बढ़ती आबादी बनी चुनौती: Increasing Population Problems
Increasing Population Problems

Increasing Population Problems: विश्व की जनसंख्या सात अरब से भी पार जा चुकी है। अगर अपने देश भारत की बात करें तो यह संख्या दुनिया की कुल आबादी का 17.78त्न है। भारत विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है।

बढ़ती आबादी विकास नहीं, विनाश का सूचक है। संपूर्ण विश्व आज जनसंख्या विस्फोट की समस्या से जूझ रहा है। विश्व में कुल आबादी में भारत की हिस्सेदारी 17 फीसदी है और हमारे पास जल केवल 4 फीसदी और जमीन 2.5 फीसदी। भारत विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश बन गया हैे। इस तथ्य के बावजूद कि यहां जनसंख्या नीतियां, परिवार नियोजन और कल्याण कार्यक्रम सरकार ने शुरु किए हैं और प्रजनन दर में लगातार कमी आई है पर आबादी का वास्तविक स्थिरीकरण केवल 2050 तक ही हो पाएगा।
डी डब्ल्यू के मुताबिक 12 अगस्त 2022 को भारत में 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे थे। भविष्य में इसके विनाशकारी प्रभाव हो सकते हैं। जनसंख्या वृद्धि के रूप में भारत एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। यह भारत की आर्थिक स्थिति पर ऌप्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है और गरीबी तथा निम्न जीवन स्तर के लिए भी जिम्मेदार है।

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जन्म दर का प्रतिशत मृत्यु दर से अधिक है। हमने मृत्यु दर के प्रतिशत को तो सफलतापूर्वक कम कर दिया है पर जन्म दर के बारे में हम कुछ ज्यादा नहीं कर पाएं। हालांकि विभिन्न जनसंख्या नीतियों और अन्य उपायों से प्रजनन दर कम तो हुई है पर फिर भी यह दूसरे देशों के मुकाबले बहुत अधिक है।

वैसे तो कानूनी तौर पर लड़की की शादी की उम्र 18 साल है, लेकिन कम उम्र में विवाह की अवधारणा यहां बहुत प्रचलित है और जल्दी शादी करने से गर्भधारण करने की अवधि भी बढ़ जाती है।

तेजी से आबादी बढ़ने का एक अन्य कारण गरीबी और निरक्षरता है। गरीब परिवारों में यह धारणा है कि परिवार में जितने ज्यादा सदस्य होंगे उतने ज्यादा लोग कमाने वाले होंगे। कुछ लोग यह मानते हैं कि बुढ़ापे में देखभाल करने के लिए भी बच्चों का होना जरुरी है। यह एक अजीब बात है लेकिन सच है कि भारत अब भी गर्भ निरोधकों और जन्म नियंत्रण विधियों के इस्तेमाल में पीछे है। कई लोग इस बारे में बात करने के लिए तैयार नहीं होते हैं या फिर इससे पूरी तरह अनजान हैं।

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भारत में बेटे परिवार में पैसे कमाने वाले और बुढ़ापे का सहारा माने जाते हैं तथा कई परिवारों में बेटियां बोझ। इस दकियानूसी सोच के चलते माता-पिता पर बेटा पैदा करने का दबाव बहुत बढ़ जाता है। अंतत: आबादी भी बढ़ती है।

बढ़ती जनसंख्या भारत में बेरोजगारी का मुख्य कारण है। हम देख सकते हैं कि किसी भी परीक्षा या रिक्ति के लिए लाखों आवेदन प्राप्त होते हैं। यह प्रतिस्पर्धा को बढ़ाता है और कभी-कभी लोग नौकरी पाने के लिए रिश्वत का उपयोग करते हैं। यह भ्रष्टाचार को भी बढ़ाता है जो भारत की बढ़ती चिंता है।

दुर्भाग्य से बुनियादी ढांचे का विकास उतनी तेजी से नहीं हो रहा जितनी तेजी से आबादी में वृद्धि हो रही है। इसका नतीजा परिवहन, संचार, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा आदि की कमी के तौर पर सामने आता है। झुग्गी बस्तियों, भीड़, ट्रैफिक जाम आदि में बढ़ोतरी हुई है।

भूमि क्षेत्र, जल संसाधन और जंगल सभी का अत्यधिक दोहन हुआ है जिसके कारण प्राकृतिक संसाधनों में भी कमी आई है। खाद्य उत्पादन और वितरण बढ़ती हुई आबादी की बराबरी करने में सक्षम नहीं है।

भारत सरकार, नेताओं और नीति निर्माताओं को एक मजबूत जनसंख्या नीति बनाने के लिए पहल करना होगा जिससे देश की आर्थिक विकास दर का बढ़ती आबादी की मांग के साथ तालमेल बिठाया जा सके। आबादी पर नियंत्रण पाने के लिए जो बड़े कदम उठाए जा चुके हैं उन्हें और जोर देकर लागू करने की जरुरत है। महिलाओं और बच्चियों के कल्याण और उनकी स्थिति को बेहतर करना, शिक्षा के प्रसार, गर्भनिरोधक और परिवार नियोजन के तरीके, यौन शिक्षा, पुरुष नसबंदी को बढ़ावा, गरीबों में गर्भनिरोधकों और कंडोम का मुफ्त वितरण, महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा, गरीबों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य सेवा केंद्र आदि कुछ ऐसे कदम हैं जो आबादी को काबू करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार द्वारा जन जागरुकता बढ़ाने और जनसंख्या नियंत्रण के कड़े मानदंड बनाने से देश की आबादी पर नियंत्रण पाया जा सकता है और इससे देश की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
इन सब प्रयासों और पहल के अतिरिक्त माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त को बढ़ती जसंख्या का मुद्दा उठाया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसंख्या विस्फोट पर प्रहार किया। उन्होंने जनसंख्या विस्फोट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भावी पीढ़ी के लिए यह समस्या एक चुनौती बन जाएगी। परिवार नियोजन को स्वैच्छिक आंदोलन बनाना चाहिए। सीमित परिवार से न सिऌर्फ खुद का बल्कि देश का भी भला हो सकता है।
उन्होंने कहा कि जो लोग समाज को सीमित परिवार के फायदे को समझा रहे हैं, उन्हें आज सम्मानित करने की जरूरत है। छोटा परिवार रखने वाले देशभक्त की तरह हैं। घर में किसी भी बच्चे के आने से पहले सोचें कि क्या हम उसके लिए और उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार हैं?
यदि लोग देश के लिए कुछ करना चाहते हैं तो छोटा परिवार रख कर और इसके प्रति लोगों को जागरुक कर अपनी देशभक्ति प्रकट कर सकते हैं।