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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शायद ही कोई ऐसा है, जो खुश रहता है। लोग हर समय किसी न किसी तनाव में रहते हैं। लोगों को इस तनाव से दूर खुशियों का एहसास करवाने के लिए हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस यानी अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस।
International Day of Happiness 2025 : हर कोई अपनी जिंदगी में खुश रहना चाहता है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शायद ही कोई ऐसा है, जो खुश रहता है। लोग हर समय किसी न किसी तनाव में रहते हैं। लोगों को इस तनाव से दूर खुशियों का एहसास करवाने के लिए हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस यानी अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस। इस साल की थीम है शेयरिंग इज केयरिंग। इस खास दिन पर जानते हैं कि आखिर कौन, खुशियों को ज्यादा सेलिब्रेट करता है।
हर पैमाने पर खुशियां

एक शोध में खुशियों की लिस्ट में सबसे ऊपर रही हैं सिंगल वूमन यानी एकल महिलाएं। ये महिलाएं सिर्फ खुश ही नहीं हैं, बल्कि अपने जीवन से दूसरों के मुकाबले संतुष्ट भी ज्यादा हैं। हैरानी की बात ये है कि सिंगल पुरुष इस लिस्ट में सिंगल महिलाओं से पीछे हैं। सोशल साइकोलॉजिकल एंड पर्सनालिटी साइंस में प्रकाशित इस शोध में सिंगल महिलाओं और सिंगल पुरुषों, दोनों की कई स्थितियों को ध्यान में रखा गया। जिसमें रोमांटिक रिश्ते, यौन संतुष्टि और जीवन की संतुष्टि जैसे कई पैमाने थे। इन सभी में सिंगल महिलाएं, पुरुषों से कहीं ज्यादा खुश थीं।
पुरानी सोच के लिए नई चुनौती
यह शोध बरसों से चली आ रही उस सोच को बदलता है, जिसमें महिलाओं की खुशियां किसी साथी के बिना अधूरी मानी जाती थीं। उन्हें बेचारा या दुखी माना जाता है। शोध की जड़ों तक जाने के लिए शोधकर्ताओं ने इसे साल 2020 से 2023 के लंबे समय के बीच किया। जिसमें साढ़े पांच हजार से ज्यादा लोगों के साथ ही 10 विभिन्न शोधों के डेटाबेस का भी विश्लेषण किया गया है। इस शोध में 18 से 75 साल के बीच के सिंगल लोगों को शामिल किया गया था।
पुरुषों को होती है यह चाहत
सिंगल महिलाओं ने शोधकर्ताओं को बताया कि उन्हें खुश रहने के लिए किसी रोमांटिक रिश्ते की चाहत या जरूर महसूस नहीं होती। वह बिना किसी ऐसे रिश्ते के भी संतुष्ट हैं। हालांकि सिंगल पुरुष रोमांटिक साथी की जरूरत को महसूस करते हैं। वहीं महिलाओं ने माना कि वे अपनी सेक्स लाइफ को अपनी इच्छा के अनुसार एंजॉय करती हैं।
इसलिए खुश हैं अकेलेपन में
टोरंटो विश्वविद्यालय की स्टूडेंट और प्रमुख शोधकर्ता एलेन होआन का कहना है कि सिंगल महिलाओं की खुशी के कई कारण हैं। वे सिंगल रहकर पारिवारिक बंधन या अन्य बंदिशों से मुक्त रहने से खुश हैं। इस अकेलेपन को वो कमी की जगह खुद के विकास के अवसर के रूप में देखती हैं। सिंगल रहकर वे अपने करियर, फिटनेस, हेल्थ, ट्रेवल और रुचियों पर फोकस कर पाती हैं। जो परिवार के साथ कभी—कभी संभव नहीं होता है।
खुद चुनें अपनी राह
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार सिंगलहुड को एंजॉय करना महिलाओं के लिए अच्छा है। लेकिन ऐसा नहीं है कि खुशियों का यही बैंचमार्क है। महिलाएं परिवार और साथी के साथ भी खुश रह सकती हैं। बशर्त है कि वे अपनी जिंदगी को सही ट्रैक पर चलाएं। महिलाओं को परिवार को समय देने के साथ ही खुद को भी समय देने की जरूरत है। अपनी रुचियों को वक्त देना, खुद की फिटनेस का ध्यान रखना, अपनी पसंद को नजरअंदाज न करना, खुद के बारे में सोचना कोई गलत बात नहीं हैं। इसलिए हर महिला को जिंदगी अपनी पसंद और शर्तों के अनुसार जीनी चाहिए। यही असली खुशी दे सकता है।
