Strong Women Story: कुछ महिलाएं सिर्फ सपने नहीं देखतीं, बल्कि उन्हें साकार करने की ताकत भी रखती हैं। ये वे नाम हैं जिन्होंने अपने जज्बे, मेहनत और लगन से नई ऊंचाइयां हासिल कीं और समाज में बदलाव लाने का संकल्प लिया। चाहे टेक्नोलॉजी हो, चिकित्सा, उद्यमिता या कला इन महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और दूसरों के लिए प्रेरणा बन गईं।
टेक्नोलॉजी से सशक्तिकरण की मिसाल
‘अगर सपने बड़े हैं, तो उन्हें साकार करने का जज्बा भी उतना ही बड़ा होना चाहिए। यही सोच चैत्रा को दुनिया भर में डिजिटल समानता और आर्थिक समृद्धि के लिए एक सशक्त आवाज बनाती है। वे सिर्फ एक बिजनेस लीडर नहीं, बल्कि एक मिशन की वाहक हैं, जो समाज के हर कोने तक डिजिटल एक्सेस को पहुंचाने के लिए समर्पित हैं।वे ‘मिलह’ की सह-संस्थापक और सीएमओ हैं, जहां वे छोटे और बड़े व्यवसायों को क्लाउड टेक्नोलॉजी के जरिए आधुनिक बनाने का काम कर रही हैं। लेकिन उनकी दृष्टि इससे भी आगे की है। वुमम इन
क्लाउ की सह-संस्थापक और अध्यक्ष के रूप में, वे महिला टेक उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 1 बिलियन डॉलर से अधिक का प्रभाव पैदा करने का लक्ष्य रखती हैं।
चैत्रा का प्रभाव केवल एक कंपनी या देश तक सीमित नहीं है। वे माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, एसेंचर जैसी वैश्विक कंपनियों और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर डिजिटल अवसरों को हर स्तर पर बढ़ावा दे रही हैं। हाल ही में उन्होंने 17 वैश्विक संगठनों के साथ मिलकर 100 मिलियन डॉलर की ग्लोबल पार्टनरशिप तैयार की है, जो महिलाओं के लिए नए द्वार खोलेगी और डिजिटल दुनिया में उनका योगदान सुनिश्चित करेगी। चैत्रा ने माइक्रोसॉफ्ट में कई वर्षों तक कार्य किया और ग्लोबल सेल्स और मार्केटिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे सिर्फ एक बिजनेस लीडर ही नहीं, बल्कि एक लेखिका, पेटेंट धारक, टेडएक्स और संयुक्त राष्ट्र वक्ता
भी हैं। उनके प्रभाव को पहचानते हुए उन्हें टॉप 100 स्मॉल बिजनेस इन्फ्लुएंसर का सम्मान दिया गया।
चैत्रा वेदुल्लापल्ली महिलाओं, उद्यमियों और टेक्नोलॉजी प्रेमियों के लिए एक मिसाल हैं, जो यह साबित करती हैं कि जब हौसला, विजन और कड़ी मेहनत एक साथ मिलते हैं, तो कोई भी सपना असंभव नहीं रहता।
चैत्रा वेदुल्लापल्ली
(महिला उद्यमी)
खेल चिकित्सा में महत्वपूर्ण योगदान

नागपुर की डॉ. सोनाली पांडे ने अपनी मेहनत और काबिलियत से ऑस्ट्रेलियाई बधिर और कम
सुनने वाले क्रिेकेट टीम की टीम डॉक्टर बनने का गौरव हासिल किया है।
टीम ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक उच्च तीव्रता वाली टी-20 त्रिकोणीय श्रृंखला में भाग लिया।
ऑर्थोपेडिक सर्जनों के एक प्रतिष्ठित परिवार से आने वाली डॉ. पांडे ने खेल और व्यायाम चिकित्सा में खुद का रास्ता बनाया है। वह एक ऑर्थोपेडिक सर्जन और खेल चिकित्सा विशेषज्ञ हैं और फिलहाल डाॢवन
में अपनी सेवाएं दे रही हैं। खिलाड़ियों के लिए उनकी भूमिका बहुत खास है। मैच के दौरान खिलाड़ियों को अपने हियरिंग एड या कॉकलियर इम्ह्रश्वलांट हटाने पड़ते हैं, जिससे टकराने और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में, डॉ. पांडे की विशेषज्ञता से खिलाड़ियों को सुरक्षित रखने और चोट से उबर ने में मदद मिलती है। आमतौर पर क्रिकेट में खिलाड़ी मौखिक संकेतों से बचाव कर सकते हैं, लेकिन बधिर खिलाड़ियों को केवल आंखों के इशारों पर निर्भर रहना पड़ता है।
तीन मास्टर डिग्री धारक डॉ. पांडे ने क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन की पढ़ाई की है और वर्तमान में ऑस्ट्रेलियन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट एंड एक्सरसाइज फिजिशियंस से फेलोशिप प्राप्त कर रही हैं।
डॉ. सोनाली पांडे का सफर खेल चिकित्सा में नई ऊंचाइयों को छूने वाला है। उनकी विशेषज्ञता न केवल खिलाड़ियों की चोटों के इलाज में कारगर है, बल्कि उनके पुनर्वास और सुरक्षा को सुनिश्चित करने में भी अहम
भूमिका निभाती है। बधिर क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए एक सुरक्षित खेल माहौल तैयार करने में उनका योगदान
सराहनीय है। उनकी यह उपलब्धि खेल चिकित्सा के क्षेत्र में आने वाले युवा डॉक्टरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
डॉ. सोनाली पांडे
(ऑर्थोपेडिक सर्जन)
जुनून, जज्बा और उद्यमिता का अनोखा संगम

