आज की भागम-भाग वाली जि़ंदगी में जहां ज़्यादातर माता-पिता दोनों ही वर्किंग होते हैं। वहां इस बात की अहमियत बहुत बढ़ गई है कि हम अपने बच्चे की परवरिश कैसी कर रहे हैं। इसके लिए ये बहुत ज़रूरी है कि हम सबसे पहले अपनी व्यस्त जीवन शैली में से जितना हो सके, उतना समय अपने बच्चे के लिए निकालें। इस बात में कोई शक नहीं कि माता-पिता दोनों का कमाना आज के वक्त की जरूरत बन गई है, लेकिन इस चक्कर में अपने बढ़ते बच्चे को हरगिज़ इग्नोर न करें।
 
बच्चे के साथ गुज़ारें क्वॉलिटी टाइम
 
चाहे वक्त की कमी हो या न हो, ये बात बहुत ज़रूरी है कि अपने बच्चे के साथ वक्त सिर्फ गुज़ारें ही नहीं, बल्कि उसे अपना क्वॉलिटी टाइम दें। इस का सीधा सा मतलब ये है कि आप बच्चे की हर एक्टिविटी में शामिल रहें। साथ ही उसे सही-गलत की भी जानकारी देती रहें। उसके साथ छोटे-छोटे गेम्स खेलें या मनोरंजक कहानियां सुनाएं। इससे बच्चे की दिमागी विकास में सहायता मिलेगी।
 
डेली रूटीन सेट करें
 
बच्चों के शुरुआती दिनों में ही अगर एक निर्धारित रूटीन बना दिया जाए और उसी के अनुसार उसके दिन के कामों को बांटा जाए तो इससे बच्चे के साथसाथ मां को भी सहूलियत होती है। इससे बच्चा समय के हिसाब से सारे काम करेगा। सोना, खेलना, घूमना इन सब का एक नियमित रूटीन बनाएं।
 

बनाएं बच्चे को सोशल
 
आज समय की कमी की मार की वजह से लोग अपने घरों में सिमट कर रह गए हैं। ऐसे में आज के बच्चे समाज में लोगों से ज़्यादा घुलने-मिलने से हिचकिचाते हैं। अपने बच्चे को कम उम्र से ही लोगों के बीच रखें। बड़े-छोटे की पहचान कराएं। साथ ही आस-पास के परिचित लोगों के घर भी ले जाएं। इससे बच्चे लोगों के बीच घुलना-मिलना सीखेंगे। ये बच्चे के विकास के लिए बहुत ज़रूरी है। इससे बच्चे अंतर्मुखी होने से बचते हैं।
 
डिजिटल दुनिया से दूरी है ज़रूरी
 
यूं तो मौजूदा समय में तकनीकी चीज़ों से दूर रहना संभव नहीं है, लेकिन जितना हो सके, अपने बच्चे के सामने मोबाइल, टीवी, कंह्रश्वयूटर आदि के प्रयोग से बचें। डॉक्टर्स का मानना है कि आजकल छोटे बच्चे के विकास में सबसे बड़ी बाधा ये तकनीकी चीज़ें ही हैं। इससे बच्चों की फिजिकल एक्टिविटीज घट गई हैं, जो उनके संपूर्ण विकास में रुकावट पैदा करती हैं।
 
बनाएं शेयरिंग की आदत
 
बच्चों की दुनिया बहुत छोटी होती है। कुछ गिने-चुने दोस्त ही उसमें शामिल होते हैं, इसलिए अपने बच्चे में चीज़ों को शेयर करने की आदत डालें। साथ ही अपने बढ़ते बच्चों में गरीब और ज़रूरतमंद बच्चे से अपनी चीज़ें बांटने की आदत डालवाएं। इससे उसके व्यक्तित्व निर्माण में सहायता मिलेगी। बर्थडे जैसी गतिविधियां महज़ पार्टी तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें ऐसे बच्चों के बीच ले जाएं, जहां उन्हें जीवन के दूसरे पहलू जानने का भी मौका मिले।
 
प्रकृति से दोस्ती भी है ज़रूरी
 
बढ़ते बच्चे दुनिया की हर चीज़ को लेकर बहुत उत्सुक होते हैं। ऐसे में उन्हें पेड़-पौधों के करीब ले जाएं। छोटे बच्चे की हाथों से पत्ते, फूल को महसूस करने दें। शोध की माने तो इस तरह के बच्चे जो प्रकृति प्रेमी होते हैं, वे स्वभाव के शांत और दयालु होते हैं। अपने बच्चे में इस गुण के विकास के लिए घर या सोसायटी गार्डन में उसके साथ मिल कर बागबानी करें। उनकी अहमियत उन्हें समझाएं।
 
पेरेंट्स हैं बच्चों के पहले गुरु
 
आप बच्चे के सामने जिस तरह की एक्टिविटी करेंगे, बच्चे उसकी न$कल करना शुरू कर देंगे, इसलिए बच्चे के सामने वैसे काम हरगिज़ न करें, जो आपकी नज़र में ठीक नहीं हैं। छोटे बच्चे को बिजी रखने के लिए उसे मोबाइल पकड़ाने की जगह कलरफुल और बड़ी तस्वीरों वाली किताबें दें। खुद व्यवस्थित रहें, ताकि बच्चे में भी व्यवस्थित रहना सीखने की चाह पैदा हो।
 
डालें ‘ना’ सुनने की भी आदत
 
हम अपने बच्चे की हर ज़रूरत, पसंद-नापसंद को मानते हुए उसके ही मन की करने लग जाते हैं। बच्चे अक्सर जि़द करके या रोकर अपनी बात मनवा लेते हैं। ऐसे में उन्हें ना को स्वीकार करने की भी आदत डलवाएं। इससे बच्चा जि़द्दी नहीं बनता। उन्हें सही या गलत के चुनाव को समझाइए। बच्चे के शुरुआती दिनो की ही आदत उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती है।
 
हाइजिन की आदत भी है ज़रूरी
 
हालांकि ये बहुत मुश्किल है कि हम हर वक्त अपने बच्चे से साफ-सुथरा रहने की उम्मीद करें, क्योंकि छोटे बच्चे अक्सर फर्श पर ही खेलना पसंद करते हैं, लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े हों, उन्हें सफाई के महत्त्व को समझाइए। अगर आप और घर के अन्य सदस्य उसके सामने खुद को और खुद से जुड़ी चीज़ों को साफ रखेंगे तो आपसे इस बात को सीख कर वह अपनी आदत में शामिल करेगा। खुद भी व्यवस्थित रहिए ताकि बच्चे आप से सीख सकें।
 
सिखाएं सब की इज़्ज़त करना
 
जब हम कोई आदत बच्चे में शुरुआत से डालते हैं तो बच्चे उसे जल्दी सीख जाते हैं। अक्सर हम अपने बच्चों से हंसी-मज़ाक में लड़के-लड़की के बीच का फर्क़ कर देते हैं- ये कहके कि ये काम लड़के करते हैं या ये काम लड़कियों का है। आज के मौजदा वक्त में हमें इस आदत को बदलने की बेहद ज़रूरत है। 
 
बच्चे बचपन से इस फर्क़ को अपनी जि़ंदगी का हिस्सा मान लेते हैं। अगर हमें अपने बच्चे का सही विकास करना है और उसे एक बेहतर इंसान बनाना है तो उसके दिमाग में ऐसी बातों को घर न करने दें। सब की इज़्ज़त करना सिखाएं, चाहे वह लड़का हो या लड़की।