चरित्र अध्ययन का एक प्रकार, मुखाकृति विज्ञान पर आधारित है। ऐसा कहा जाता है कि व्यक्ति के प्रमुख गुण उसकेशरीर में व्यक्त होते हैं- एक अतिश्योक्ति है। व्यक्ति के शरीर की सारी विशिष्टताएं भी उसके आन्तरिक जीवन की सच्ची गाथा नहीं बतातीं।

अरस्तू ने मुखाकृति विज्ञान का अध्ययन चरित्र जानने के लिए किया था। हिन्दू दार्शनिक इससे और अधिक गहराई में जाते हैं। वे कहते हैं कि व्यक्ति के सभी जन्मों के प्रमुख विचार उसकी आंखों में झलकते हैं। यद्यपि आंखें आत्मा की संपूर्ण कहानी प्रकट करती हैं, न केवल इस जन्म की बल्कि गत जन्मों की भी, फिर भी इस जीवन में प्रतिबिम्बित होने वाले पिछले जन्मों के प्रभावों का विश्लेषण करने के लिए एक गुरु के ज्ञान की आवश्यकता होती है।

कभी-कभी आप घूम रहे होते हैं और अचानक आप अपने पास से गुजर रहे व्यक्ति की आंखों में कुछ देखते हैं, और सोचते हैं, ‘मुझे यह पसंद नहीं हैं।’ भय, क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, दयालुता, प्रेम, साहस, आध्यात्मिकता- के अनुरूप सब अच्छे और बुरे गुण आंखों में प्रतिबिम्बित होते है। जासूस अपने चेहरे की मांसपेशियों पर तो नियंत्रण रख सकते हैं जिससे कि वे जो सोच रहे हैं वह उनके चेहरे पर न झलक जाए, परंतु वे अपनी आंखों में संदेह को नहीं छुपा सकते। योगी की आंखें शांत होती हैं, क्योंकि वह शांत परमब्रह्म का ही चिंतन करता है।

चेहरे और शरीर की मुद्रा का अध्ययन किया गया है, यहां तक कि सिर पर निकले उभारों का भी विश्लेषण किया गया है, परंतु शारीरिक आकृति सदा सारी कहानी नहीं बताती और संस्कृतियां अपने निरीक्षणों से भिन्न-भिन्न निष्कर्ष निकालती हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मोटे लोग विलासप्रिय होते हैं, और काम करना पसंद नहीं करते और पतले लोग अधिक आध्यात्मिक होते हैं। फिर भी भारत में आध्यात्मिक व्यक्तियों का मोटा होना स्वीकारात्मक रूप में देखा जाता है। कुछ लेखकों का यह सिद्धांत है कि जो पतले होते हैं वे अत्यधिक सोचते हैं, इसलिए उन पर मांस नहीं चढ़ता। इतिहास पढ़ने से पता चलता है कि पतले और मोटे दोनों ही तरह केलोग अच्छे शासक रहे हैं।

मुखाकृति विज्ञान चरित्र की जानकारी देने के रूप में भी ठीक है जब व्यक्ति इस बात का ध्यान रखता है कि वे सभी विचार, जो पिछले कई जन्मों में किसी मन विशेष से गुजरे हैं, शरीर में प्रभाव दिखाते हैं। परंतु किसी सिद्ध पुरुष के अंतर्ज्ञान की शक्ति द्वारा ही किसी की मुखाकृति का अध्ययन पूरे और ठीक ढंग से किया जा सकता है। उदाहरण के लिए सुकरात बहुत कुरूप थे। एक बार वे एक महान ज्योतिषी से मिले जिसने उन्हें बताया, सुकरात मैं जानता हूं तुम सबसे बुरे और दुष्टï व्यक्ति हो। सुकरात के शिष्य उस ज्योतिषी पर बहुत क्रोधित हुए, परंतु उनके गुरु ने उत्तर दिया, तुमने ठीक कहा। मैं पिछले जन्मों में ऐसा ही था। परंतु, यद्यपि अब मैंने इस पर ज्ञान द्वारा विजय पा ली है तथापि जो कुछ भी मैंने तब किया था वे सब इस शरीर में अंकित हो गए हैं। जिसके कारण यह शरीर कुरूप दिखता है।

मुखाकृति विज्ञान से संबंधित विश्लेषण की एक और शाखा है, भावचिन्तन जिसमें मुख की अभिव्यक्ति के बाह्य चिह्न और शारीरिक हावभाव द्वारा भावनाओं एवं आवेगों का अध्ययन किया जाता है, और उसके जीवन की अनेक घटनाओं से उसकी भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। भावनाएं और आदतें व्यक्ति के गुण-दोषों को दर्शाती हैं, परंतु कुछ लोगों ने अपनी वास्तविक भावनाओं को छुपा लेने की योग्यता प्राप्त कर ली है क्योंकि वे अपने आपको दूसरों के सामने प्रकट नहीं होने देना चाहते। दो पतियों को समाचार मिला कि उनकी पत्नियां पानी में डूब गई है। उनमें से एक तो बहुत शोक प्रकट कर रहा था और दूसरा कुछ नहीं कह रहा था, परंतु वह व्यक्ति, जो बाह्य रूप से दुख व्यक्त कर रहा था उसे अपनी पत्नी से उस पति की अपेक्षा, कम प्रेम था। जिसने अपने चेहरे के लक्षणों द्वारा किसी प्रकार के कष्टï को बिल्कुल प्रकट नहीं किया। अत: भावचिंतन, जिसमें लोगों की वास्तविक भावनाओं और प्रतिक्रियाओं को जाना जाता है, एक अत्यंत गहन अध्ययन है। 

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