राजस्थान के अलवर की गलियों से निकलकर कॉर्पोरेट जगत में अपनी छाप छोड़ने वाली मेघना अग्रवाल आज लाखों युवा उद्यमियों के लिए प्रेरणा हैं। अपनी करियर यात्रा की शुरुआत उन्होंने वित्त में एमबीए करने के बाद की और जल्द ही अपनी कारोबारी सूझबूझ से हायरप्रो और अल्ट्राफाइन मिनरल्स जैसी कंपनियों की सह-
स्थापना की। लेकिन असली बदलाव तब आया जब उन्होंने देखा कि स्टार्टअप को एक लचीले और किफायती कार्यस्थल की जरूरत है। इसी सोच के साथ ‘इंडीक्यूब’ की नींव पड़ी, जो आज देश के सबसे बड़े फ्लेक्सिबल
वर्कस्पेस प्रदाताओं में से एक है। उनका सफर एक व्यवसायी बनने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने अपने हर कदम से यह साबित किया कि लगन और स्पष्ट दृष्टिकोण से कोई भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। वे मानती हैं कि ‘मैं कभी भी महिला को पीड़ित के रूप में देखने का नजरिया नहीं अपनाना चाहती। बिना किसी पारंपरिक कॉर्पोरेट बैकग्राउंड के, उन्होंने अपनी मेहनत और बुद्धिमत्ता से इंडस्ट्री में अपनी पहचान
बनाई। आज ‘इंडीक्यूब’ के जरिए वे न सिर्फ बड़े ब्रांड्स बल्कि छोटे स्टार्टअप को भी एक उपयुक्त कार्यस्थल उपलब्ध करा रही हैं।
मेघना अग्रवाल
(एंटरप्रेन्योर)
महिलाओं के हितों पर आंख खोलती कु. राजीव की नई रचना

युवा सशक्तिकरण कुमार रंजन का प्रिय विषय है लेकिन महिलाओं को वह इस समाज का केंद्रबिंदु मानते हैं।
हाल ही में महिला सशक्तिकरण पर प्रकाशित हुई उनकी इस किताब में महिलाओं के अधिकारों और सम्मान पर विस्तारपूर्वक चर्चा है। इस किताब में साधारण भाषा शैली का इस्तेमाल किया गया है। 176 पन्नों वाली है
किताब में 16 अध्याय हैं। इसमें वर्तमान सरकार द्वारा महिलाओं के लिए लाई गई कल्याणकारी योजनाओं, क़ानूनी सुधारों और नीतियों का जिक्र किया गया है, जिसमें तीन तलाक कानून सबसे अहम है। साथ ही इसमें
भारतीय महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी भारतीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्व पहलू को समझते हुए राजनीति क्षेत्र में उनकी उपस्थिति पर चर्चा की गई। विज्ञान के शोध में महिलाओं की भागीदारी को बताते हुए उनके नाम का उल्लेख करना सराहनीय है। किताब में उन महिलाओं के नाम भी दर्ज किये गए हैं, जैसे-
आनंदीबाई जोशी, रासायनिक विज्ञान में आसिमा चटर्जी, जैव प्रौद्योगिकी में कामिनी रॉय, डॉ. इंदिरा आहूजा (आईवीएफ को सफलतपूर्वक लागू किया), कल्पना चावला और अंतरिक्ष अनुसंधान, डॉ. टेसी थॉमस,
चंद्रयान और मंगलयान मिशनों में नेतृत्व करने वाली रितु करिधाल और मुथैया वनिता, जैविक विज्ञान में डॉ. गगनदीप कांग। किताब को डायमंड बुक्स द्वारा प्रकाशित किया गया। डायमंड बुक्स हमेशा से महिलाओं के हित में सोचने वाले लेखकों को प्रोत्साहित करता आया है।
पिंकी नायक
