Importance of Chakras: पंचतत्त्वों से बने मनुष्य के शरीर में कई तरह की नाड़िया हैं जो विभिन्न प्रकार के चक्रों से सक्रिय होती है। ये चक्र व्यक्ति के शरीर को प्रकृति के अनुसार ढलने में मदद करते हैं। व्यक्ति के सोचने समझने, तर्क वितर्क करने, ध्यान लगाने जैसी सभी क्रियाएं चक्रों के द्वारा ही पूरी की जाती है। मनुष्य के शरीर में बहुत सारे चक्र पाए जाते हैं जिनमें से 114 चक्र महत्वपूर्ण है, इन सभी 114 चक्रों में से 7 ऐसे चक्र भी है जिनमें संतुलन बनाए रखना व्यक्ति के जीवन के लिए बहुत ही आवश्यक है। ये सातों चक्र व्यक्ति के जीवन के दैनिक कार्यों से जुड़े होते हैं। एक चक्र से दूसरे चक्र तक ऊर्जा एक तरंग के रूप में पहुंचती है। आज इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे कि चक्र क्या है और व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करने वाले 7 चक्र कौन कौन से हैं।
नाड़ियों का संगम स्थल है चक्र

विद्वानों के अनुसार, हमारे शरीर में विभिन्न प्रकार की नाड़ियां पाई जाती हैं जो व्यक्ति के शरीर में रक्त के प्रवाह को सरल बनाती है। ये सभी नाड़ियां शरीर में किसी न किसी स्थान पर जरूर मिलती है जिसे नाड़ियों का संगम स्थान कहा जाता है और इस संगम स्थान को ही ‘चक्र’ कहते हैं। चक्र का अर्थ है पहिए जैसी गोलाकार स्थिति लेकिन शरीर में बनने वाले चक्र गोल नहीं होते बल्कि त्रिकोण होते हैं। लेकिन शरीर द्वारा की जाने वाली क्रियाओं के संकेत को शरीर में एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की गति देने के कारण इन्हें चक्र कहा कहा जाता है।
व्यक्ति के शरीर के सात मुख्य चक्र

हमारे शरीर में मुख्य रूप से सात चक्र प्रभावी रूप से सक्रिय रहते हैं। ये सात चक्र हैं मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुरक, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्रार चक्र। ये सभी चक्र मिलकर कार्य करते हैं। सबसे पहले आता है मूलाधार चक्र जो व्यक्ति के गुदा और जनेंद्रिय के बीच होता है| दूसरा चक्र है स्वाधिष्ठान चक्र, यह चक्र जनेंद्रीय के ऊपर स्थित होता है। तीसरा चक्र है मणिपुरम चक्र जो नाभि के नीचे रहता है। अनाहत चक्र व्यक्ति के सीने में फेफड़ों की पसलियों के मिलने वाली जगह के नीचे होता है।
विशुद्ध चक्र व्यक्ति के गले में नीचे की ओर स्थित छोटे से गड्डे में मिलता है। व्यक्ति की आंखों की दोनो भौंहों के बीच में आज्ञा चक्र स्थित होता है जो व्यक्ति को एकाग्रता प्रदान करता है। सहस्त्रार चक्र सबसे महत्वपूर्ण चक्र है, इसे ब्रह्म रंध्र के नाम से भी जानते है। छोटे बच्चों के सिर की एक जगह हमेशा हिलती हुई रहती है और ये जगह बहुत नाजुक भी होती है। यहीं पर व्यक्ति का सहस्त्रार चक्र होता है।
सातों चक्रों का महत्व

शरीर के सातों चक्रों का अपना विशेष महत्व है। यदि हमारी सारी ऊर्जा मूलाधार चक्र में समाहित होगी तो हमें भोजन और नींद की ज्यादा इच्छा होगी। मूलाधार चक्र भोजन और नींद से जुड़ा हुआ है। यदि कोई व्यक्ति ध्यान आदि लगाकर अपने मूलाधार चक्र को चेतन अवस्था में ले आता है तो व्यक्ति को भोजन और नींद की लालसा से मुक्ति मिल जाती है। स्वाधिष्ठान चक्र व्यक्ति के भौतिक सुखों से जुड़ा है। स्वाधिष्ठान चक्र में संतुलन होने पर व्यक्ति का ध्यान भौतिक सुखों पर नहीं जाता।
मणिपुराम चक्र में ऊर्जा के सक्रिय होने पर व्यक्ति हर कार्य के प्रति समर्पित रहता है, और हर कार्य की जिम्मेदारी लेता है। अनाहत चक्र के सक्रिय होने पर व्यक्ति कलात्मक कार्यों में रुचि रखता है। विशुद्घि चक्र व्यक्ति को शारीरिक बल देता है। आज्ञा चक्र व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता को बढ़ाता है। व्यक्ति के मन को शांति मिलती है। सहस्त्रार चक्र में ऊर्जा के कारण व्यक्ति सांसारिक जीवन का मोह छोड़कर परम आनंद की अनुभूति करने लगता है।
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