Our health depends on the balance of the 7 chakras of the body
Our health depends on the balance of the 7 chakras of the body

7 Chakras and Health Balance: मनुष्य को शारीरिक और मानसिक भावनात्मक रूप से स्वस्थ रखने के लिए शरीर में मौजूद सात चक्र अहम्भू मिका निभाते हैं, जिनका पुरातन हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म में वर्णन किया गया है, जिन्हें आज योग साधना के जरिये देश-विदेश में जाना जाता है।

वास्तव में ये चक्र हमारे शरीर के उर्जा-केंद्र हैं जो शरीर के विभिन्न अंगों और उनके आसपास की तंत्रिकाओं से जुड़े होते हैं। इन चक्रों के माध्यम से ऊर्जा का प्रवाह निरंतर होता रहता है। ऊर्जा का यह प्रवाह जब तक संतुलित तरीके से होता है, तब तक हमारा शरीर तंदरुस्त रहता है। लेकिन किसी भी
तरह की शारीरिक या मानसिक समस्या होने का असर इन चक्रों या ऊर्जा-केंद्र पर भी पड़ता है। शरीर में ऊर्जा का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है, शरीर के विभिन्न अंगों की कार्यक्षमता गड़बड़ा जाती है और हमें कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में योग की चक्र-हीलिंग थेरेपी से इन चक्रों और ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित किया जाता है जिसके लिए व्यक्ति को नैचरोपैथी फिजीशियन से मदद लेनी पड़ती है। लिहाजा हमें शरीर में मौजूद 7 चक्रों के बारे में जानकारी जरूर होनी चाहिए ताकि इन्हें संतुलित रखकर समस्याओं के निराकरण में मदद मिल सके। हमारे शरीर में मूलत: 7 चक्र होते हैं जिनकी शुरुआत हमारी रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से से होती है और
सिर या सहस्रार चक्र (सिर के शीर्ष पर स्थित है) तक जाते हैं।

मूलाधार चक्र: रीढ की हड्डी के सबसे निचले रूट पर होता है। यहां से हमारे शरीर में ऊर्जा-प्रवाह की शुरुआत होती है। भावनात्मक रूप से देखें तो इस चक्र पर आपके पारिवारिक संबंध और दृढ़ता का
बहुत असर पड़ता है। अगर आपके परिवार में संबंध अच्छे नहीं हैं, तो चक्र का ऊर्जाप्रवाह गड़बड़ा जाता है। कभी-कभी मूलाधार चक्र में असंतुलन पीढ़ी दर पीढ़ी भी चलता है। अगर कोई खंडित परिवार,
आपसी संबंध में दरार हो, या किसी बात को लेकर मनमुटाव हो, तो इसका असर आगे आने वाली पीढ़ी पर पड़ता है। इस चक्र में असंतुलन होने से त्वचा संबंधी समस्याएं ज्यादा होती हैं, ऑटो इम्यून
डिसऑर्डर ज्यादा होते हैं। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति खुद को असुरक्षित महसूस करता है या स्वयं निर्णय लेने में सक्षम नहीं है। इससे यह पता चलता है कि उसका मूलाधार चक्र अस्थिर है।

स्वाधिष्ठान चक्र: यह हमारी नाभि से 2-4 उंगली नीचे होता है। यह चक्र व्यक्ति को भावनात्मक रूप से जुड़ने में मदद करता है। चक्र का संतुलन व्यक्ति के पारस्परिक संबंधों और उसकी खुशी पर
निर्भर करता है। स्वाधिष्ठान चक्र में असंतुलन होने पर नकारात्मकता आने लगती है जिसका असर उसके स्वभाव पर पड़ता है। बात-बात पर गुस्सा आना, असंतुष्ट रहना, छोटी-छोटी बात पर भावुक होना जैसी समस्याएं होने लगती हैं। जिन पर ध्यान न दिए जाने पर व्यक्ति में हार्मोनल समस्याएं, गर्भाशय या अंडाशय में गड़बड़ी, महिलाओं में बांझपन, पुरुषों में नपुंसकता जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

मनिपुर चक्र: यह नाभि और फेफड़ों की पसलियों के बीच मौजूद है। चयापचय और पाचन तंत्र से संबंधित है और शरीर के लिए खाद्य पदार्थों को ऊर्जा में रूपांतरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। व्यक्ति किस तरह का आहार लेता है, इसका असर चक्र पर पड़ता है। मनिपुर चक्र के समुचित ऊर्जा-प्रवाह से व्यक्ति स्वस्थ और आत्मविश्वास से भरपूर महसूस करता है। आमतौर पर अस्वास्थ्यप्रद खानपान की आदतों की वजह से इस चक्र में असंतुलन आता है जिसका असर व्यक्ति की ‘गट हेल्थ’ यानी आंत संबंधित समस्या पर पड़ता है। व्यक्ति को एसिडिटी, अपच, लिवर, गॉल ब्लैडर, वजन न बढ़ पाने जैसी समस्याएं आती हैं। इसके साथ ही व्यक्ति में आत्मविश्वास कम होता है। उसे अपनी योग्यता पर भरोसा नहीं होता, किसी भी काम को करते समय उनके मन में काम
ठीक तरह न हो पाने की दुविधा रहती है।

