Anger is like death! Why did the elders say this?
Anger is like death! Why did the elders say this?

Anger Like Time Meaning: बात-बात पर गुस्सा हो जाना, अक्सर बीमारियों को न्योता देता है। इसलिए बड़े-बूढ़े कह गए हैं कि क्रोध काल सामान है! कई लोग ऐसे हैं जिन्हें छोटी-छोटी बात पर ही गुस्सा आ जाता है, जिससे उनका बीपी बढ़ जाता है। इससे आप चाहें तो आसानी से बच सकते हैं बस आपको छोटा सा प्रयास करना है- एंगर कंट्रोल। इसके लिए लेख जरूर पढ़ें।

गुस्सा सेहत के लिए खराब है, ये तो हम सभी जानते हैं लेकिन हर समय गुस्सा करना जानलेवा भी हो सकता है। कई शोध इस बात का प्रमाण देते हैं। आज के दौर में इंसान इतनी उलझनों में उलझा हुआ है कि उसे बातबात पर गुस्सा आता है। वहीं दूसरी ओर घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहते थे कि ‘क्रोध काल समान है। लेकिन क्या वाकई ऐसा है। क्या गुस्से से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है, आइए जानते हैं-

हार्वर्ड हेल्थ के एक शोध के अनुसार जब लोगों को अचानक गुस्सा आता है, तनाव या चिंता बढ़ती है तो हृदय गति बढ़ने लगती है। ऐसे लोगों का ब्लड प्रेशर भी बढ़ सकता है। लेकिन अगर वे किसी
हृदय रोग से पीड़ित हैं और हर समय भावनात्मक तनाव में रहते हैं तो हार्ट अटैक का जोखिम दोगुना से ज्यादा बढ़ सकता है क्योंकि इसके कारण हृदय के कुछ हिस्सों में रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं
हो पाता है। इस स्थिति को ‘मेंटल स्ट्रेस इस्किमिया’ कहा जाता है।

हार्वर्ड से संबद्ध मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल के रिसर्चर का कहना है कि मेंटल स्ट्रेस इस्किमिया किसी भी इंसान के लिए एक गंभीर स्थिति है। इसके कारण हृदय की सबसे छोटी रक्त वाहिकाओं की दीवार और आंतरिक परत में बदलाव आने लगता है। यह समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करती हैं। इस स्थिति में सीने में दर्द महसूस होना एक आम लक्षण है।

जामा में प्रकाशित इस रिसर्च के अनुसार भावनात्मक और मानसिक तनाव लोगों के हृदय को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। हृदय रोग से पीड़ित छह में से एक व्यक्ति मानसिक तनाव के समय हृदय में रक्त प्रवाह में कमी यानी इस्किमिया का अनुभव करता है। रिसर्च के अनुसार बिना इस्किमिया वाले लोगों के मुकाबले मेंटल स्ट्रेस इस्किमिया से पीड़ित लोगों में हार्ट अटैक आने की आशंका करीब दोगुनी थी। वहीं जो लोग मानसिक के साथ ही शारीरिक इस्किमिया से भी पीड़ित थे, उनमें यह खतरा लगभग चार गुणा ज्यादा पाया गया।

न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि किसी नकारात्मक भावना या गुस्से के बार-बार होने से हृदय की रक्त वाहिकाओं को दीर्घकालिक क्षति होने लगती है। जिसके कारण हृदय और रक्त संचार संबंधी रोगों का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है। अगर कोई इंसान हर समय गुस्सा करता है तो ऐसे में धीरे-धीरे उसकी रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त होती रहती हैं, जिसके कारण कोरोनरी हार्ट डिजीज होने का जोखिम कई गुणा बढ़ जाता है। ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के एक शोध के अनुसार गुस्से के कारण रक्त वाहिकाओं के फैलाव पर असर होता है, जिससे हार्ट में रक्त का प्रवाह कम हो सकता है।

