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Rising Inflation: महंगाई आजकल अधिकतर लोगों की चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रति वर्ष बढ़ रही महंगाई खासतौर पर राशन के दामों में हो रही बढ़ोत्तरी ने आम लोगों की चिंता को दोगुना कर दिया है। यहां तक कि अनाज भी आम लोगों की पहुंच से दूर हो गया है। आज खासतौर पर निम्न श्रेणी को सोचना पड़ रहा है कि आखिर वो खाएं क्या? विगत कुछ वर्षों में आटा, चावल, चीनी, तेल और खासतौर पर दालों के दाम में अधिक बढ़ोतरी हुई है। दिहाड़ी कर्मचारियों के लिए मुसीबतें और भी बढ़ गई हैं।

क्या कहती है रिपोर्ट

खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि पिछले एक वर्ष में खुदरा बाजार में दालों का भाव 41 फीसदी तक बढ़ा है। पर 20 जुलाई को मूंग दाल का औसत भाव पिछले एक साल में 12.63 प्रतिशत बढ़कर 98.47 रुपये रहा। 2014 में इसकी कीमत 8.43 रुपये थी। इस वर्ष उड़द दाल का औसत भाव 33 फीसदी बढ़कर 99 रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष 75-80 रुपये के लगभग थी। मसूर की दाल 23 प्रतिशत तक महंगी हुई है तो अरहर यानी तुअर दाल की औसत कीमत 40 फीसदी तक यानी 99.31 रुपये प्रति किलो हो गई है। चने की दाल 30.53 फीसदी तक महंगी होकर 60.29 रुपये प्रति किलो हो गई है। इसी तरह राजमा, छोले, अन्य दालें व चीनी के दाम भी काफी बढ़े हैं। अरहर दाल 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की आशंका है।

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Rising Inflation: बढ़ती महंगाई - बढ़ती मुश्किलें 5

दाम बढऩे के कई कारण

दिल्ली के एक दाल कारोबारी महेश सिंह ने बताया कि दाम बढऩे के पीछे कई कारण हैं। दालों की कीमत में लगातार तेजी जारी है जबकि खपत लगातार बढ़ रही है और उत्पादन खपत के मुकाबले कम है। ऐसे में इस वर्ष दालों का आयात 50 लाख टन के पार तक पहुंच सकता है। आयात महंगा होने से दालों की कीमतें ऊपरी स्तर पर बनी रह सकती हैं। फसलों का नुकसान भी बढ़ते दामों की एक वजह है। यानी फसलों के प्रतिकूल मौसम के कारण उत्पादन में गिरावट इसकी बड़ी वजह रही है।हंगाई आजकल अधिकतर लोगों की चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रति वर्ष बढ़ रही महंगाई खासतौर पर राशन के दामों में हो रही बढ़ोत्तरी ने आम लोगों की चिंता को दोगुना कर दिया है। यहां तक कि अनाज भी आम लोगों की पहुंच से दूर हो गया है। आज खासतौर पर निम्न श्रेणी को सोचना पड़ रहा है कि आखिर वो खाएं क्या? विगत कुछ वर्षों में आटा, चावल, चीनी, तेल और खासतौर पर दालों के दाम में अधिक बढ़ोतरी हुई है। दिहाड़ी कर्मचारियों के लिए मुसीबतें और भी बढ़ गई हैं।

स्वास्थ्य की दृष्टि से

इंसान हर चीज में कटौती कर सकता है पर अपने पेट से नहीं। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमत गरीबी रेखा के नीचे वाले लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। इस बारे में दिल्ली के डॉक्टर अशोक रामपाल का कहना है कि हमारे शरीर के लिए हर पोषक तत्व आवश्यक है। कुछ पोषक तत्व सब्जी में पाए जाते हैं तो कुछ आवश्यक पोषक तत्व दालों में पाए जाते हैं। मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए सभी पोषक तत्व आवश्यक हैं। इस महंगाई में दालें गरीब लोगों की जेब की पहुंच से दूर हो गई हैं। इसका प्रभाव उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

सरकार द्वारा मिले राहत

बढ़ती महंगाई सरकार के लिए भी एक कड़ी चुनौती बन चुकी है। महंगाई पर काबू पाने के लिए आवश्यक है कि ऐसे कदम उठाएं जिनसे महंगाई को नियंत्रित किया जा सके। किसानों को भी उत्पादन के नए तरीके बताने चाहिए ताकि खाद्यपदार्थों का बेहतर उत्पादन हो सके। इसके अलावा निम्न वर्ग के लिए कुछ ऐसी राहत योजनाएं बनाई जानी चाहिए जिससे उन्हें राशन कम कीमत में आसानी से मुहैया हो सके। ऐसे में सरकार को कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए दूरगामी उपाय करने की आवश्यकता है।

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