डिलीवरी एजेंट बनकर साइबर ठगी, -21- नंबर से कॉल फॉरवर्डिंग कर रहे स्कैमर
डिलीवरी एजेंट के नाम पर साइबर ठग लोगों से -21- जैसे USSD कोड डायल करवा रहे हैं, जिससे फोन की सारी कॉल उनके नंबर पर फॉरवर्ड हो जाती हैं।
Call Forwarding Scam: अगर आपके पास किसी डिलीवरी एजेंट के नाम से कॉल आए और वह आपसे -21- से शुरू होने वाला कोई नंबर डायल करने को कहे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। ऐसा कॉल किसी असली डिलीवरी एजेंट का नहीं, बल्कि साइबर ठग का हो सकता है। एक बार आपने यह कोड डायल कर दिया, तो आपके मोबाइल पर आने वाली सभीकॉल स्कैमर के नंबर पर फॉरवर्ड हो सकती हैं—और यहीं से ठगी की शुरुआत होती है।
सरकार ने जारी की चेतावनी
भारत सरकार ने हाल ही में USSD आधारित कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम को लेकर एक अहम चेतावनी जारी की है। गृह मंत्रालय (MHA) के अंतर्गत आने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने लोगों से अपील की है कि वे इस नए तरीके की ठगी से सावधान रहें। साइबर अपराधी अब खुद को डिलीवरी एजेंट बताकर लोगों को निशाना बना रहे हैं और उनके बैंक खातों तक पहुंच बना रहे हैं।
सरकार ने साफ कहा है कि ऐसे किसी भी ऑनलाइन फ्रॉड की जानकारी तुरंत संबंधित हेल्पलाइन और पोर्टल पर दी जाए, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।
USSD कोड क्या होता है
USSD यानी Unstructured Supplementary Service Data। यह ऐसे कोड होते हैं जिनमें आमतौर पर *, # या – जैसे चिन्ह शामिल होते हैं। इनका इस्तेमाल बिना इंटरनेट के टेलीकॉम सेवाओं से जुड़ी सुविधाएं लेने के लिए किया जाता है—जैसे बैलेंस चेक करना या कॉल फॉरवर्डिंग चालू/बंद करना।
साइबर ठग इसी तकनीक का दुरुपयोग करते हैं। वे पीड़ित को ऐसा USSD कोड डायल करने को कहते हैं, जिससे फोन में कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव हो जाती है।

कैसे देते हैं स्कैम को अंजाम
इस स्कैम में ठग खुद को किसी नामी डिलीवरी सर्विस का एजेंट बताता है। वह कॉल करके कहता है कि आपकी डिलीवरी कन्फर्म करनी है या उसकी तारीख बदलनी है। बातचीत के दौरान वह एक SMS भेजता है या फोन पर ही एक कोड डायल करने को कहता है।
यह कोड आमतौर पर -21- से शुरू होता है और इसके बाद एक मोबाइल नंबर होता है—जो असल में स्कैमर का नंबर होता है। जैसे ही पीड़ित यह कोड डायल करता है, उसके फोन की सारी इनकमिंग कॉल स्कैमर के पास पहुंचने लगती हैं।
कॉल फॉरवर्डिंग के बाद क्या होता है?
कॉल फॉरवर्डिंग चालू होते ही स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है। इसके बाद:
बैंक से आने वाले वेरिफिकेशन कॉल
ट्रांजैक्शन के लिए OTP
WhatsApp, Telegram जैसे ऐप्स के लॉगिन कोड
सब कुछ स्कैमर के फोन पर जाने लगता है। इसका फायदा उठाकर ठग पीड़ित के बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं या उसके सोशल मीडिया और मैसेजिंग अकाउंट को हैक कर लेते हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक पता ही नहीं चलता, जब तक अकाउंट खाली नहीं हो जाता।

बचने के लिए अपनायें ये तरीक़े
सरकार ने इस तरह की ठगी से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बताई हैं:
- किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर -21-, -61-, -67- या किसी भी USSD कोड को कभी डायल न करें।
- SMS, WhatsApp या ईमेल पर आए संदिग्ध डिलीवरी लिंक पर क्लिक न करें।
- कोई भी डिलीवरी से जुड़ी जानकारी सीधे ऑफिशियल ऐप या वेबसाइट से ही जांचें।
- अगर गलती से कॉल फॉरवर्डिंग चालू हो जाए तो क्या करें?
- अगर आपको शक है कि आपके फोन में कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव हो गई है, तो तुरंत अपने मोबाइल से ##002 डायल करें।
- यह कोड सभी तरह की कॉल फॉरवर्डिंग सेवाओं को तुरंत बंद कर देता है।
अगर आप इस तरह के किसी स्कैम का शिकार हो जाते हैं या कोई संदिग्ध गतिविधि देखते हैं, तो देर न करें। तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
