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घर चलाना अब सिर्फ पुरुष की जिम्मेदारी मात्र नहीं रह गया है। आज के बराबरी के इस दौर में जेन जी जनरेशन घर का खर्च बराबर बांटने पर जोर देती है। एक मजबूत और बराबरी का रिश्ता कायम करने के लिए हर कपल को कुछ स्मार्ट तरीके अपनाने चाहिए।
Financial Planning for Married Couples: कभी-कभी पैसा, प्यार को बर्बाद कर सकता है। दो वर्किंग पार्टनर्स के बीच यह एक बड़ा मुद्दा हो सकता है। क्योंकि घर चलाना अब सिर्फ पुरुष की जिम्मेदारी मात्र नहीं रह गया है। आज के बराबरी के इस दौर में जेन जी जनरेशन घर का खर्च बराबर बांटने पर जोर देती है। एक मजबूत और बराबरी का रिश्ता कायम करने के लिए हर कपल को कुछ स्मार्ट तरीके अपनाने चाहिए।
मामला रखें बराबरी का

अगर कपल में दोनों पार्टनर बराबर इनकम वाले हैं तो खर्च का बांटना एक आसान काम हो सकता है। इसके लिए आप अपने मोटे-मोटे खर्चे जोड़ लें। जैसे घर का किराया या ईएमआई, राशन का सामान, पेट्रोल, बिजली-पानी के बिल, घर की हाउस हेल्प आदि के खर्चे को आधा-आधा बांट लें। इसके लिए आप एक ज्वाइंट अकाउंट ओपन कर सकते हैं। और उसमें बराबर योगदान शेयर करें। अगर कपल की आय में असमानता है तो उसे अनुपात के आधार पर बांटना चाहिए। इससे दोनों पर बराबर भार आएगा।
एक टीम बनकर चलाएं घर
कुछ कपल्स एक टीम की तरह काम करते हैं। वे एक दूसरे से कुछ नहीं छिपाते और एक टीम की तरह घर की जिम्मेदारियां निभाते हैं। अगर आप भी इन्हीं में शामिल हैं तो घर का खर्च चलाना और बचत करना काफी आसान हो सकता है। ऐसे में आप अपनी इनकम को पूल्ड कर सकते हैं। यानी दोनों की तनख्वाह एक ही खाते में आती है। यहीं से घर का सारा खर्च और बचत दोनों मैनेज होते हैं। ऐसे में कपल्स का बीच एक गहरा विश्वास और प्यार का रिश्ता बन पाता है। ऐसे कपल्स रुपयों को ज्वाइंट प्रॉपर्टी मानते हैं।
खर्चों को श्रेणी में बांटें
आज की जेन जी काफी प्रैक्टिकल है। वो अपनी सेविंग्स खुद करना चाहती है और अपने फाइनेंस से जुड़े फैसले भी अपने हाथ में ही रखती है। ऐसे में कुछ कपल्स घर के खर्च को श्रेणी के आधार पर बांट लेते हैं। जिससे दोनों पार्टनर्स पर लगभग एक समान बोझ आता है। जैसे घर का खर्च और हाउस हेल्प का खर्च एक पार्टनर उठाता है तो दूसरा बिजली के बिल से लेकर राशन तक का हिसाब रखता है। अगर आप भी खर्च उठाने का यही तरीका अपनाते हैं तो हर तीन महीने में एक बार सभी खर्चों की समीक्षा जरूर कर लें।
बेस्ट हो सकता है हाइब्रिड तरीका
परिवार एक दूसरे का साथ निभाने और साथ चलने का नाम है। इसे खर्चों में बांटा नहीं जा सकता है। ऐसे में आज भी अधिकांश कपल्स हाइब्रिड तरीके से अपने पैसों को मैनेज करते हैं। यानी ये कपल्स खर्च का सिर्फ एक तरीका ही नहीं अपनाते हैं। बल्कि जरूरत के अनुसार इन तरीकों में बदलाव करते रहते हैं। कभी पुरुष घर का किराया भर देता है तो कभी महिला। अपनी जरूरतों के अनुसार भुगतान में यह बदलाव करना आपके रिश्ते के लिए काफी हद तक जरूरी है। यह एक व्यवहारिक तरीका है, जिसमें कपल एक दूसरे की जरूरतों और परेशानियों को समझता है। ये उदारता आपके रिश्ते की नींव को मजबूत करती है। क्योंकि ध्यान रखें रिश्ते में पैसों से ज्यादा अहमियत प्यार की होती है। हालांकि इसमें भी महीने का बजट बनाना और सेविंग का टारगेट बनाना बहुत जरूरी है।
