कामाख्या देवी मंदिर में इस अनोखे प्रसाद के लिए उमड़ती हैं भीड़, इन 3 दिनों तक मर्दों का जाना है मना: Kamakhya Devi Mandir
Kamakhya Devi Mandir

Kamakhya Devi Mandir: भारत एक ऐसा देश है जहां करोड़ों की संख्या में मंदिर है। हर एक मंदिर की अपनी मान्यताएं और विशेषताएं है। इतना ही नहीं हर मंदिर के पीछे कुछ ना कुछ रहस्य जरूर छुपा होता है। उन्ही मंदिरों में से एक है कामाख्या देवी मंदिर। कामाख्या देवी मंदिर एक प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थल है जो भारत के असम राज्य में स्थित है। यह स्थल मां कामाख्या देवी को समर्पित है, जिन्हें योनि शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह मंदिर असम के गुवाहाटी शहर से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर नीलांचल पर्वत में स्थित है। माता कामाख्या को समर्पित कामाख्या देवी मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। इस मंदिर में ऐसी कई रोचक घटनाएं घटित हुई है, जिन्हें सुनने के बाद हर कोई दंग रह जाता है। कामाख्या माता देवी मंदिर में किसी प्रकार की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि मूर्ति की जगह एक योनि कुंड स्थित है, जो हमेशा फूलों से ढका रहता है।

Also read : भारत के 11 चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिरों के बारे में जानिए: Mysterious Temples in India

कैसे हुई कामाख्या माता मंदिर की स्थापना?

पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि जब माता सती के पिता राजा दक्ष ने एक यज्ञ किया था और उन्होंने इस यज्ञ में सती के पति यानी भगवान शिव को नहीं बुलाया था। इस बात का देवी सती को बहुत बुरा लगा और उन्होंने इसे अपने पति के अपमान समझा। उनसे अपने पति का अपमान सहन नहीं हुआ इसलिए उन्होंने अग्निकुंड में कूदकर आत्महत्या कर ली।

यह सब सुनने के बाद शिवजी ने क्रोधित होकर अपनी तीसरी आंख खोल ली। उन्होंने सती का शव उठाया और तांडव किया, जिससे चारों ओर हाहाकार मच गया। शिवजी का गुस्सा शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शव के 52 टुकड़े किए, जो अलग-अलग जगह पर जाकर गिरे। जिन जिन जगहों पर यह टुकड़े गिरे उन जगहों को शक्तिपीठों की स्थापना हुई। ऐसा कहा जाता है कि इन 52 टुकड़ों में से नीलांचल पर्वत पर माता की योनि और गर्भ गिरा था। जिस वजह से यहां कामाख्या देवी शक्तिपीठ की स्थापना हुई।

कामाख्या माता मंदिर में मिलता है ये अनोखा प्रसाद

कामाख्या मंदिर में देवी सती की योनि और गर्भ गिरा था इसलिए ऐसा कहा जाता है कि जून के महीने में यहां से रक्त का प्रभाव होता है। जिस वजह से ब्रह्मपुत्र नदी पूरी लाल हो जाती है। जून के महीने में यहां अंबुवाची पर्व मनाया जाता है। इस पर्व के दौरान यहां मेला लगता है। देश के अलग-अलग कोनों से लोग यहां कामाख्या माता मंदिर के दर्शन करने और मेले का आनंद लेने के लिए आते हैं।

मंदिर में देवी की अनुमानित योनि के पास पंडित जी नया साफ सुथरा कपड़ा रखते हैं। जो मासिक धर्म के दौरान खून से लथपथ हो जाता है। फिर उसी लथपथ कपड़े को प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है। इस अनोखे प्रसाद को लेकर ऐसा कहा गया है की मां के रक्त से भीगा हुआ कपड़ा प्रसाद में मिलना किस्मत चमकाने जैसा है, भाग्यशाली लोगों को ही प्रसाद के रूप में यह कपड़ा नसीब होता है।

इन तीनों दिनों तक मर्दों का जाना है माना

Kamakhya Devi Mandir
Men are supposed to go for these three days

जून में अंबावाची पर्व मनाया जाता है। 22 जून से 25 जून के बीच मंदिर के कपाट हमेशा बंद रहते हैं। क्योंकि इन दिनों में ब्रह्मपुत्र नदी का जल लाल रहता है। इन तीनों दिनों के लिए पुरुषों को मंदिर में प्रवेश करने से मना किया जाता है। इन तीनों दिनों के बाद 26 जून को मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं और सुबह से ही दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है। दर्शन के बाद भक्तों को अनोखा प्रसाद बांटा जाता है। इन तीनों दिनों में देवी सती के पास साफ, स्वच्छ सफेद कपड़ा रखा जाता है, 3 दिन में वह सफेद कपड़ा लाल हो जाता है। जो प्रसाद के रूप में 26 जून के दिन भक्तों को बांटा जाता है।

मैं आयुषी जैन हूं, एक अनुभवी कंटेंट राइटर, जिसने बीते 6 वर्षों में मीडिया इंडस्ट्री के हर पहलू को करीब से जाना और लिखा है। मैंने एम.ए. इन एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया है, और तभी से मेरी कलम ने वेब स्टोरीज़, ब्रांड...