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नवरात्र में हर उपासक को नौ कन्याओं को भोजन करवाना चाहिए। इन नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है। नौ कन्याओं के साथ एक बालक यानी बटुक को भी भोजन करवाना चाहिए।
Kanya Pujan Importance: शारदीय नवरात्र में अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं को भोजन करवाने का विधान है। इससे मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों को अपना आशीर्वाद देती हैं। इस बार शारदीय नवरात्र में अष्टमी तिथि 10 अक्टूबर, 2024 को दोपहर 12.31 बजे से शुरू होगी। यह 11 अक्टूबर को दोपहर 12.06 बजे तक रहेगी। वहीं नवमी तिथि 11 अक्टूबर को दोपहर 12.06 बजे से शुरू होगी जो 12 अक्टूबर सुबह 10.58 बजे पर समाप्त होगी। इसी बीच कन्या पूजन किया जाएगा। नवरात्र में कन्या पूजन का बहुत ज्यादा महत्व होता है। माना जाता है कि इसके बिना नवरात्र पूजन और व्रत अधूरा होता है। कन्या पूजन के दौरान कुछ बातों का ध्यान हर भक्त को रखना चाहिए।
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इतनी कन्याओं को जरूर करवाएं भोजन

नवरात्र में हर उपासक को नौ कन्याओं को भोजन करवाना चाहिए। इन नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है। नौ कन्याओं के साथ एक बालक यानी बटुक को भी भोजन करवाना चाहिए। जिसे भैरव बाबा का रूप माना जाता है। हालांकि कुछ इसे हनुमान रूप भी मानते हैं। माना जाता है कि कन्या पूजन से प्रसन्न होकर मां दुर्गा अपने उपासकों को मनचाहा आशीर्वाद देती हैं। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है। आपकी सभी परेशानियां दूर होती हैं और रुके हुए कार्यों की सभी बाधाएं दूर होती हैं। नवरात्र की अष्टमी या नवमी तिथि को नौ कन्याओं को हलवा, पूड़ी, काले चने, खीर और नारियल का भोग लगाना चाहिए। साथ ही उन्हें दक्षिणा, उपहार आदि देने चाहिए। ध्यान रखें आप कन्याओं को दक्षिणा पूरे सम्मान, आदर और श्रद्धा से दें। उन्हें दान देने की कोशिश न करें। इससे माता रानी नाराज हो सकती हैं।
नियमों का ध्यान रखना है जरूरी
कन्या पूजन के समय कुछ नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। वहीं कुछ गलतियां करना आपको भारी पड़ सकता है और इससे मां दुर्गा अप्रसन्न हो सकती हैं। हमेशा नौ कन्याओं को ही भोजन करवाएं। इन सभी कन्याओं की उम्र 2 से 10 साल के बीच होनी चाहिए। इन्हें मां दुर्गा का रूप माना जाता है। अक्सर लोग अष्टमी या नवमी के दिन ही कन्याओं को भोजन के लिए आमंत्रित करते हैं, लेकिन ऐसा करना गलत है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार कन्या भोज का न्योता हमेशा एक दिन पहले देना चाहिए।
इस दिशा में बैठना चाहिए
कन्या भोज के दौरान कन्याओं को सही दिशा में बैठाकर भोजन करवाना भी बहुत आवश्यक है। कन्याओं और बटुक को हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुंह करवा कर बैठाना चाहिए। सभी को आसन पर ही बैठना चाहिए। इसके बाद ही पूजन करना चाहिए और भोजन करवाना चाहिए। ध्यान रखें भोजन हमेशा सात्विक होना चाहिए। इसमें लहसुन या प्याज का उपयोग नहीं करना चाहिए। भोजन करवाने के बाद कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लेना न भूलें। क्योंकि ये सभी कन्याएं मां दुर्गा के नौ रूपों का ही प्रतीक हैं। अगर आपको आस—पड़ोस में कन्याएं नहीं मिल रही हैं तो आप जरूरतमंद बच्चियों या लोगों को भी भोजन करवा सकते हैं। अगर कुछ भी संभव नहीं हो पा रहा है तो आप घर की बेटी या भतीजी को भी कन्या रूप मानकर पूजा करें और भोजन करवाएं।
