीं रहेगा।

6-थोड़ा समय दें-
धैर्य रखें लेकिन दृढ़ रहें। याद रखें कि रातों-रात कुछ नहीं बदलता, आदतें बदलने में समय तो लगेगा ही। एक्सपर्ट का कहना है कि इस सहयोग की आदत को विवाह के आरंभिक दिनों से ही डाल देना ठीक रहता है। यह भी हो सकता है कि आपके बदलावों से परेशान होकर वह आपकी खुशामद करें या उपहार आदि देकर फुसलाने की कोशिश करें तो बातों में न आइएगा। आपके पसीजते ही सारी कोशिशें नाकाम हो जाएंगी। हार मत मानिए, कोशिश जारी रखिए। इन प्रयासों से जल्दी ही सफलता हाथ लगेगी, जो भविष्य में आपकी गृहस्थी के लिए उपयोगी साबित होगी।