Indian couple sitting at a dining table with a laptop comparing FD vs RD investment options, reviewing bank documents and planning savings.
Indian couple sitting at a dining table with a laptop comparing FD vs RD investment options, reviewing bank documents and planning savings.

Overview: एफडी और आरडी में समझें अंतर

एफडी और आरडी दोनों को बेहतरीन निवेश समझा जाता है। लेकिन इनके बीच के अंतर समझकर ही आप सही ऑप्शन चुन सकते हैं।

FD vs RD: आज के समय में ज्यादा पैसे कमाना ही काफी नहीं होता है, बल्कि जरूरी है कि उस पैसों को सही तरह से संभाला भी जाए। इसलिए, आपको निवेश पर भी उतना ध्यान देना जरूरी है। जब आप अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित तरीके से सही जगह पर लगाते हैं तो इससे ना केवल पैसों में बढ़त होती है, बल्कि रिस्क भी ना के बराबर होता है। ऐसे में अक्सर लोग एफडी या आरडी करना पसंद करते हैं। ये निवेश के ऐसे दो ऑप्शन हैं, जिनमें मार्केट का झंझट नहीं होता और उतार-चढ़ाव ना होने की वजह से पैसा बस बढ़ता रहता है।

हालांकि, जिन लोगों को निवेश की समझ कम होती है, वे अक्सर इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि उन्हें एफडी करनी चाहिए या आरडी। इनमें से आखिर बेहतर कौन है। जहां एफडी में एक साथ पैसा जमा करना होता है, जबकि आरडी में हर महीने थोड़ा-थोड़ा। अब किसे चुनें, ये पूरी तरह आपकी जरूरत, आपकी कमाई और आपकी सेविंग हैबिट पर डिपेंड करता है। तो चलिए आज इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से बात करते हैं-

Two glass jars filled with coins showing FD jar slightly fuller than RD jar, representing higher interest returns in Fixed Deposit compared to Recurring Deposit
FD and RD Difference

एफडी में आप एक बार में बड़ा अमाउंट जमा करते हैं और वो पैसा एक फिक्स्ड समय के लिए लॉक हो जाता है, जैसे 1 साल, 3 साल, 5 साल। इसमें आपको पहले से पता होता है कि कितना ब्याज मिलेगा। वहीं आरडी में आप हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा करते हो, जैसे ₹1000, ₹2000, ₹5000। इसमें भी समय फिक्स होता है, जैसे 1 साल, 2 साल, 5 साल।

अक्सर पैसे जमा करते हुए हम ब्याज का खास ख्याल रखते हैं। आमतौर पर, एफडी में आरडी से थोड़ा ज्यादा ब्याज मिलता है, क्योंकि एफडी में पूरा पैसा शुरू से ही बैंक के पास होता है, जबकि आरडी में पैसा धीरे-धीरे जमा होता है।

हमें पैसों की जरूरत कभी भी पड़ सकती है, इसलिए हमें लिक्विडिटी पर भी फोकस करना होता है। आप एफडी कभी भी तोड़ सकते हो, लेकिन इसमें पेनाल्टी लगती है और ब्याज कम हो सकता है। वहीं, आरडी अगर बीच में बंद की तो ब्याज थोड़ा कम मिलेगा, पर इसमें अत्यधिक नुकसान नहीं होगा।

Indian investors choosing between FD for lump sum investment and RD for monthly saving, highlighting suitability based on financial needs.
What is the better option for whom?

एफडी और आरडी दोनों की निवेश के बेहतर ऑप्शन है, लेकिन आपके लिए क्या बेहतर है, यह आपकी जरूरतों पर निर्भर करता है। मसलन-

अगर आपके पास इकट्ठा पैसा है और आप रिस्क फ्री इनवेस्टमेंट चाहते हैं, जिसमें आपको फिक्स रिटर्न भी मिले तो ऐसे में एफडी की जा सकती है।

वहीं, अगर आप हर महीने थोड़ी रकम बचाना चाहते हो और सेविंग हैबिट बनाना चाहते हो, तो ऐसे में आरडी की जा सकती है। किसी गोल बेस्ड सेविंग जैसे वेकेशन ट्रिप, शादी या फीस आदि के लिए आरडी का ऑप्शन चुनें।

मैं मिताली जैन, स्वतंत्र लेखिका हूं और मुझे 16 वर्षों से लेखन में सक्रिय हूं। मुझे डिजिटल मीडिया में 9 साल से अधिक का एक्सपीरियंस है। मैं हेल्थ,फिटनेस, ब्यूटी स्किन केयर, किचन, लाइफस्टाइल आदि विषयों पर लिखती हूं। मेरे लेख कई प्रतिष्ठित...