अनाहता चक्र: यह चक्र सीने के बीच में हृदय के साथ होता है। यह व्यक्ति की जटिल भावनाएं, करुणा, सहृदयता, समर्पित प्रेम, संतुलन, समर्पण, अस्वीकृति, कल्याण जैसे भावों को नियंत्रित
करता है। अगर व्यक्ति का यह चक्र संतुलित होता है, तो वह व्यक्ति पोजिटिव विचारों वाला, दयालु और शांत स्वभाव का, दूसरों की मदद करने वाला, ध्यान रखने वाला होता है।
अनाहता चक्र के असंतुलित होने पर व्यक्ति में ऐसी समस्याएं देखने को मिलती हैं- नकारात्मक सोच, व्याकुलता, तनावग्रस्त रहना, मूड स्विंग होना, बहुत ज्यादा गुस्सा आना, आत्मकेंद्रित होना, दूसरे पर भरोसा न करना, किसी की मदद न करना।

विशुद्ध चक्र: यह चक्र गलग्रंथि, जो गले में होता है। यह चक्र संवाद करने और खुद को मौखिक रूप से व्यक्त करने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही गलग्रंथि से थायरॉयड हार्मोन का स्राव भी होता है जो व्यक्ति के विकास और परिपक्वता में सहायक होता है। संतुलित चक्र वाले व्यक्ति की बोलने की क्षमता, अभिव्यक्ति का तरीका, कम्यूनिकेशन स्किल अच्छी होती है। जबकि चक्र के असंतुलित होने पर व्यक्ति अपने विचारों की अभिव्यक्ति नहीं कर पाते, ठीक से बोल नहीं पाते, ज्यादातर चुप रहते हैं। इसके असंतुलित होने पर थायरॉयड या फिर गले से संबंधित
समस्याएं होने लगती हैं।

आज्ञा चक्र: भोंहों के बीच वाले बिंदु पर होता है जिसे शिव जी की तीसरी आंख के रूप में भी जाना जाता है। यह चक्र हमारी बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास में योगदान देता है। जिन व्यक्तियों के शरीर में यह चक्र सक्रिय या प्रज्वलित होता है। इस चक्र के माध्यम से व्यक्ति वर्तमान कर्मों के बारे में ही नहीं, अपने पूर्व कर्मों के बारे में भी जान सकता है। अपनी एकाग्रता की क्षमता को बढ़ा सकता है। बिगड़ी हुई जीवनशैली का आज्ञा चक्र पर बहुत प्रभाव होता है। इसमें असंतुलन आने पर व्यक्ति को कई तरह की मनोवैज्ञानिक समस्याएं होने के साथ-साथ सिर दर्द, आंखों में दर्द, मूर्छा आना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

सहस्रार चक्र: सहस्रार को आमतौर पर शुद्ध चेतना का चक्र माना जाता है। यह मस्तक के ठीक बीच में ऊपर की ओर स्थित होता है। यह मस्तक के ठीक बीच में हमारे सिर के ऊपर या क्राउन ऑफ दे हेड स्थित होता है। वास्तव में यह हमारे शरीर के बाहर होता है, आध्यात्मिक पराकाष्ठा होने पर ही व्यक्ति इस चक्र तक पहुंच पाता है। इसमें ऊर्जाप्रवाह का स्तर उच्च स्तर का होता है। व्यक्ति की बुद्धिमत्ता, ज्ञान का पता चलता है ऊर्जा स्तर उच्च स्तर पर होता है यानी इस चक्र में संतुलन होने पर व्यक्ति अपने ईश्वर से सबसे ज्यादा जुड़ा होता है। इस चक्र में असंतुलन होने पर पूरे शरीर में गंभीर समस्याएं होती हैं। व्यक्ति बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस करता है, कई तरह की मानसिक समस्याएं रहती हैं। (नैचरोपैथ डॉ. अंजलि शर्मा से बातचीत पर आधारित)

7 Chakras and Health Balance
Our health depends on the balance of the 7 chakras of the body

व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी उपरोक्त समस्याएं हो, तो चक्र-हीलिंग एक्सपर्ट या नेचुरोपैथी फिजीशियन से संपर्क करना चाहिए। असंतुलन को ठीक करने के लिए विशेषज्ञ सबसे पहले व्यक्ति को होने वाली शारीरिक या भावनात्मक समस्याओं का पता लगाते हैं। इससे यह पता चल जाता है कि व्यक्ति को कौन-से चक्र में समस्या है। उसी के मुताबिक उन्हें समुचित चक्र-हीलिंग थेरेपी दी जाती है। चक्र को संतुलित या स्थिर बनाने के लिए ऊर्जा-प्रवाह में संतुलन लाना जरूरी है। इसके लिए व्यक्ति को नियमित रूप से मेडिटेशन, योगासन कराए जाते हैं। हर चक्र को बैलेंस करने के लिए अलग-अलग योगासन कराए जाते हैं। कम से कम 10 मिनट डीप ब्रीदिंग कराई जाती है। उसके बाद नाड़ी शोधन, अनुलोम-विलोम जैसे संतुलित प्राणायाम कराए जाते हैं। व्यक्ति को 3 तरह की ब्रीदिंग (एब्डोनोलम ब्रीदिंग, चेस्ट ब्रीदिंग, अपर थायराइटिक या शोल्डर ब्रीदिंग) के साथ मिलाकर
मेडिटेशन कराया जाता है।
व्यक्ति में आत्मविश्वास लाना या एनर्जी में संतुलन लाना जरूरी है। क्रिएटिविटी को बढ़ावा देकर, लॉफ्टर क्लास जाइन करके जैसी एक्टिविटी से व्यक्ति को नकारात्मक भावों को दूर करके
सकारात्मक विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।