Two people holding smartphones with digital data flowing between them, symbolizing an online scam or cyber fraud.
e challan scam

Summary: मुंबई के कॉमेडियन के अनुभव से खुलासा, कैसे ‘सरकारी दिखने वाली’ वेबसाइट बना रही है लोगों को शिकार

एक अनजान SMS और छोटा सा लिंक कैसे पढ़े-लिखे, टेक-सेवी लोगों को भी ठगी के बेहद करीब ले आता है। मुंबई के कॉमेडियन के अनुभव ने ई-चालान स्कैम की उस चालाकी को उजागर किया है, जो डर और भरोसे का इस्तेमाल कर लोगों को फंसाती है।

E-Challan Scam: एक अनजान SMS, एक छोटा सा लिंक और कुछ सेकंड का फैसला…आज के डिजिटल दौर में यही काफी है किसी को ठगी का शिकार बनाने के लिए। ट्रैफिक चालान के नाम पर चल रहा ई-चालान स्कैम अब इतना शातिर हो चुका है कि पढ़े-लिखे और टेक-सैवी लोग भी इसके जाल में फंसने से बाल-बाल बच रहे हैं। मुंबई के एक स्टैंड-अप कॉमेडियन के हालिया अनुभव ने इस खतरनाक स्कैम की पूरी परतें खोल दी हैं।

मुंबई के स्टैंड-अप कॉमेडियन श्रीधर वी को एक दिन एक SMS मिला। मैसेज में लिखा था कि उनकी गाड़ी को ट्रैफिक कैमरे ने ओवरस्पीडिंग करते हुए पकड़ा है और ₹500 का ई-चालान पेंडिंग है। नीचे एक लिंक दिया गया था, जिस पर तुरंत भुगतान करने को कहा गया था। मैसेज की भाषा पूरी तरह सरकारी थी और टोन डराने वाला अगर समय पर भुगतान नहीं किया गया तो जुर्माना बढ़ सकता है, लाइसेंस सस्पेंड हो सकता है या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इस स्कैम की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह शक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ता। मैसेज किसी अजीब ईमेल या इंटरनेशनल नंबर से नहीं, बल्कि एक सामान्य मोबाइल नंबर से आया था। न कोई स्पेलिंग मिस्टेक, न ही भाषा में कोई गड़बड़ी। 500 रुपये जैसी छोटी रकम देखकर भी लगा कि “चलो, जल्दी निपटा लेते हैं।”

लिंक पर क्लिक करते ही एक वेबसाइट खुली, जो पहली नजर में भारत सरकार के ई-चालान पोर्टल जैसी लग रही थी। वेबसाइट पर अशोक स्तंभ का चिन्ह, सड़क परिवहन मंत्रालय का नाम, 500 रुपये का पेंडिंग चालान, एक लंबा रेफरेंस नंबर, हरे रंग का “Pay Now” बटन और चेतावनी—भुगतान न करने पर कानूनी कार्रवाई…यह सब कुछ इतना प्रोफेशनल और असली लग रहा था कि कोई भी धोखा खा सकता था।

Fake e-challan SMS scam with payment page and hacker illustration.
Fake e-challan SMS scam with payment page and hacker illustration.

श्रीधर ने बताया कि वे कार्ड डिटेल्स डालने ही वाले थे, लेकिन अचानक उन्होंने वेबसाइट का डोमेन नाम चेक किया। यहीं उन्हें गड़बड़ी दिखी वेबसाइट का पता सरकारी नहीं था, बल्कि उससे मिलता-जुलता एक फर्जी डोमेन था। इसके अलावा, SMS में दिया गया शॉर्ट लिंक असली URL को छिपा रहा था, जिससे धोखाधड़ी पहचानना और मुश्किल हो गया था।

बाद में उन्होंने एक और डरावना सच उजागर किया। फर्जी वेबसाइट पर अगर कोई भी गाड़ी नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर डाला जाए, तो अगला पेज उसी जानकारी को दिखाने लगता है। इससे ऐसा लगता है कि वेबसाइट सरकारी डेटाबेस से जुड़ी है, जबकि असल में वह सिर्फ यूज़र द्वारा डाली गई जानकारी को ही दोबारा दिखा रही होती है। यही भ्रम लोगों को पूरी तरह फंसा देता है।

ई-चालान स्कैम लोगों की मनोवैज्ञानिक कमजोरी पर काम करता है। डर, जल्दबाज़ी और भरोसा इन तीनों का इस्तेमाल ठग बहुत चालाकी से करते हैं कानूनी कार्रवाई का डर, तुरंत भुगतान का दबाव, सरकारी वेबसाइट जैसा लुक, छोटी रकम, जिससे शक न हो।

Hand holding a card that says “Scam Alert.”
Hand holding a card that says “Scam Alert.”

डिजिटल दौर में सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

ई-चालान की जानकारी हमेशा आधिकारिक सरकारी वेबसाइट या ऐप पर ही चेक करें

SMS में आए शॉर्ट या अनजान लिंक पर क्लिक न करें

बिना पुष्टि किए कभी भी कार्ड, बैंक या OTP डिटेल्स न डालें

सरकारी मैसेज आमतौर पर ऑफिशियल सेंडर ID से आते हैं

शक होने पर खुद पोर्टल पर जाकर चालान नंबर डालकर जांच करें

आखिर में ई-चालान स्कैम यह साबित करता है कि अब ठगी सिर्फ तकनीक से नहीं, विश्वास और डर से की जा रही है। अगर कोई मैसेज जरूरत से ज्यादा डराने वाला, जल्दी करने को मजबूर करने वाला या जरूरत से ज्यादा “असली” लगे तो एक पल रुकिए। यही एक पल आपका अकाउंट खाली होने से बचा सकता है।

सोनल शर्मा एक अनुभवी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया, प्रिंट और पीआर में 20 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने दैनिक भास्कर, पत्रिका, नईदुनिया-जागरण, टाइम्स ऑफ इंडिया और द हितवाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया...