भारत कथा माला
उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़ साधुओं और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं
ओड़िशा राज्य के संबलपुर शहर में रिषभ नाम का 7 साल का लड़का रहता था। वह अच्छे घराने का था। उसका घर भी बहुत बड़ा था। वो हर दिन स्कूल से आने के बाद अपने घर के बगीचे में जाकर अपने दोस्तों के साथ खेलता था।
बगीचा बड़ा होने के कारण उसमें ढेर सारे तरह-तरह के फूल लगे हुए थे जिसकी वजह से वहाँ ढेर सारी तितलियाँ आती थी। एक दिन रिषभ और उसके दोस्त क्रिकेट खेलते-खेलते बोर हो गए थे तो वे जाकर बेंच पर बैठ गए थे। बैठे-बैठे रिषभ के दोस्त अर्बन ने देखा कि बगीचे में ढेर सारी तितलियाँ उड़ रही है तो रिषभ और उसके दोस्तों ने तय किया कि वह लोग तितलियाँ पकड़ेंगे और उन्हें इकट्ठा करेंगे और अंत में जिसने सबसे ज्यादा तितलियाँ पकडी होंगी, वह विजेता होगा।
फिर सभी बच्चे तितलियाँ पकड़ने में लग जाते हैं। इसके कारण कुछ तितलियाँ मर जाती हैं, कुछ तितलियों के पंख फट जाते हैं और कुछ तितलियाँ डिब्बे में बंद होकर तड़प रही होती हैं। इसी बीच रिषभ की मम्मी बच्चों को देखने बगीचे में आती हैं और देखती हैं कि बच्चे तितलियाँ पकड़ रहे हैं। फिर उन्होंने सभी बच्चों को अपने पास बुलाया और बताया कि उन्हें तितलियों को इस तरह नहीं पकड़ना चाहिए। उन्होंने बच्चों को समझाया कि तितलियाँ अपनी जिंदगी की शुरुआत छोटे से अंडे के रूप में करती है फिर वह ककून में परिवर्तित हो जाती हैं फिर वह ककून से बाहर आ जाती है बिलकुल हम जैसे छोटे बच्चों की तरह। सभी तितलियों के चार पंख अलग-अलग स्वरूप और रंग के होते हैं जो उन्हें दिखने में खूबसूरत और दिलचस्प बनाते हैं। पर तितलियाँ बहुत ही सुकुमार और नाजुक होती है।
यदि कोई इन्हें कसकर पकड़ ले तो इनके पंख फट जाते हैं या फिर यह मर जाती है। तो बताओ बच्चों, इस तरह तितलियों को पकड़ना क्या सही बात है? तुम जाने-अनजाने उनको पकड़ कर उन्हें घायल कर रहे हो। बच्चों ने जब यह बात जानी तब उन्हें बहुत दुख हुआ और उन्होंने वादा किया कि वह अब से इस तरह की गलती नहीं करेंगे। इसके बाद सभी बच्चों ने डिब्बों में बंद तितलियों को आजाद कर दिया और अपने-अपने घर चले गए। तो बच्चों हमें इससे यह शिक्षा मिलती है कि हमें जीव-जन्तुओं को तंग नहीं करना चाहिए। जीव-जन्तु इंसानों की तरह बोल नहीं सकते इसलिए उनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’
