Summary: बुध की पत्नी इला: स्त्री-पुरुष रूपांतरण की अद्भुत पौराणिक कथा
इला की कहानी हिंदू धर्म की सबसे रहस्यमयी कथाओं में से एक मानी जाती है। शिव-पार्वती के वरदान से वे निश्चित समय तक स्त्री और पुरुष दोनों रूपों में जीवन व्यतीत करती थीं।
Budh and Ila Story: हिंदू धर्म में कई पौराणिक कथाएं हैं, जिनमें कई अलग-अलग पात्र हैं। इसमें कुछ ऐसे पात्र भी हैं जिनकी कहानियाँ जिज्ञासा से भरी हैं और वे लोगों को आश्चर्य में डाल देती हैं। इन्हीं कथाओं में से एक कथा हैं इला की, जो बुध की पत्नी और चंद्रवंश की प्रमुख कड़ी भी है। इला की सबसे बात यह थी कि वे अपनी इच्छा से स्त्री और पुरुष दोनों के रूप में रूपांतरित हो सकती थीं। लेकिन यह रूपांतरण कैसे संभव हुआ? क्या है इसके पीछे की अनोखी कथा, आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
कैसे हुआ इला का जन्म
इला, राजा मनु की संतान थीं। राजा मनु ने पुत्र प्राप्ति के लिए एक यज्ञ करवाया था, लेकिन यज्ञ में एक भूल हो गई और पुत्र के स्थान पर कन्या का जन्म हुआ, जिसे इला कहा गया। पुत्र की चाह में राजा मनु ने भगवान श्री हरी विष्णु की आराधना की, जिनकी कृपा से इला को पुरुष रूप प्राप्त हुआ और वे सुद्युम्न कहलाए।
भगवान शिव ने क्यों दिया श्राप

एक बार अनजाने में सुद्युम्न भगवान शंकर और माता पार्वती के वन में प्रवेश कर गए। वह वन भगवान शिव और माता पार्वती का पवित्र क्रीड़ास्थल था। उस वन का नियम था कि कोई भी पुरुष वहाँ प्रवेश नहीं कर सकता है। यदि करता है तो वह तुरंत स्त्री बन जाता है। जब सुद्युम्न ने अनजाने में वन में प्रवेश किया, तो वन के दैवी नियम के अनुसार वे स्त्री बन गईं। यह श्राप किसी क्रोध या दंड के कारण नहीं मिला, बल्कि शिव-पार्वती की लीला और उस स्थान की मर्यादा के कारण लगा।
शिव-पार्वती के वरदान से हुआ रूपांतरण
सुद्युम्न/इला अपने बदले हुए स्वरूप से काफी परेशान हो गए। इसके बाद उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या शुरू की। उन्होंने एकांत में रहकर भगवान शिव का ध्यान किया, निरंतर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप किया और कठोर व्रतों का सख्ती से पालन भी किया। उनकी सच्ची भक्ति, संयम और पश्चाताप के भाव देखकर भगवान शिव प्रकट हुए। भगवान शिव ने उन्हें पूर्ण रूप से श्रापमुक्त तो नहीं किया, लेकिन उन्हें यह वरदान अवश्य दिया कि वे एक निश्चित अवधि तक पुरुष और फिर इसके बाद स्त्री रूप में रह सकेंगे। कुछ कथाओं के अनुसार यह परिवर्तन चंद्र मास के अनुसार बताया गया है, जिसके अनुसार एक महीने पुरुष और एक महीने स्त्री रह सकेंगे।
बुध से कैसे हुआ विवाह

जब सुद्युम्न भगवान शिव के श्राप से स्त्री रूप में इला बनीं, तब वे पृथ्वी पर भ्रमण कर रही थीं, उसी समय उनका सामना चंद्रदेव के पुत्र बुध से हुआ। बुध, इला की खूबसूरती, शालीनता और दिव्य व्यक्तित्व देखकर पूरी तरह से मोहित हो गए। वहीं इला भी बुध के ज्ञान, सौम्यता और विनम्र स्वभाव से काफी प्रभावित हुईं। इस तरह से दोनों के बीच परस्पर प्रेम उत्पन्न हुआ और सभी देवताओं की सहमति से विधिवत वैदिक रीति-रिवाज से इला का विवाह बुध के साथ संपन्न हुआ। इस दांपत्य जीवन से पुरूरवा का जन्म हुआ, जो आगे चलकर चंद्रवंश की स्थापना की और इसके महान राजा बने। इस प्रकार इला न केवल रूपांतरण की अद्भुत क्षमता वाली पात्र बनीं, बल्कि एक महान वंश की जननी भी बनीं।