Anger Like Time Meaning-Drive away anger like this
Drive away anger like this

गुस्से को दूर भगाने और दिल को हेल्दी रखने के लिए आप कुछ आसान तरीके अपना सकते हैं। गुस्सा आने पर एकदम से प्रतिक्रिया न दें। कुछ देर ठहरें और गहरी सांस लें। इससे आप शांत होंगे। छोटी सी वॉक भी गुस्से को काफी हद तक शांत कर सकती है। अपनी दिनचर्या में एक्सरसाइज,
योग और मेडिटेशन को शामिल करें। कई शोध बताते हैं कि नियमित व्यायाम से तनाव और गुस्सा कम हो सकता है। इसी के साथ अपनी सोच को सकारात्मक रखने की कोशिश करें क्योंकि हर चीज को नकारात्मक नजरिए से देखना भी आपको तनाव दे सकता है।

गुस्से से क्या नुकसान हो सकते हैं

1. ब्लड प्रेशर
2.सिरदर्द या माइग्रेन
3. दिल की बीमारियां
4.थकान व नींद न आना
5. मानसिक नुकसान
6. डिप्रेशन और एंग्जायटी
7. आत्मग्लानि और अपराधबोध
8. आत्मसम्मान में गिरावट
9. अकेलापन और सामाजिक दूरी
10. पारिवारिक नुकसान

गिनती करें: 1 से 10 तक, यह दिमाग को ठंडा करने का आसान तरीका है।
पानी पिएं: एक या दो गिलास ठंडा पानी पीने से शरीर की गर्मी शांत होती है।
सांस पर ध्यान दें: गहरी सांस लें (4 सेकंड में सांस लें, 4 सेकंड रोकें और 4 सेकंड में छोड़ें।
जगह बदलें: यदि माहौल गुस्सा दिला रहा है, वहां से कुछ देर के लिए बाहर निकल जाएं।
किसी से बात करें: जिस पर भरोसा हो, उनसे अपनी भावनाएं साझा करें।

1.मेडिटेशन और योग

रोजाना 15-20 मिनट ध्यान और योग करने से मस्तिष्क शांत रहता है और मानसिक
स्थिरता आती है।

2.डायरी लिखें

अपनी भावनाएं और गुस्से की वजह डायरी में लिखने से मन हल्का होता है और
कारणों को समझा जा सकता है।

3.’ना’ कहना सीखें

हर बार दूसरों को खुश करने की कोशिश न करें। अपनी सीमाएं तय करें।

4.सेल्फ केयर को प्राथमिकता दें

खुद को समय दें, चाहे वो एक कप चाय हो या किताब पढ़ना। यह मूड को संतुलित
रखता है।

5.परामर्श लें

अगर गुस्सा बार-बार नियंत्रण से बाहर हो रहा है, तो साइकोलॉजिस्ट या काउंसलर की
मदद लेना सही रहेगा।

How to Minimize the Impact on Children and Family
How to Minimize the Impact on Children and Family

1. अपने बच्चों को बताएं कि गुस्सा एक सामान्य भावना है लेकिन इसका तरीका
सही होना चाहिए।
2. गलत बोल देने पर माफी मांगें, यह बच्चों को भी क्षमा मांगने का साहस देता है।
3. घर में शांत माहौल बनाए रखने की कोशिश करें (टीवी की आवाज, मोबाइल की अधिसूचनाएं आदि सीमित करें।
गुस्सा आना बुरा नहीं है, लेकिन उस गुस्से को कैसे व्यक्त किया जाए, यह बेहद जरूरी है। महिलाएं परिवार की धुरी होती हैं और अगर वही संतुलन में न हों तो पूरा माहौल प्रभावित होता है। इसलिए, खुद को समय देना, अपनी भावनाओं को समझना और संतुलन बनाए रखना न केवल उनके लिए,
बल्कि पूरे परिवार के लिए आवश्यक है।

“छोटी सी वॉक भी गुस्से को काफी हद तक शांत कर सकती है। अपनी दिनचर्या में एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन को शामिल करें।”

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...