Overview: देव दिवाली पर मिलेगा देवी-देवताओं के भव्य दर्शन का लाभ, बस ऐसे करें पूजा
देव दिवाली, कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाने वाला पवित्र पर्व, भगवान शिव की विजय का प्रतीक है। इस दिन देवी-देवता पृथ्वी पर दीपावली मनाते हैं।
Dev Diwali Puja: देव दिवाली, जिसे ‘देव दीपावली’ के नाम से भी जाना जाता है, कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाने वाला एक पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है। इस साल 5 नवंबर 2025, बुधवार को मनाई जाने वाली यह तिथि भगवान शिव की त्रिपुरासुर पर विजय का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता पृथ्वी पर उतरकर दीपावली मनाते हैं। यह पर्व विशेष रूप से वाराणसी में गंगा के तट पर भव्य दीपदान और गंगा आरती के लिए प्रसिद्ध है। इस दिन यदि आप सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करते हैं तो आपकी मनोकामना पूरी हो सकती है। तो चलिए जानते हैं इस पवित्र दिन को कैसे पूजा, अनुष्ठानों और परंपराओं के साथ मनाएं ताकि देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हो।
सुबह की रस्में

पवित्र स्नान: देव दिवाली का दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान से शुरू करें। यदि संभव हो, तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, या अपने स्नान के पानी में गंगा जल की कुछ बूंदें मिलाएं। यह शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है।
घर की सफाई: अपने घर, विशेष रूप से पूजा स्थल को अच्छे से साफ करें। स्वच्छ वातावरण देवी-देवताओं की ऊर्जा को आकर्षित करता है। पूजा स्थल को फूलों और रंगोली से सजाएं ताकि सकारात्मकता बढ़े।
भगवान शिव की पूजा: देव दिवाली का विशेष संबंध भगवान शिव से है। शिवलिंग पर जल, दूध, शहद और बेलपत्र चढ़ाएं। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें, जो नकारात्मकता को दूर करता है और खुशहाली देता है।
दीप प्रज्वलन: पूजा के बाद घर में तिल के तेल या घी के दीपक जलाएं। इन्हें पूजा स्थल के आसपास रखें ताकि दिव्य ऊर्जा का प्रवाह हो।
पूजा विधि
कार्तिक पूर्णिमा पूजा: इस दिन भगवान विष्णु और शिव की पूजा विशेष रूप से की जाती है। उन्हें फूल, फल और मिठाई अर्पित किया जाता है।इस दौरान ‘विष्णु सहस्रनाम’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है।
तुलसी पूजा: कार्तिक मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व है। तुलसी के पौधे को दीप और जल अर्पित करें। कई भक्त इस समय तुलसी विवाह भी करते हैं, जो तुलसी और भगवान विष्णु के विवाह का प्रतीक है।
शाम का उत्सव

धर्मितागंगा आरती: यदि आप वाराणसी में हैं या वर्चुअली जुड़ सकते हैं, तो देव दिवाली की शाम गंगा आरती में भाग लें। सैकड़ों दीयों के साथ की जाने वाली यह आरती अत्यंत पुण्यकारी होती है।
दीप प्रज्वलन: शाम को अपने घर को दीयों से सजाएं। दरवाजों, बालकनी और पूजा स्थल पर दीप जलाएं ताकि देवी-देवताओं का स्वागत हो।
नदी में दीपदान: यदि आप किसी नदी के पास रहते हैं, तो पानी में दीप प्रवाहित करें। यह देवताओं को समर्पित एक प्रतीकात्मक भेंट है।
दान करें
– देव दिवाली पर दान का विशेष महत्व है। भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुएं जरूरतमंदों को दान करें। यह कार्य देवी-देवताओं का आशीर्वाद देता है।
– गाय को हरा चारा या मिठाई खिलाना भी शुभ माना जाता है। यह कार्य इस पवित्र दिन पर पुण्य अर्जित करता है।
उपवास या व्रत
कई भक्त देव दिवाली पर दिनभर का उपवास रखते हैं और कार्तिक पूर्णिमा पूजा के बाद चंद्र दर्शन के साथ इसे खोलते हैं। यह उपवास आत्मा को शुद्ध करता है और दिव्य कृपा प्राप्त होती है।
देव दिवाली 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, देव दिवाली 5 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी। कार्तिक पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर की रात से शुरू होकर 5 नवंबर की शाम तक रहेगी। इस दिन प्रदोषकाल का शुभ मुहूर्त शाम 5:15 बजे से 7:50 बजे तक रहेगा, जो दीपदान और पूजा के लिए आदर्श है।
