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ओशो यानी कभी न खत्म होने वाला 'शो': Osho Biography
Osho Biography

Osho Biography : ओशो एक बहुत बड़ा, कभी न खत्म होने वाला ‘शो’ है, जिसमें सब कुछ समाहित है।
ओशो के ‘ओ’ में पुकार है और ‘शो’ में दर्शन है। अंग्रेजी के ‘शो’ का अर्थ है बहुत विराट, प्रदर्शन, अभिव्यक्ति या लीला।
ओशो एक अंतर विरोधी विचारों के दार्शनिक थे। उनके विचारों में आपको कई बार ऐसा लगेगा कि वहां तो इन्होंने ये कहा था, यहां इन्होंने यह कह दिया। उनको मैं अनुभववादी विचारक मानता हूं। उनके अनुभव में जब जो सत्य जैसा आया उन्होंने कह दिया इसलिए अंतर विरोधी विचार हैं उनके।
ओशो स्वतंत्रता के पक्ष में थे लेकिन उनकी स्वतंत्रता एक व्यवस्थित व अनुशासित स्वच्छंदता थी। वो ऐसी किसी स्वच्छंदता के पक्षधर नहीं थे जो मनुष्य विरोधी हो जाए। यानी आपको अपनी अंगड़ाई लेने का पूरा अधिकार तो है लेकिन वहीं तक जहां तक किसी दूसरे की नाक न टूटे।
मेरी नजर में ओशो एक आचार्य हैं, शिक्षक हैं, उन्होंने अपने अनुभव से सत्य को जाना है। वह एक अनुभववादी दार्शनिक हैं। इतना ही नहीं ओशो बहुत बड़े अध्येयता भी हैं, क्योंकि उन्होंने हर रास्ते का अध्ययन किया।
तर्क ओशो के चिंतन का अर्क था। हमारे यहां दो-ढाई हजार वर्षों में जो सोचा-समझा गया उन सब पर उन्होंने गंभीर, वस्तुवादि अध्ययन किया, शुरू में मुझे ऐसा लगता था जैसे ओशो कोई ब्रह्मïराक्षस हैं, जिसने बहुत ज्यादा ही पढ़ लिया है। जिसको साफ करने के लिए वह संघर्ष कर रहे हैं लेकिन आगे चलकर ओशो के प्रति मेरे विचार भी बदले। मैंने उनका आश्रम देखा उनका कार्य व सारी व्यवस्थाएं देखीं ओर धीरे-धीरे मैं ओशो को पसंद करने लगा। और प्रारंभ में जो मैं उन्हें ‘ब्रह्म राक्षस समझता था फिर मैं उन्हें ‘ब्रह्म गुरु मानने लगा। मेरे लिए फिर वह ब्रह्म राक्षस नहीं रहे ब्रह्मï गुरु हो गए। ओशो ने समय के विपरीत दिशा में चलके ऐसी धारणाएं व्यक्त कीं जो कोई कह नहीं सकता था। जैसे- कोई कह नहीं सकता था कि संभोग और समाधि दोनों एक चीज है।
सेक्स से जोड़कर जो अफवाह या भ्रांति आश्रम के साथ जुड़ी हुई हैं वह एक-दम गलत है। वहां के वास्तुशिल्प की बात स्वयं में ही अनोखी है तथा वनस्पत्तियों में दुलर्भ प्रजाति के फूलों का पाया जाना और हर क्षेत्र के शीर्षस्थ कलाविद को वहां हमने देखा चाहे वो गायक हो या चित्रकार या फिर कोई थैरीपिस्ट या मेडिटेशन से संबंधित व्यक्ति। वो एक स्थान ऐसा था जो कलाप्रेमियों और सम्पन्नों का था। वो लोग चीजों को रागात्मक दृष्टिï से देख कर परिष्कृत करना जानते थे तथा इंसान को और बेहतर इंसान के तौर पर देखना जानते थे।
मैं वहां कई बार अकेले तो कई बार अपनी पत्नी के साथ भी गया हुआ हूं।
ओशो का आश्रम अपने आप में अनूठा है, जहां पश्चिम के प्रबुद्ध आर्किटेक्ट थे, डिजाइनर्स थे, जीवन में चोट खाए हुए इंसान थे। प्रेम में धोखा खाए हुए लोग थे तो ज्ञान की प्यास रखने वाले भी थे। जो लोग अपना जीवन शांति सुकून और आनंद में जीना चाहते थे ऐसे समर्पित लोग भी थे। यहां पर रहने वाले लोग सब एक दूसरे के काम आते हैं परंतु एक-दूसरे में दखल नहीं देते। यहां पर बने ध्यान पिरामिड, नालों पर बना पार्क, सब कुछ अद्भुत है।
पारंपरिक आश्रमों से एक दम भिन्न ओशो का आश्रम विराट तो था ही साथ ही शांति सुकून देने वाला है। यह हमें अपने अंदर जाने का रास्ता देता है। इस पूरे परिसर में आप एक पर्यटक की दृष्टिï के साथ-साथ ध्यान एवं आत्मरूपांतरण की दृष्टि से भी जा सकते हो। यह एक ऊर्जान्वित बुद्ध क्षेत्र है।
जहां तक ओशो के विवादित होने का सवाल है उन्होंने समकालीन जीवन और अतीत के ज्ञान से एक ऐसी भविष्य दृष्टि उत्पन्न की जो पारदर्शी थी। पारदर्शिता नैतिकता को रास नहीं आती इसीलिए वह अपने समय में विवादों से घिर गए। पच नहीं पाए रूढ़ी परंपराओं को, पच नहीं पाए दकियानूसी दिमागों को, पच नहीं पाए अज्ञानी-ज्ञानियों को, पच नहीं पाए ब्राहृ राक्षसों को, लेकिन उनकी विदाई के बाद लोगों ने उन्हें और गहराई से जानना शुरू किया और यह पाया कि वे अपने समय से बहुत आगे के दार्शनिक थे। ओशो एक वैज्ञानिक प्रयोगशाला है, ओशो एक इलेक्ट्रीशियन है जो आपके दिमाग के फ्यूज बल्ब को निकालकर एक नया प्राण बल्ब वहां लगा देना चाहते हैं जिससे उजाला सिर्फ बाहर ही न हो अंदर भी जाए और अंत: प्रेक्षण हो।

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