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फाइनेंशियल स्ट्रेस आज का सच है। लोगों के खर्च बढ़ रहे हैं और आमदनी उतनी ही है या महंगाई के अनुसार नहीं बढ़ रही है। वहीं पढ़ाई से लेकर शादी तक सबकुछ के लिए लोग कर्ज लेते हैं।
Financial Stress and Mental Health: आज के महंगाई के दौर में हर कोई अपने बजट को लेकर चिंता में रहता है। एक तरफ बढ़ती इच्छाएं हैं तो दूसरी ओर आसमान छूती महंगाई। ऐसे में अधिकांश लोगों को यही लगता है कि उनके पास अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त रुपए नहीं हैं। बचत होती भी है तो खर्चे आगे से आगे तैयार रहते हैं। इन सभी कारणों से जो तनाव होता है उसे ही कहते हैं ‘फाइनेंशियल स्ट्रेस’। आइए जानते हैं फाइनेंशियल स्ट्रेस के पीछे क्या कारण हैं, महंगाई, फिजूलखर्ची या आर्थिक तंगी।
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ऐसे पहचानें फाइनेंशियल स्ट्रेस को

दरअसल, फाइनेंशियल स्ट्रेस आज का सच है। लोगों के खर्च बढ़ रहे हैं और आमदनी उतनी ही है या महंगाई के अनुसार नहीं बढ़ रही है। वहीं पढ़ाई से लेकर शादी तक सबकुछ के लिए लोग कर्ज लेते हैं। धीरे-धीरे यही कर्ज आपको तनाव देता है और आप फाइनेंशियल स्ट्रेस में आ जाते हैं। वहीं सोशल मीडिया के कारण अब समाज में अपना लिविंग स्टैंडर्ड दिखाने का दबाव भी लोगों पर काफी बढ़ रहा है। जिसके कारण लोग काफी अनावश्यक खर्च कर देते हैं। फाइनेंशियल स्ट्रेस का एक सबसे बड़ा कारण है क्रेडिट कार्ड। यानी खरीदारी आज करें, रुपए बाद में दें। इसके कारण भी लोग बिना सोचे समझे खर्च देते हैं और बिल देने के बाद तनाव में आ जाते हैं। इसमें काफी बड़ा रोल ई कॉमर्स साइट्स का भी है। इसमें ऑफर देखकर लोग बिना सोचे समझे खर्च कर देते हैं।
आपकी नींद उड़ा देगा फाइनेंशियल स्ट्रेस
आप सही सोच रहे होंगे कि फाइनेंशियल स्ट्रेस तो बहुत आम बात है। लेकिन यह आपके शारीरिक और मानसिक दोनों ही सेहत पर असर डालता है। इससे आप कई बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। टेंशन के कारण आपकी नींद उड़ सकती है। आत्मविश्वास कम हो सकता है। आपको हर समय गुस्सा, एंग्जायटी और शर्मिंदगी महसूस हो सकती है। इसके कारण कुछ लोगों को आत्महत्या के विचार भी आने लगते हैं।
ऐसे दूर करें अपना फाइनेंशियल स्ट्रेस
फाइनेंशियल स्ट्रेस को कम करना आपके खुद के हाथ में है। सबसे पहले आप अपने खर्चे को ट्रैक करना सीखें। इससे आपको पता चलेगा कि आप कहां गलती कर रहे हैं, जिसके कारण आपका बजट बिगड़ रहा है। माइक्रो-इन्वेस्टिंग करें, ये आपके भविष्य के लिए बहुत जरूरी है। ये छोटी-छोटी बचत आगे चलकर बड़ी हो जाएंगी। इसलिए मुफ्त सेवाओं का पूरा लाभ उठाएं। ये आपके ही टैक्स की देन हैं, इसमें शर्म महसूस न करें। अगर आप पर कोई कर्ज है तो उसे पूरा करने के लिए टारगेट सेट करें। लक्ष्य बनाएं और उसे पूरा करने की कोशिश में जुट जाएं। अपनी सैलरी को कई भागों में बांटे। पहले सेविंग करें और फिर बाकी रुपयों से खर्चा करें। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। घर खर्च के लिए हमेशा बजट तय करें और उसी के अनुसार चलें। ये कोशिशें आपके जरूर काम आएंगी।
सबका सहयोग लें
परिवार में बच्चों को बचपन से ही रुपयों का महत्व बताएं। इसका मतलब कंजूसी से रहना बिलकुल नहीं है, बल्कि यह सही जीने का तरीका है। अगर आप या बच्चे ऑनलाइन शॉपिंग के शौकीन हैं तो खरीदारी से पहले सेल या फिर मोटे डिस्काउंट का इंतजार करें। इससे आप काफी बचत कर पाएंगे। ध्यान रखें बचत किसी एक शख्स की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी होती है।
