Navratri Kanya Puja 2024
Navratri Kanya Puja 2024

Navratri Kanya Puja: शारदीय नवरात्रि का पावन त्योहार चल रहा है। चहुंओर मां दुर्गा के पडांल, जागरण, डांडिया जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। नवरात्रि मां दुर्गा की उपासना के लिए सबसे उत्तम काल माना गया है। कहते हैं कि नवरात्रि में मां दुर्गा स्वयं धरती पर आकर भक्तों का कल्याण करती हैं। नवरात्रि में कलश स्थापना, अखंड ज्योति आदि का बड़ा महत्व है। उसी तरह नवरात्रि में कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है।

यूं तो प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तक कन्या पूजन कर सकते हैं। पर अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजा का महत्व अधिक है। कुन्या पूजन को कुमारी कन्या पूजा भी कहते हैं। पंडित दिनेश जोशी के अनुसार, शास्त्रों में मान्यता है कि कुमारी कन्या पूजन पर साक्षात मां दुर्गा घर भोजन करने आती हैं। ऐसे में व्रत पारण में पूरी श्रद्धा के साथ कुमारियों का पूजन व भोजन करना चाहिए। इस संबंध में एक पौराणिक कथा भी काफी प्रसिद्ध है, जिसमें दुर्गा पूजा में कन्या पूजन का महत्व बताया गया है।

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मां देवी ने किया था भोजन

Navratri Kanya Puja 2024-Maa Devi Bhojan
Navratri Kanya Puja 2024-Maa Devi Bhojan

कन्या पूजन को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार, संतान नहीं होने की बात से दुखी पंडित श्रीधर ने कन्याओं को भोजन पर आमंत्रित किया। श्रीधर ने बड़ी ही श्रद्धा से कुमारियों को भोजन करवाया। जब श्रीधर कन्याओं को भोजन करवा रहे थे तब स्वयं मां वैष्णो देवी कन्या के रूप में आकर बैठ गई, जो श्रीधर की श्रद्धा व भक्ति देखकर काफी प्रसन्न हुईं। माता ने श्रीधर से पूरे गांव में भंडारा कराने की बात कही। जिस पर श्रीधर ने गांव में भंडारे का आयोजन करवाया। इसके बाद श्रीधर के घर एक कन्या ने जन्म लिया। मान्यता है कि तब से ही नवरात्रि में व्रत पारण के दिन कन्या पूजन व भोजन की परंपरा शुरू हुई।

उम्र के अनुसार अलग-अलग रूप

Navratri Kanya Puja 2024-Different forms according to age
Navratri Kanya Puja 2024-Different forms according to age

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कन्या पूजन में कन्याओं की उम्र के अनुसार उनका अलग अलग रूप माना जाता है। पंडित दिनेश जोशी बताते हैं कि दो वर्ष की कन्या दरिद्रभंजन का रूप होती है यानी दूख हरने वाली। तीन वर्ष की कन्या को त्रि मूर्ति, चार व पांच वर्ष की कन्या को कल्याणी, जो कल्याण करती हो। छह वर्ष की कन्या को कालिका, जो राजयोग व विद्या प्रदान करती हो। सात वर्ष की कन्या को चंडिका, आठ वर्ष की कन्या को शाम्भवी, नौ वर्ष की कन्या को मां दुर्गा का रूप, जो शत्रुओं का नाश करती हो। वहीं, दस वर्ष की कन्या को सुभद्रा का रूप माना जाता है, जो सभी मनोरथ पूरा करने वाली हो। इस प्रकार कन्या पूजन में 2 से 10 वर्ष की कन्याओं का भोजन व पूजन किया जाता है।

नवरात्रि में कैसे करें कन्या पूजन

Navratri Kanya Puja
Navratri Kanya Puja

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवरात्रि में 9 कन्याओं को आमंत्रित करें। उनका आदर सत्कार करें। घर प्रवेश करने के बाद उनको लकड़ी के पाट पर बैठाकर उनके पैर को दूध या पानी से धोएं। उनके माथे पर कुमकुम या रोली का तिलक लगाएं और उनकी पूजा करें। इसके बाद सभी कन्याओं को आसन पर बिठाकर भोजन परोसें। इसके बाद कन्याओं को दक्षिणा में उपहार स्वरूप कुछ भेंद करें।