International Day of Families: परिवार वो संस्था है जो किसी भी व्यक्ति को जीवन जीने का हौसला और हर परेशानी का सामना करने की शक्ति देता है। भारत में हमेशा से ही परिवार को महत्वपूर्ण संस्था माना गया है। यही कारण है कि आज भी भारतीय अपनी जड़ों से जुड़े हैं। इतना ही नहीं विभिन्न शोध बताते हैं कि जो बच्चे संयुक्त परिवार में बड़े होते हैं, उनकी परवरिश ज्यादा बेहतर तरीके से होती है और वे कई परेशानियों का सामना करने के लिए खुद ब खुद तैयार हो जाते हैं। परिवार के अनगिनत फायदे हैं। इन्हीं फायदों को बताने और परिवार का महत्व समझाने के उद्देश्य से हर साल 15 मई को इंटरनेशनल डे ऑफ फैमिली मनाया जाता है।
संयुक्त परिवार के इन फायदों पर दें ध्यान

दुनियाभर के शोध बताते हैं कि संयुक्त परिवार बच्चों के अच्छे विकास और बेहतर भविष्य के लिए बहुत ही अच्छा है। जो बच्चे अपने मम्मी-पापा के साथ ही दादा-दादी, भाई, बहन, चाचा, चाची और चचेरे भाई के साथ रहते हैं उनमें पॉजिटिव एनर्जी ज्यादा होती है। वे कई बातें अपने आप सीख जाते हैं। इतना ही नहीं उनमें कॉन्फिडेंस भी ज्यादा रहता है। संयुक्त परिवार में रहकर बच्चे न सिर्फ बड़ों का आदर करना अच्छे से सीख लेते हैं, बल्कि उन्हें अपने कर्तव्य का एहसास भी ज्यादा होता है। वे अन्य बच्चों के मुकाबले सोशल ज्यादा होते हैं। बच्चों के लिए संयुक्त परिवार एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करता है। जहां हर समय घर का एक न एक सदस्य बच्चे के साथ जरूर रहता है। ऐसे में बच्चा सेफ महसूस करता है। बच्चे को यह कॉन्फिडेंस रहता है कि अगर उनके साथ कोई समस्या हुई तो परिवार मददगार के रूप में हमेशा तैयार रहेगा। हालांकि एकल परिवारों में सुरक्षा की यह भावना बच्चों में कम आ पाती हैै।
‘पहले परिवार’ का सिद्धांत है बहुत काम का

फिलाडेल्फिया की ड्रेक्सेल यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए शोध में सामने आया कि जिन बच्चों के माता-पिता ‘परिवार पहले’ के सिद्धांत पर चलते हैं, उन बच्चों की इमोशनल हेल्थ अन्य बच्चों के मुकाबले बेहतर रहती है। रिसर्चर जेफ ग्रीनहॉस का कहना है कि रिसर्च में सामने आया कि जिन बच्चों के पिता अपने करियर पर मेंटली ज्यादा बिजी रहते हैं, उन बच्चों में व्यवहार संबंधित परेशानियां होने की आशंका रहती है। रिसर्च में यह भी सामने आया कि जो माताएं अपने बच्चों की एक्टिविटी पर ज्यादा ध्यान देती हैं और उन्हें कंट्रोल करती हैं, उन बच्चों की मेंटल हेल्थ अन्य बच्चों के मुकाबले अच्छी होती है। वहीं जो माताएं हमेशा काम में बिजी रहने के कारण बच्चों को समय नहीं देती, उनके बच्चे असुरक्षित महसूस करते हैं। ऐसे में बच्चों के लिए माता-पिता का क्वालिटी टाइम जरूरी है।
इसलिए भी जरूरी है परिवार
महंगाई के इस दौर में माता-पिता दोनों का काम करना जरूरी हो गया है। लेकिन ऐसे में कहीं न कहीं बच्चों के विकास पर इसका असर पड़ता है। अगर आप एक संयुक्त परिवार में रहते हैं तो ये परेशानियां कम हो सकती हैं। क्योंकि परिवार में दादा-दादी बच्चों को प्यार और दुलार और चीजें सिखाने में मदद कर सकते हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी के अनुसार वर्किंग मदर का असर भी बच्चों की परवरिश पर पड़ता है। स्टडी के अनुसार कामकाजी माताएं अक्सर ऑफिस के समय की भरपाई बच्चों के क्वालिटी टाइम से करती हैं। ऐसे में कामकाजी महिलाओं के बच्चे हर सप्ताह करीब छह घंटे अनावश्यक गतिविधियों में बिताते हैं। वहीं जो महिलाएं वर्किंग नहीं होतीं, उनके बच्चे इस समय को अच्छी एक्टिविटी में लगा पाते हैं।
