Osho Life Lesson: मेरे मन में ओशो के लिए अगाध प्रेम है बुद्ध के बाद वे ही एकमात्र व्यक्ति हैं, जिन्होंने चेतना के अंतिम स्तर महापरिनिर्वाणात्मक स्तर का स्पर्श किया है। उनके साथ जुड़कर मैं स्वयं को धन्य मानता हूं।
मैंने जब से ओशो को पढ़ना शुरू किया, मैं किसी और को पढ़ता ही नहीं, क्योंकि ओशो को पढ़ने का मतलब है, संपूर्ण अस्तित्व की जानकारी प्राप्त करना। राजनीति, शिक्षा, विज्ञान, ध्यान, विवेक, प्रतिष्ठा, अध्यात्म, गांधी, मार्क्स, महावीर, बुद्ध, क्राइस्ट… ऐसा कोई भी विषय नहीं है जिस पर ओशो ने अपने ज्ञान की रोशनी डाली नहीं है।
उन्होंने जो बोला है, जो लिखा है उसे पढ़कर ऐसा लगता है कि विश्व की सारी समस्याओं का हल उन्हीं के चिंतन से हो सकता है, और किसी उपाय से नहीं। धर्म, कला और विज्ञान, इन तीनों का समन्वय जब होता है तभी चेतना के तीनों स्तरों का विकास होता है। जीवन के जितने भी क्षितिज हैं, जितने आयाम हैं उनको ओशो ने स्पर्श किया है। ऐसा चिंतक, ऐसा प्रज्ञा-पुरुष हमारे संसार में दूसरा हुआ नहीं।
ओशो इस शताब्दी के सर्वाधिक चर्चित एवं विवादास्पद व्यक्ति हैं। अमेरिका की जेलों में बिना किसी दोष के, बारह दिनों तक तरह-तरह की यातनाएं भोगने के बाद जब वे वहां से मुक्त हुए तो वे इस युग के सबसे खतरनाक व्यक्ति भी माने जाने लगे। उनके हाथों में न बंदूक थी, न तलवार थी, न वे कोई करिश्मा करते थे, न वे कोई जादू दिखाते थे, भक्तों को न वे अंगूठियां बांटते थे, न भभूति ही देते थे, फिर भी सारे पंडित, सारे औलिए, सारे चर्च, सारे संप्रदाय, सारा संसार और संसार की सारी सरकारें उनसे डरती थीं। वे खतरनाक हैं, इसलिए कि वे मनुष्य को मनुष्य से दूर करने वाली जो भी दीवार है, चाहे वह संप्रदाय की हो, चाहे वह राजनीति की हो, चाहे वह परंपराओं की हो, चाहे वह विचारों की हो, चाहे वह जाति, वर्ग तथा वर्ण की हो, वे उसे गिराकर एक नए मानव समाज की रचना करना चाहते हैं। मनुष्य की आत्मा पर नाम रूप और उपाधि के जितने भी परदे हैं, जितने भी घूंघट हैं वे उन सब को उघाड़ कर हमें हमारे शुद्ध, निर्मल, चेतनरूप का दर्शन कराना चाहते हैं। यानी तरह-तरह के कपड़े पहने हुए हम लोग जो आवरण मात्र रह गए हैं। वे उन्हें हटाकर हमें नग्न करना चाहते हैं।
वे खतरनाक हैं इसलिए भी क्योंकि वे एक ऐसे समष्टिवादी लोक के निर्माण का स्वपन देख रहे हैं जिसका आधार पैसा न होकर प्रेम हो। वे खतरनाक हैं इसलिए कि वे सड़ी-गली रूढ़ियों, दम तोड़ती हुई परंपराओं और झूठे अंधविश्वासों के खिलाफ एक धर्मयुद्ध छेड़ रहे हैं। वे खतरनाक हैं इसलिए कि वे आपसे आपकी मुलाकात कराना चाहते हैं। यही आखिरी काम बड़ा मुश्किल भी है और खतरनाक भी। ओशो का समस्त जीवन यह प्रयत्न रहा है कि मनुष्य की नारकीय यात्रा को किस प्रकार स्वर्गोन्मुख किया जाए।
ओशो की पूरी जीवनशैली, उनका उठना-बैठना, उनका होना इस बात का संदेश है कि सत्य की अभिव्यक्ति सुंदरम् से हो तो वह कहीं अधिक मुखर हो उठता है। यह तो निश्चित ही हमारा सौभाग्य है कि ओशो जैसे व्यक्ति ने इस धरती पर जन्म लिया। ओशो के विचार, ओशो की देशनाएं, ओशो का दर्शन इतना अगाध है- अथाह सागर के समान है कि जिसमें कितनी बार ही आप डुबकी लगाएं तब भी आपको आसानी से रत्ती भर प्राप्त नहीं हो पायेगा।
ओशो को मैं कवियों का कवि मानता हूं। साहित्यकारों का साहित्यकार मानता हूं।
ये शताब्दी ओशो की है। उन्हें अधिक पढ़ा जायेगा, समझा जायेगा। ओशो के जीवन काल में उनका बहुत विरोध हुआ और ये विरोध उन लोगों ने किया जो धर्म के नाम पर पैसा इकठ्ठा करते थे। हम बहुत जगह गये, हरिद्वार गये और हमने देखा कि वहां लोग संत बने बैठे हैं और अपनी आरती उतरवाते हैं इस तरह के लोगों ने उनका विरोध किया। और ये विरोध सही भी था क्योंकि वे अपने समय से बहुत आगे थे। और जो भी अपने समय से आगे चला है या तो उसे अपने समय में सूली लगी क्राइस्ट की तरह या सुकरात की तरह उसे जहर पीना पड़ा या मीरा की तरह उसे विषपान करना पड़ा पर वे ही लोग पहचाने गये। आज ओशो को जितना पढ़ा जा रहा है, जितना सुना जा रहा है और कोई इतना नहीं बिक पा रहा है। बड़े-बड़े संत हैं इस देश में लेकिन हुआ यह बिना पढ़े ही लोगों ने उन पर कमेंट करना शुरू कर दिया।
ओशो कहीं गए नहीं हैं, हमारे बीच में ही किसी न किसी रूप में विद्यमान हैं। और ऐसे महान पुरुष जाया नहीं करते। हमेशा हमारे बीच में ही रहा करते हैं। वे आज भी हमारे बीच में है। मैं उन्हें प्रणाम करता हूं और बार-बार उनको नमन करता हूं।
