बच्चे को गलती पर डांट तो दिया था लेकिन अच्छे काम पर उसकी तारीफ भी की थी क्या? अगर नहीं की थी तो अब जरूर कीजिए। क्योंकि आपकी डांट से बच्चा अपनी गलती समझे या नहीं लेकिन आपकी तारीफ से वो आगे बढ़ने के बारे में जरूर सोचेगा। एक्सपर्ट मानते हैं कि सभी को अच्छा करने के बाद पीठ थपथपाना अच्छा लगता है। बच्चों के साथ तो ये वाली फीलिंग और भी स्ट्रॉंग होती है। क्योंकि वो सोचने समझने के शुरुआती दौर में होते हैं इसलिए उन पर इन तारीफों का असर सीधा होता है। डांटने से ज्यादा तारीफ बच्चे पर क्यों करती है इतना असर चलिए जान लेते हैं-

आपके व्यवहार से सीखेंगे, दोहराएंगे-

बच्चे पेरेंट्स से सीखते हैं और उसके व्यक्तित्व पर इस सीख का गहरा असर होता है, ये बात तो आप जानती ही होंगी। लेकिन यही तारीफ पाने के लिए वो हरकत को दोबारा दोहराते भी हैं। उसको आपकी तारीफ से मिली खुशी बार-बार महसूस करने का मन करता है और इसके लिए वो हर वो काम करने की कोशिश करता है जो बेहतर हैं और जिसके लिए आप उसकी तारीफ कर सकती हैं।

बुरी आदतें अलविदा-

बार-बार तारीफ महसूस करने की ये जिद बच्चे से हर वो काम करवाती है जो उसके लिए अच्छा है या जो उसको लगता है कि उसके लिए अच्छा रहेगा। वो हर उस काम को बेहतर तरीके से करने की कोशिश करता है जो आपने कभी न कभी करने के लिए कहा था। बच्चा इस तरह से हमेशा अच्छा ही करने के लिए प्रयासरत रहता है। इस तरह से बच्चे की हमेशा अच्छा करते रहने की कोशिश उसे और अच्छा बनाती चलती है।

तारीफ की आदत-

याद रखिए, हमेशा तारीफ पाने की आदत भी बच्चों को पड़ सकती है। मतलब बड़े होने तक वो इसी भुलावे में भी रह सकते हैं कि उन्हें सिर्फ तारीफ मिलेगी। या वो तो हमेशा सबकुछ अच्छा ही करते हैं। जबकि ऐसे एक इंसान के लिए संभव ही नहीं है। हर शख्स में कोई न कोई कमी होती है और उसे बताने वाले लोग भी होते हैं। पर जब सिर्फ अच्छे की अपेक्षा होती है तो फिर बुरा सहन ही नहीं होता है। बच्चे की तारीफ तो करनी है लेकिन उसे सिर्फ अच्छा ही होगा ये अहसास बिलकुल नहीं करना है। मतलब अच्छा करते हुए भी उससे कुछ गलतियां होंगी तो इस वक्त उसे खुश करने के लिए सिर्फ तारीफ नहीं करनी है बल्कि बुरे को बुरा भी कहना है।

तारीफ ऐसे कि मिले सीख-

बच्चे की तारीफ करते हुए भी अगर आप सीख देने का नजरिया रखेंगी तो जरूर ही बच्चे पर इसका असर अच्छा पड़ेगा। जैसे बच्चा दौड़ में आगे निकल गया अपने तारीफ कर दी लेकिन यही बच्चा दौड़ के दौरान गिरे हुए साथी को नहीं उठाता है तो ये गलत भी है। ऐसे में उसको जीतने के लिए शाबाशी तो दीजिए लेकिन इंसानियत की सीख भी जरूर दीजिए।

पेरेंटिंग संबंधी यह लेख आपको कैसा लगा?अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही पेरेंटिंग से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ईमेल करें editor@grehlakshmi.com

ये भी पढ़ें-. नवजात शिशु के साबुन में पीएच संतुलित होना है जरुरी:जाने उसके लाभ और महत्व